लखीमपुरः बेमौसम बारिश से गिर गई है धान की फसल, कर दें ये काम सुरक्षित होगी फसल, नहीं होगा नुकसान

लखीमपुरः बेमौसम बारिश से गिर गई है धान की फसल, कर दें ये काम सुरक्षित होगी फसल, नहीं होगा नुकसान


लखीमपुर खीरी: जिले में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ सीजन में जिले के किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं. इस समय कई खेतों में धान की फसल पकने की कगार पर है, जबकि कुछ खेतों में फसल कटाई के लिए तैयार हो रही है. ऐसे में अचानक हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई. कई जगहों पर खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने की आशंका भी बढ़ गई है.

किसानों का कहना है कि उन्होंने कई महीनों की मेहनत और लागत के बाद धान की फसल तैयार की थी. फसल को लेकर उन्हें अच्छी पैदावार और आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन अचानक मौसम बदलने से उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है.तेज हवा के साथ हुई बारिश के कारण कई खेतों में धान की बालियां जमीन पर बिछ गई हैं. इससे किसानों को फसल बचाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है.

कुछ ही घंटों में खेत में बिछ गई धान की फसल

किसान लल्लू राम ने बातचीत में बताया कि लगातार हो रही बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान हुआ है.उनके पास करीब एक एकड़ में धान की फसल लगी हुई है. किसान के मुताबिक धान की फसल नवंबर के आसपास तैयार होने वाली थी, लेकिन अचानक हुई तेज बारिश और हवाओं के कारण फसल खेत में ही गिर गई. लल्लू राम बताते हैं कि धान की फसल जब खेत में गिर जाती है तो उसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है. ऐसी स्थिति में फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है और कटाई में भी परेशानी होती है। किसान के मुताबिक फसल गिरने से करीब 30 से 40 प्रतिशत या उससे अधिक तक उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है.

गिरी हुई फसल को ऐसे करें सुरक्षित

उन्होंने बताया कि इस समय खेत में गिरी हुई फसल को बचाने के लिए किसान उसे बांधने का प्रयास कर रहे हैं. फसल को दोबारा खड़ा करना आसान नहीं है, लेकिन यदि इसे समय रहते संभाल लिया जाए तो कुछ नुकसान को कम किया जा सकता है. इसके लिए किसानों को खेत में उतरकर गिरी हुई धान की फसल को एक साथ बांधना पड़ रहा है.
किसान लल्लू राम के मुताबिक धान की फसल गिरने से एक बीघे में करीब दो से तीन कुंतल तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में यदि बड़े क्षेत्र में फसल गिरती है तो किसान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

सात बीघा धान की फसल पर संकट

वहीं किसान राम सिंह पाल ने बताया कि उन्होंने 20 जुलाई के बाद धान की रोपाई की थी. इस बार उन्होंने करीब सात बीघा जमीन में धान की फसल लगाई थी. किसान के मुताबिक इस बार फसल अच्छी दिखाई दे रही थी और उन्हें बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी. राम सिंह पाल बताते हैं कि इस बार शुरुआत में बारिश अपेक्षाकृत कम हुई थी, लेकिन इसके बावजूद धान की फसल अच्छी तरह तैयार हो रही थी. अचानक हुई लगातार बारिश और तेज हवाओं ने पूरी स्थिति बदल दी. तेज हवा के कारण धान के पौधे खेत में गिर गए हैं.

किसान के मुताबिक लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी जमा है. यदि खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहता है तो धान की गिरी हुई फसल सड़ने लगती है. इससे दाने की गुणवत्ता खराब होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. खेत में पानी और गिरी फसल के कारण कटाई के समय भी किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

गिरी फसल को संभालना किसानों के लिए बड़ी चुनौती

धान की फसल के पकने के समय बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन जाती है.सामान्य तौर पर जब धान की फसल खेत में खड़ी होती है तो किसान कटाई की तैयारी शुरू कर देते हैं. लेकिन बारिश और तेज हवाओं के कारण पौधों के गिर जाने पर कटाई मुश्किल हो जाती है. गिरी हुई फसल की बालियां जमीन के संपर्क में आने से नमी बढ़ जाती है। लगातार बारिश होने पर दाने में नमी बढ़ने के साथ-साथ फसल के खराब होने का खतरा भी रहता है. यदि खेत में पानी लंबे समय तक जमा रहता है तो जड़ों और तने के आसपास सड़न की समस्या पैद हो जाती है.

उत्पादन कम हुआ तो आमदनी पर पड़ेगा सीधा असर

धान की खेती में किसानों को बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और जुताई समेत कई तरह की लागत लगानी पड़ती है. फसल तैयार होने के बाद किसान को उम्मीद होती है कि अच्छी पैदावार से उसकी लागत निकलने के साथ कुछ मुनाफा भी मिलेगा. लेकिन यदि फसल पकने से पहले ही गिर जाती है और बारिश के कारण दाने खराब होने लगते हैं तो उत्पादन कम हो सकता है। इसका सीधा असर किसान की आमदनी पर पड़ेगा. खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह नुकसान ज्यादा चिंता का विषय है.



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