MBBS Admission, FMGE New Rules 2026: विदेश से MBBS कर रहे हैं? FMGE देने से पहले जान लें ये नियम, एक गलती पड़ सकती है भारी


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MBBS Admission, FMGE New Rules 2026: विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके भारत में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए सिर्फ डिग्री हासिल करना ही काफी नहीं हो सकता. जॉर्जिया की छह साल की MD डिग्री को लेकर उठे विवाद के बीच NMC ने स्पष्ट किया है कि FMGE और भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन की पात्रता के लिए उस देश में मेडिकल प्रैक्टिस से जुड़ी लाइसेंसिंग शर्त भी महत्वपूर्ण है.

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FMGE New Rules 2026, NMC FMGE Eligibility: विदेश से एमबीबीएस कैसे करें?

MBBS Admission, FMGE New Rules 2026: विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर भारत लौटने वाले छात्रों के लिए एक जरूरी बात सामने आई है. अगर कोई भारतीय छात्र किसी दूसरे देश से मेडिकल की डिग्री हासिल करता है और भारत में डॉक्टर के तौर पर काम करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्‍जामिनेशन (Foreign Medical Graduate Examination)यानी FMGE देना चाहता है तो सिर्फ मेडिकल डिग्री होना या उस देश में जूनियर डॉक्‍टर के तौर पर काम करने की अनुमति मिलना पर्याप्त नहीं माना जाएगा. नेशनल मेडिकल कमीशन यानी NMC ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार के पास उस देश में मेडिकल प्रैक्टिस करने का ऐसा लाइसेंस होना चाहिए जो वहां के मेडिकल ग्रेजुएट्स को मिलने वाले लाइसेंस के बराबर हो.

NMC का यह स्पष्टीकरण जॉर्जिया (Georgia)की मेडिकल डिग्री को लेकर उठे सवालों के बीच सामने आया है. खास तौर पर छह साल की मेडिकल डिग्री पूरी करने के बाद जॉर्जिया में मिलने वाले जूनियर डॉक्‍टर के दर्जे को लेकर स्थिति साफ की गई है. NMC के मुताबिक अगर जूनियर डॉक्‍टर के तौर पर काम करने की अनुमति स्वतंत्र रूप से मरीजों का इलाज करने के लाइसेंस के बराबर नहीं है, तो केवल यह दर्जा FMGE में शामिल होने की शर्त को पूरा नहीं करेगा.

भारत में डॉक्टर बनने के लिए FMGE जरूरी

भारत में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन पाने के लिए FMGE की प्रक्रिया से गुजरना होता है. ऐसे में विदेश में मिली मेडिकल डिग्री और वहां उम्मीदवार को मिली प्रैक्टिस की अनुमति दोनों महत्वपूर्ण हो जाते हैं.NMC ने अब स्पष्ट किया है कि किसी दूसरे देश से मेडिकल शिक्षा पूरी करने वाले उम्मीदवार के पास उस देश में मेडिकल पेशा अपनाने का लाइसेंस होना चाहिए. यह लाइसेंस ऐसा होना चाहिए जिससे वह वहां के मेडिकल ग्रेजुएट्स के समान शर्तों पर स्वतंत्र रूप से मेडिकल प्रैक्टिस कर सके यानी सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि छात्र ने विदेश से छह साल की मेडिकल डिग्री पूरी कर ली है या डिग्री के बाद उसे अस्पताल में जूनियर डॉक्‍टर के रूप में काम करने की अनुमति मिल गई है.

जूनियर डॉक्‍टर के दर्जे को लेकर NMC ने क्या कहा?

NMC ने अपने जवाब में साफ किया है कि किसी उम्मीदवार को मिला जूनियर डॉक्‍टर का दर्जा तभी FMGE की पात्रता के लिए पर्याप्त माना जा सकता है जब उससे संबंधित देश में उसे कानून के तहत आवश्यक स्तर पर मेडिकल प्रैक्टिस करने की अनुमति मिलती हो.अगर किसी देश में स्वतंत्र रूप से डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए मेडिकल ग्रेजुएशन के बाद PG,रेसीडेंसी या कोई अतिरिक्त परीक्षा पास करना जरूरी है तो केवल जूनियर डॉक्‍टर के रूप में काम करने की अनुमति को स्वतंत्र मेडिकल लाइसेंस के बराबर नहीं माना जाएगा.यही बात जॉर्जिया (Georgia)के मामले में खास तौर पर महत्वपूर्ण हो जाती है.

जॉर्जिया के छह साल के मेडिकल कोर्स को लेकर क्या है विवाद?

NMC ने यह स्पष्टीकरण अभ्यर्थी भावना की ओर से प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद दिया. भावना ने जॉर्जिया के छह वर्षीय मेडिकल कोर्स की वैधता और भारत में FMGE में शामिल होने की पात्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था.जॉर्जिया में छह साल की मेडिकल एजुकेशन पूरी करने के बाद मिलने वाली डिग्री को MD कहा जाता है. विवाद इस बात को लेकर है कि इस डिग्री के बाद छात्र को वहां जूनियर डॉक्‍टर के रूप में काम करने की अनुमति मिल सकती है लेकिन इससे उसे तुरंत स्वतंत्र रूप से मरीजों का इलाज करने का अधिकार नहीं मिलता.यही अंतर FMGE की पात्रता के मामले में महत्वपूर्ण है.

NMC के नियम 4(B) में क्या है शर्त?

NMC ने अपने जवाब में नेशनल मेडिकल कमीशन (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसर) रेगुलेशन 2021 के रेगुलेशन 4(B)का हवाला दिया है.इस नियम के अनुसार दूसरे देश से मेडिकल शिक्षा पूरी करने वाले व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह उस देश के मेडिकल रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास रजिस्टर्ड या लाइसेंसधारी हो. उसके पास वहां उसी तरह स्वतंत्र रूप से मेडिकल प्रैक्टिस करने का अधिकार होना चाहिए जिस तरह उस देश के अपने मेडिकल ग्रेजुएट्स को मिलता है.सरल भाषा में समझें तो विदेश से मेडिकल डिग्री लेने के बाद उम्मीदवार को यह भी साबित करना होगा कि वह जिस देश से डिग्री लेकर आया है वहां की व्यवस्था के अनुसार स्वतंत्र रूप से डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस प्राप्त कर सकता है.

जॉर्जिया में जूनियर डॉक्‍टर बनने के बाद भी क्या बचता है?

जॉर्जिया के मामले में छह साल की मेडिकल डिग्री पूरी करने के बाद छात्र को जूनियर डॉक्‍टर के रूप में काम करने की अनुमति मिल सकती है लेकिन यह काम किसी सर्टिफाइड स्‍पेशलिस्‍ट की निगरानी में होता है. इसका मतलब यह है कि जूनियर डॉक्‍टर का दर्जा अपने आप में स्वतंत्र डॉक्टर के बराबर नहीं है.स्वतंत्र रूप से मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए वहां अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत बताई गई है. इसमें संबंधित परीक्षा, आगे की पढ़ाई या रेसिडेंसी और स्वतंत्र प्रैक्टिस का लाइसेंस शामिल हो सकता है इसलिए अगर किसी छात्र को छह साल की मेडिकल पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल जूनियर डॉक्‍टर के रूप में काम करने की अनुमति मिलती है लेकिन स्वतंत्र रूप से मरीजों का इलाज करने का लाइसेंस नहीं मिलता तो NMC के रेगुलेशन 4(B) की शर्त को लेकर सवाल खड़ा होता है.

विदेश जाने वाले मेडिकल छात्रों को क्या समझना चाहिए?

इस पूरे मामले से विदेश में मेडिकल पढ़ाई करने की योजना बना रहे छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात यह निकलती है कि सिर्फ किसी देश की मेडिकल डिग्री की अवधि या नाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए.छात्रों को यह भी देखना चाहिए कि डिग्री पूरी करने के बाद उस देश में उन्हें किस स्तर का मेडिकल लाइसेंस मिलता है. क्या वे उसी डिग्री के आधार पर स्वतंत्र रूप से मरीजों का इलाज कर सकते हैं या उन्हें आगे PG, रेसिडेंसी, परीक्षा या दूसरी लाइसेंसिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है? किसी देश में मेडिकल ग्रेजुएट के रूप में काम करने और उसी देश में स्वतंत्र रूप से डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के अधिकार में अंतर हो सकता है. FMGE की पात्रता के संदर्भ में यही अंतर बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.



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