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Karl Deisseroth Nobel Prize 2026: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कार्ल डिजायरोथ को 2026 का मेडिसिन नोबेल मिला है. नोबेल प्राइज जीतने के बाद जश्न मनाने के बजाय उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल के सैंडविच बनाए, जिसका प्यारा वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है.
Karl Deisseroth Nobel Prize 2026: नोबेल प्राइज विजेता ने पुरस्कार जीतने के बाद भी अपना रूटीन जारी रखा
नई दिल्ली (Karl Deisseroth Nobel Prize 2026). नोबेल पुरस्कार जीतना आम बात नहीं है. किसी भी वैज्ञानिक के लिए यह जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट होता है. अमेरिका की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कार्ल डिजायरोथ ने साबित कर दिया है कि दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान मिलने के बावजूद पिता के लिए उसकी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां सबसे ऊपर होती हैं. हाल ही में उन्हें साल 2026 के मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्रोफेसर का अंदाज
इंटरनेट पर इस वीडियो को ‘न्यू नोबेल लॉरिएट, सेम स्कूल लंच ड्यूटी’ के कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है. यह मोमेंट साबित करता है कि पारिवारिक प्यार और बच्चों की छोटी-छोटी खुशियां हर बड़े मेडल और खिताब से कहीं ज्यादा कीमती होती हैं.
बच्चों की खुशी और दिल छू लेने वाला रिएक्शन
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कार्ल डिजायरोथ को जब पता चला कि उन्हें 2026 का मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार मिलने वाला है तो उन्होंने सबसे पहले अपने बच्चों को यह गुड न्यूज दी. इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें उनकी 10 साल की बेटी सोफिया और 13 साल की बेटी एम्मा खुशी से चीखती हुई अपने पिता से लिपट जाती हैं. उनका 16 साल का बेटा हडसन एक पल के लिए सन्न रह गया. फिर प्यार से पिता को गले लगा लिया. उनका सबसे बड़ा बेटा Alexander तब यूनिवर्सिटी में ही था.
Karl Deisseroth Nobel Prize 2026: नोबेल प्राइज जीतने के बाद कार्ल डिजायरोथ ने अपने बच्चों के साथ खुशखबरी शेयर की थी
नोबेल मिलने पर भी नहीं छूटी पेरेंटिंग की ड्यूटी
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार की घोषणा के तुरंत बाद भी कार्ल डिजायरोथ ने आम पिता की भूमिका निभाई. इंटरव्यू, बधाई संदेशों और कैमरों की चकाचौंध से दूर उन्होंने सबसे पहले वही काम किया जो लाखों माता-पिता हर सुबह करते हैं. उन्होंने अपने बच्चों के स्कूल जाने के लिए टिफिन पैक किया और खुद अपने हाथों से उनके लिए सैंडविच बनाए. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने वीडियो शेयर करते हुए बहुत ही प्यारा कैप्शन दिया- नया नोबेल विनर, लेकिन स्कूल लंच की ड्यूटी वही पुरानी.
Karl Deisseroth Nobel Prize Winner: नोबेल प्राइज विजेता ने इतना बड़ा पुरस्कार जीतने के बाद भी पेरेंटिंग ड्यूटी जारी रखी
क्या है ऑप्टोजेनेटिक्स और क्यों मिला सम्मान?
कार्ल डिजायरोथ (MD, PhD) स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बायोइंजीनियरिंग, psychiatry और बिहेवियरल साइंसेज के प्रोफेसर हैं. उन्हें जर्मनी के वैज्ञानिकों- पीटर हेगेमैन और जॉर्जी नागेल- के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार मिला है. इन तीनों दिग्गजों को ‘ऑप्टोजेनेटिक्स’ की खोज के लिए यह सम्मान दिया गया है. इस क्रांतिकारी तकनीक की मदद से वैज्ञानिक रोशनी का इस्तेमाल करके जीवित दिमाग के अंदर खास Nerve cells की एक्टिविटी को चालू या बंद कर सकते हैं. इससे ब्रेन सर्किट का काम समझने में मदद मिलती है.
राइटिंग से लेकर न्यूरोसाइंस तक का सफर
वैज्ञानिक माता-पिता के घर जन्मे कार्ल का पहला प्यार ‘लेखन’ (Writing) था. वह पहले न्यूरोसर्जरी में जाना चाहते थे, लेकिन स्टैनफोर्ड मेडिसिन में अपने साइकियाट्री रोटेशन के दौरान मरीजों से मिलने के बाद उनका झुकाव इस क्षेत्र की तरफ हुआ. आज उनकी यह खोज चिकित्सा जगत के इतिहास में अमर हो चुकी है. लेकिन उनका साधारण और पारिवारिक अंदाज बताता है कि असली सफलता वही है जो इंसान को हमेशा जमीन से जोड़कर रखे.