क्या जैविक हथियार बना रहा था रूस? ‘प्लेग मिस्ट्री’ पर ट्रंप ने बताया सच
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Russia Plague Mystery or Bio Weapon: रूस में जब से साइबेरिया की लैब में रिसर्चर की मौत हुई है, तब से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है. कहा गया कि रूस में प्लेग फैल गया है, जिस पर अब क्रेमलिन ने खरी-खरी सुनाई है. उसने कहा है कि ये सारी अफवाहें हैं.
रूस में बायोवेपन बनाने की अफवाह. (फाइल फोटो- एपी)
Russia Plague Mystery or Bio Weapon: रूस के साइबेरिया में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला की मौत के बाद पूरी दुनिया सकते में आ गई थी. चूंकि मरने वाली महिला में निमोनिया जैसे लक्षण थे और वो प्लेग इंस्टीट्यूट में रिसर्चर के तौर पर काम करती थी, ऐसे में ये आशंका जताई जाने लगी कि रूस में निमोनिक प्लेग की बीमारी फैल चुकी है. इस आकलन को और भी ज्यादा बल दिया 200 लोगों को क्वारंटाइन कर मेडिकल निगरानी में रखने वाली रिपोर्ट ने. हालांकि अब रूस ने सख्त लहजे में इस पर जवाब देते हुए कहा है कि उसके देश में कोई प्लेग नहीं फैला है.
इतना ही नहीं क्रेमलिन की ओर से 7 अक्टूबर को इन सारी रिपोर्ट्स को झूठ करार देते हुए कहा गया है मीडिया को चेतावनी दी गई है कि वे अफवाहें न फैलाएं. फ्रांस 24 के मुताबिक अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने प्लेग को लेकर रूस से रिपोर्ट तलब की थी. इसके जवाब में क्रेमलिन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में ज्यादातर मीडिया जो कह रहा है, वो अफवाह है. इसके अलावा रूस ने ये भी साफ किया है कि प्लेग के मामले में जो कुछ रूसी हेल्थ वॉचडॉग (Rospotrebnadzor) की ओर से कहा जा रहा है, वही माना जाना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
साइबेरिया की लैब में मरने वाली महिला का नाम दरिया शिपिलोवा बताया जा रहा है. 2 अक्टूबर को उनकी मौत हुई थी, जिसकी वजह उन्हें अज्ञात कारण से निमोनिया होना बताया गया. स्थानीय मीडिया आउटलेट ‘पीपल ऑफ बैकाल’ के आशंका जताई कि संभव है कि वे टूटी हुई टेस्ट ट्यूब से न्यूमोनिक प्लेग से संक्रमित हुई हों. उनके संपर्क में आए लगभग 200 लोगों को मेडिकल निगरानी या क्वारंटीन में रखा गया है. हालांकि, अभी तक इनमें से किसी में प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है. बस इसी घटना के बाद पूरी दुनिया अलर्ट पर आ गई.
क्या जैविक हथियार बना रहा था रूस?
इस घटना के बाद कुछ लोगों में यह संदेह जताया जा रहा था कि कहीं यह कोई बायो वेपन तो नहीं है. जैविक हथियार एक खतरनाक जैविक हथियार होता है, जिसके लिए सीमा पर सेना भेजने या मिसाइल चलाने की जरूरत नहीं पड़ती. यह चुपके से दुश्मन को तबाह कर सकता है और इसका असर आने वाली कई पीढ़ियों तक रह सकता है. हालांकि इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सामने आए और उन्होंने इस संदेह को खारिज कर दिया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस में फैला प्लेग कोई बायोवेपन है, तो उन्होंने कहा जल्दी ये पता चल जाएगा. ट्रंप ने आगे स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि यह कोई बायोवेपन है. इसके साथ ही उन्होंने माना कि स्थिति नियंत्रण में है.
क्या कह रहा है रूस?
इस बीच क्रेमलिन ने साइबेरिया में प्लेग के दूसरे संदिग्ध मामले की रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया. क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा कि मीडिया इस मामले पर बहुत कुछ रिपोर्ट कर रहा है, लेकिन इनमें से अधिकांश जानकारी झूठी है. WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने भी मॉस्को से मीडिया रिपोर्ट्स को स्पष्ट करने की अपील की, जिनमें दूसरे कर्मचारी में अज्ञात कारण से निमोनिया की बात कही गई है. रूसी अधिकारी अभी भी मौत के कारण की पुष्टि नहीं कर रहे हैं और ऑनलाइन फैली कुछ दस्तावेजों में बताए गए विशेष उपायों से इनकार कर रहे हैं.
कुल मिलाकर रूस में प्लेग की इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है. ट्रंप के बयान ने जैविक हथियार वाले संदेह को कुछ हद तक शांत किया है, जबकि क्रेमलिन मीडिया की अतिरंजित रिपोर्टिंग को खारिज कर रहा है. स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है और आधिकारिक जांच के नतीजों का इंतजार है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता बहुत जरूरी है ताकि अफवाहें न फैले और सही नियंत्रण उपाय अपनाए जा सकें.