छपरा की महिलाएं जीविका से जुड़कर बनीं आत्मनिर्भर, बोलीं- सरकार इसे बंद न करे
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Chhapra Jeevika Yojana: छपरा की महिलाओं को सरकार लगातार अलग-अलग योजनाओं से जोड़कर अधिक से अधिक रोजगार देने का प्रयास जारी है. इसी क्रम में छपरा सदर प्रखंड के सदर ब्लॉक प्रांगण में ही एक सबसे बड़ा सिलाई केंद्र खोला गया है, जिसमें 50 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है. यहां पर ऐसी महिलाओं को रोजगार मिला है. जो पहले बहुक गरीब थीं और उनके पास कोई काम नहीं था. कुछ तो ऐसी हैं जिनके घर में कमाने वाला भी कोई नहीं था. ऐसी महिलाएं एक वक्त के राशन के लिए भी सोचती थीं कि दूसरे टाइम का भोजन कैसे होगा.
कुछ तो कर्ज में डूबी हुई थीं. हालांकि ये सभी अब सिलाई करके घर चलाने के साथ कर्ज भी चुका चुकी हैं. ऐसी महिलाओं को जीविका से जोड़कर प्रशिक्षण देने के बाद यहां पर सिलाई करने के लिए नौकरी दी गई है. इससे इनके जीवन में काफी बदलाव आया है और आर्थिक तंगी बहुत हद तक कम हुई है.
उषा देवी ने लोकल 18 से बताया कि ‘मैं पहले बेरोजगार थी. लेकिन जीविका से प्रशिक्षण मिलने के बाद मुझे इस केंद्र पर स्कूल ड्रेस, आंगनवाड़ी ड्रेस सिलाई करने के लिए नौकरी मिली है. यहां सिलाई करके महीने के 30 से 3500 कमाई कर लेती हूं.
इसी पैसे से बच्चों को दूसरे प्रदेश में रहकर पढ़ाई करवाती हूं. घर चलाने में भी मदद करती हूं. सरकार की इस योजना से सैकड़ों बेरोजगार महिलाओं को रोजगार मिला है. यह योजना महिलाओं के लिए काफी लाभदायक है.’
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गीता देवी ने बताया कि ‘पहले मैं घर में रहती थी. कोई काम नहीं कर रही थी. जीविका से जुड़ने के बाद प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण लेने के बाद मैं यहां पर सिलाई कर रही हूं. महीने के 32 से 3500 की कमाई कर लेती हूं.
बच्चों को इसी सिलाई के पैसे से पढ़ाई पर खर्च करती हूं, घर चलाने में भी इसी पैसे से मदद करती हूं. सरकार की यह योजना हम लोगों के लिए बहुत अच्छी है. इसको सरकार द्वारा बंद नहीं करना चाहिए. महिलाओं के लिए यह एक जीने का सहारा बन गया है.’