CISF: थोड़ा मुश्किल से गुजरे वो 84 दिन, पर 40 जवानों के हाथ लग गई स्‍पेशल पावर, अब एयरपोर्ट पर दिखाएंगे करिश्‍मा


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CISF: मुश्किल से गुजरे 84 दिन, फिर हाथ लगी स्‍पेशल पावर, अब दिखाएंगे करिश्‍मा

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सीआईएसएफ के 40 जवानों के लिए बीते 84 दिन थोड़ा मुश्किल जरूर रहे होंगे, लेकिन इन बीते दिनों की जर्नी में उनके हाथ ऐसी पॉवर लग गई है, जिससे वह नकेवल अपनी यूनिट बल्कि देश की सुरक्षा को पुख्‍ता कर सकेंगे. क्‍या है सीआईएसएफ के 40 जवानों के 84 दिनों की पूरी कहानी, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.

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CISF: मुश्किल से गुजरे 84 दिन, फिर हाथ लगी स्‍पेशल पावर, अब दिखाएंगे करिश्‍माZoom

एयरपोर्ट पर तैनाती से पहले सीआईएसएफ के 40 जवानों को ‘स्‍पेशल पॉवर’ से लैस किया गया है. (Image: CISF)

CISF News: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 40 जवानों के लिए बीते 84 दिन थोड़ा मुश्किल भरे रहे. इन 84 दिनों के दौरान इन 84 जवानों की सुबह की शुरूआत ड्यूटी पोस्‍ट की जगह क्‍लास रूम से होती और यहां से बाहर निकलते-निकलते शाम हो जाती. क्‍लास रूम में बातें भी ऐसी होती कि दिमाग के तार हिल जाते. देखते-देखते ये 84 दिन किसी तरह बीते गए, पर दे गए ऐसी स्‍पेशल पावन, जिसने इन सभी 40 जवानों को सीआईएसएफ में खास बना दिया है. जी हां, अब इन खास जवानों की तैनाती देश के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले एयरपोर्ट पर की जा रही है. अब इनकी जिम्‍मेदारी एयरपोर्ट को उस मॉर्डन वॉरफेयर से बचाने की है, जिसकी कोई आहट नहीं होती.

दरअसल, एयरपोर्ट सहित दूसरे संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभाल रही सीआईएसएफ ने अपने इन जवानों को साइबर खतरों से निपटने के लिए खास तौर पर तैयार किया है. इन सभी 40 जवानों को दिल्‍ली की लोक नायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी में 84 दिनों की स्‍पेशल ट्रेनिंग दी गई है. ‘साइबर सिक्योरिटी एंड इंसिडेंट रिस्पॉन्स’ नाम से आयोजित इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरूआत 13 जुलाई 2026 को हुई थी और इसका समापन 8 अक्‍टूबर को हुआ है. इस स्‍पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम में देश के अलग-अलग एयरपोर्ट सिक्योरिटी ग्रुप्स (एएसजी) से जुड़े 40 सीआईएसएफ जवानों ने हिस्सा लिया है.

साइबर सिक्‍योरिटी प्रोग्राम का हिस्‍सा बनने वाले सीआईएसएफ के जवान और अधिकारी. (Image: CISF)

साइबर अटैक से लेकर डिजिटल फोरेंसिक तक ट्रेनिंग
इस ट्रेनिंग का फोकस सिर्फ साइबर सिक्योरिटी की थ्योरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीआईएसएफ जवानों को साइबर अटैक की पहचान करने के साथ उसकी जांच करना भी सिखाया गया. इसके अलावा, जवानों को बताया गया कि साइबर अटैक की स्थिति में किस तरह क्विक रिस्पॉन्स करना है. कोर्स के दौरान साइबर थ्रेट लैंडस्केप, नेटवर्क सिक्योरिटी, सिस्टम सिक्योरिटी, डिजिटल फोरेंसिक और इंसिडेंट रिस्पॉन्स जैसे अहम विषयों की भी ट्रेनिंग दी गई. इसका मकसद सीआईएसएफ जवानों को ऐसे साइबर थ्रेट्स के लिए तैयार करना था, जो आने वाले समय में क्रिटिकल सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चुनौती बन सकते हैं.

साइबर अटैक से जुड़े मामलों की जानकारी देतीं प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी सिन्हा. (Image: CISF)

आईएफएसओ से पावरग्रिड तक कराया गया प्रैक्टिकल एक्सपोजर
ट्रेनिंग के दौरान सीआईएसएफ जवानों को कई महत्वपूर्ण संस्थानों और स्पेशलाइज्ड फैसिलिटीज का दौरा भी कराया गया. इनमें आईएफएसओ, सीएफएसएल, पावरग्रिड, डीएमआरसी और यूआईडीएआई शामिल रहे. इन विजिट्स के जरिए ट्रेनीज को रियल-वर्ल्ड साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस, डिजिटल फोरेंसिक और इंसिडेंट-रिस्पॉन्स मैकेनिज्म को करीब से समझने का मौका मिला. खासकर क्रिटिकल और सेंसिटिव ऑपरेशनल एनवायरनमेंट में साइबर सिक्योरिटी किस तरह काम करती है, इसका प्रैक्टिकल एक्सपोजर दिया गया.

सीआईएसएफ की साइबर प्रिपेयर्डनेस मजबूत करने पर जोर
ट्रेनिंग के समापन पर आयोजित वैलेडिक्टरी सेरेमनी में एनएफएसयू दिल्ली कैंपस की डिप्टी डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी सिन्हा, प्रो. (कर्नल) निधिश भटनागर, सीआईएसएफ हेडक्वार्टर के एआईजी सुब्रत झा समेत कई अधिकारी और फैकल्टी मेंबर्स मौजूद रहे. अधिकारियों के अनुसार, तेजी से बदलते साइबर थ्रेट लैंडस्केप के बीच सीआईएसएफ जवानों की साइबर कैपेबिलिटीज को लगातार मजबूत करना जरूरी है. इसके लिए इंसिडेंट रिस्पॉन्स की प्रिपेयर्डनेस बढ़ाने के साथ ट्रेनिंग के दौरान हासिल नॉलेज और स्किल्स को ऑपरेशनल प्रैक्टिस में लागू करने पर जोर दिया गया है.



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