15 साल की दोस्ती, मोदी-आबे की केमिस्ट्री, अब बनारस में पति के नाम हुई सड़क तो पत्नी की भर आईं आंखें


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Shinzo Abe Corridor: भारत-जापान के रिश्ते की गहराई इस चीज से ही समझी जा सकती है कि काशी के रुद्राक्ष कन्वेंशन में जापान के दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजे आबे के नाम पर कॉरिडोर बनाया गया है. इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनीं शिंजे आबे की पत्नी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि यदि शिंजो जीवित होते तो वह जरूर काशी आते

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PM मोदी-आबे की 15 साल की दोस्ती, पति शिंजो के नाम हुई सड़क तो पत्नी हुईं भावुकZoom

वाराणसी में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर का हुआ उद्घाटन.

वाराणसीः उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में भारत-जापान की दोस्ती और साझा सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने जा रही है. काशी स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में बुधवार को जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण किया गया. इस मौके पर सीएम योगी शामिल हुए. इस कार्यक्रम में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी, आकी आबे, काफी भावुक दिखीं. अकी ने कहा, “मेरे पति का सम्मान करने के लिए धन्यवाद.” अकी आबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यदि शिंजो जीवित होते तो वह जरूर काशी आते और यह सम्मान देखकर भावुक हो जाते. उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी ने भारत-जापान दोस्ती की एक मिसाल पेश की है.

यह दोस्ती केवल डिप्लोमैटिक नहीं थी
जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती केवल दो राजनेताओं की डिप्लोमैटिक रिश्ते तक सीमित नहीं थी. दोनों ही नेताओं के बीच एक खास अपनापन था, जिसकी झलक हम सभी को कई बार देखने को मिली है. अब यही रिश्ता एक बार फिर इमोशनल कर देने वाले पल के साथ हर किसी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. वाराणीस में शिंजो आबे की याद को सम्मान देने के लिए रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में शिंजे आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया. इस मौके पर मौजूद शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे भावुक हो गईं. पति के नाम से जुड़ी स्मृति को देख उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े.

शिंजो आबे के लिए कितना खास था भारत
प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए शिंजो आबे कुल 4 बार भारत आए थे. पहली बार वह साल 2006-2007 में आधिकारिक यात्रा पर भारत आए थे. फिर 2014 के जनवरी महीने में शिंजो आबे गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर भारत आए थे. साल 2015 के दिसंबर महीने में शिंजो आबे भारत आए थे और वाराणसी में गंगा आरती में हिस्सा लिया था. इसके बाद आखिरी बार साल 2017 में सिंतबर के महीने में भारत आए थे. इस दौरान शिंजो आबे ने पीएम मोदी के साथ साबरमती आश्रम का दौरा किया था. तभी उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी.

जापान दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर (फोटो-पीआईबी)

शिंजे आबे के निजी बंगले पर जाने वाले पहले नेता पीएम मोदी
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के सीएम थे तब उन्होंने साल 2007 और 2012 में जापान का दौरा किया था. फिर पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में अगस्त-सितंबर के महीने में पहली आधिकारिक यात्रा की थी. इस दौरान वह क्योटो और टोक्यो गए थे. इसके अलावा साल 2016 के नवंबर महीने में वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए गए थे. फिर अक्तूबर 2018 में यामानाशी और टोक्यो की य़ात्रा की थी. इसके अलावा जून 2019 में ओसाका में जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जापान की यात्रा की थी. बता दें कि शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने हॉलिडे होम में इनवाइट किया था. आबे के निजी बंगले पर जाने वाले पहले विदेशी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे. शिंजो आबे को मोदी सरकार पद्म विभूषण से भी सम्मानित कर चुकी है.

मोदी-आबे की दोस्ती पद की नहीं थी- सीएम योगी आदित्यनाथ
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया. सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी और आबे की दोस्ती पद की नहीं, बल्कि विश्वास और संस्कृति की दोस्ती थी. रुद्राक्ष-कन्वेंशन सेंटर भारत-जापान मैत्री का प्रतीक है और यहां बना आबे कॉरिडोर दोनों देशों की मित्रता को हमेशा याद दिलाएगा. सीएम योगी ने यह भी बताया कि भारत में जापान की 1400 कंपनियां काम कर रही हैं और उत्तर प्रदेश में जापान ने 90000 करोड़ का निवेश किया है. जापान की धार्मिकता का रास्ता यूपी से निकलता है.

काशी-क्योटो के बीच सांस्कृतिक संबंध
काशी और जापान के क्योटो शहर के बीच सांस्कृतिक संबंध भारत-जापान मैत्री की एक खास मिसाल हैं. दोनों प्राचीन शहर अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए दुनिया भर में पहचाने जाते हैं.



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