Spain Housing Protest: 87 साल की बुजुर्ग दादी को उनके अपार्टमेंट से जबर्दस्ती बाहर निकाले जाने की घटना ने स्पेन में आंदोलन छेड़ दिया. देश में हाउसिंग सेक्टर की दिक्कत ने बड़ा रूप ले लिया है. घरों की कमी और किराए के आसमान छूते दाम का मामला बहुत गहरा हो गया है. मारिया डेल कार्मेल अबास्कल नामक महिला के साथ इस अमानवीय घटना ने पूरे देश में गहरा आक्रोश, बड़े पैमाने पर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और सरकार पर भारी राजनीतिक दबाव पैदा कर दिया था. दुखद यह है कि उस बुजुर्ग महिला ने अंतिम सांस ले ली है. उनका निधन जबरन बेदखली के कुछ हफ्तों के बाद हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. आखिरकार ये पूरा मामला क्या है?
अब इस मामले के बारे में पूरी बात जानने से पहले जरा सोचिए कि जिस घर में किसी ने अपनी जिंदगी के 70 साल से ज्यादा बिताए हों, अचानक एक दिन पुलिस आकर उसे बाहर फेंक दे तो क्या बीतेगी? मारिकारमेन के साथ यही हुआ. ज्यादा उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद प्रशासन ने कोई नरमी नहीं बरती. पुलिस ने सड़क को घेरकर उन्हें जबरन स्ट्रेचर पर लिटाकर घर से बाहर निकाला. हालांकि बाद में सोशल एक्टिविस्ट्स और यूनियनों के दबाव में एक समझौता भी हुआ कि उन्हें वापस लाया जाएगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस क्रूरता ने बुजुर्ग महिला की मानसिक और शारीरिक स्थिति को तबाह कर दिया था.
स्पेन से ये दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. 87 साल की बुजुर्ग महिला मारिया डेल कार्मेल अबास्कल का निधन हो गया है. उन्हें प्यार से मारिकारमेन कहकर बुलाया जाता था. वह स्पेन का सबसे बड़ा और गंभीर मुद्दा बन चुके आवासीय संकट का चेहरा बन चुकी थीं. अब वो इस दुनिया में नहीं रहीं. मैड्रिड स्थित उनके 70 साल पुराने घर से उन्हें बेरहमी के साथ बाहर निकाले जाने की घटना ने उनके हेल्थ को अंदर से झकझोर कर रख दिया था. आखिरकार अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
7 दशकों का आशियाना और बेदखली
मारिकारमेन पिछले 70 साल से अधिक समय से उसी अपार्टमेंट में रह रही थीं. लेकिन बढ़ते हुए किराए, संपत्ति के कड़े नियमों और मकान मालिक-किरायेदार विवाद की वजह से प्रशासन ने उन्हें घर से बाहर निकालने का फरमान सुना दिया. 23 सितंबर को पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया और उन्हें स्ट्रेचर पर लादकर घर से बाहर निकाला गया.
87 साल की मरिकारमेन
सड़कों पर उतरा जनसैलाब, लोगों में गुस्सा
मारिकारमेन की मौत की खबर मिलते ही स्पेन की जनता का गुस्सा फूट पड़ा. मैड्रिड के फेमस पुएर्ता डेल सोल स्क्वायर से लेकर संसद भवन तक हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. लोगों ने टेंट लगाकर डेरा डाल दिया और आसमान छूते किराए के साथ ही बेदखली के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया.
मारिकारमेन की मौत ने स्पेन के सुलगते गुस्से में पेट्रोल का काम किया. देखते ही देखते मैड्रिड की सड़कें जनसैलाब में बदल गईं. करीब 25 हजार से आधिक लोग सड़कों पर उतर आए. ऐतिहासिक पुएर्ता डेल सोल स्क्वायर पर प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर डेरा डाल दिया. सबकी जुबान पर संघर्ष करने का नारा था. लोगों ने इसको सिस्टम की तरफ से की गई हत्या करार दिया. आम जनता का कहना था कि देश में गरीबों और बुजुर्गों को उनकी छत से बेदखल किया जा रहा है, जबकि अमीर और टूरिस्ट्स के लिए किराए आसमान छू रहे हैं.
राजनीतिक भूचाल और सरकार पर दबाव
इस पूरे घटनाक्रम ने स्पेन की राजनीति में भूचाल ला दिया है. प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और देश में बढ़ते आक्रोश को थामने के लिए आपातकालीन आवास सुधार की बात कही. समय से पहले आम चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है. वहीं, विपक्ष ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है.
इस मानवीय त्रासदी ने स्पेन की सरकार को भी हिलाकर रख दिया है. बढ़ते सियासी दबाव के बीच प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज को भी इस घटना पर गहरा शोक जाहिर करना पड़ा. सरकार अब हालात को संभालने के लिए नए और सख्त आवास नियम लाने पर मजबूर हो गई है. इसमें 2030 तक बेदखली पर रोक के साथ ही शॉर्ट टर्म रेंटल पर लगाम लगाने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं.
दूसरी तरफ विपक्ष का साफ तौर पर कहना है कि इस गंभीर मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन जनता का गुस्सा अब थमने का नाम नहीं ले रहा है और स्पेन का हाउसिंग क्राइसिस आज के वक्त देश का सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बन चुका है.