नई दिल्ली: बांग्लादेश को पाकिस्तान के साथ तब तक राजनयिक और दूसरे सभी तरह के संबंध खत्म कर देने चाहिए, जब तक इस्लामाबाद में लोकतंत्र बहाल नहीं हो जाता. बांग्लादेश के वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट मोहसेन राशिद ने यह बात कही है. उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने से बांग्लादेश के लिए गंभीर रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं.
पुलिस का भरोसा बहाल करना जरूरी
2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद जारी भीड़ हिंसा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस का भरोसा कमजोर हुआ है, क्योंकि अशांति के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले हुए और उनकी हत्या की गई. उनके मुताबिक, इन घटनाओं की पर्याप्त जांच नहीं होने से पुलिस का मनोबल और कमजोर हुआ है.
राशिद ने कहा कि राज्य को कानून लागू करने वाली संस्थाओं का अधिकार और सम्मान बहाल करना चाहिए. साथ ही वास्तविक गलतियों और दुर्व्यवहार के मामलों में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. उन्होंने पुलिस की वर्दी और संस्थागत ढांचे में बार-बार किए गए बदलावों की भी आलोचना की. उनका कहना था कि केवल ऐसे बदलावों से सुरक्षा संस्थाओं के मूल चरित्र या पेशेवर क्षमता में सुधार नहीं होता.
सैन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल
राशिद ने उन सशस्त्र बलों के सदस्यों के साथ हो रहे व्यवहार की भी कड़ी आलोचना की, जिनके खिलाफ 2024 की अशांति के दौरान उनके आचरण को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि सैन्यकर्मी एक सख्त कमांड सिस्टम के तहत काम करते हैं. उनके अनुसार, सैनिकों से एक तरफ कानूनी आदेशों का पालन करने की उम्मीद नहीं की जा सकती और दूसरी तरफ अपने निर्धारित कर्तव्यों को निभाने के लिए बाद में उन्हें सामान्य अपराधियों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों की मूल जिम्मेदारी देश, उसकी संप्रभुता, नागरिकों और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना है. इसकेbangla साथ पेशेवर मानकों और अनुशासन को बनाए रखना भी जरूरी है.
मानवाधिकारों से जुड़े आरोपों की जांच पर भी सवाल
राशिद ने 2024 की हिंसा से जुड़े मानवाधिकार आरोपों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाया. उन्होंने मारे गए लोगों की संख्या से जुड़े दावों की आलोचना की और कहा कि जिन आरोपों पर विवाद है, उनकी विश्वसनीय और स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत जांच होनी चाहिए.
शेख हसीना की सुरक्षा को लेकर चेतावनी
बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य पर बात करते हुए राशिद ने शेख हसीना को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि उनकी हत्या की कोशिश या सफल हत्या के परिणाम केवल पूर्व प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं रहेंगे और इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं.
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि अगर शेख हसीना बांग्लादेश लौटती हैं तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. साथ ही उन्होंने उनकी संभावित वापसी से जुड़े कानूनी और सुरक्षा इंतजामों पर राजनीतिक बातचीत की मांग की.
राशिद ने कहा कि सरकार को शेख हसीना और भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर यह तय करना चाहिए कि उनकी सुरक्षित वापसी कैसे सुनिश्चित की जा सकती है और बांग्लादेश लौटने के बाद उनके खिलाफ लागू होने वाली कानूनी प्रक्रिया क्या होगी.
उन्होंने शेख हसीना को भगोड़ा बताए जाने की कानूनी व्याख्या पर भी सवाल उठाया. उनका तर्क था कि राजनीतिक संकट के दौरान सुरक्षा प्रतिष्ठान उन्हें देश से बाहर ले गया था और इसके बाद वह भारत में रहीं.
बढ़ती हिंसा और अस्थिरता पर चेतावनी
राशिद ने यह भी चेतावनी दी कि बांग्लादेश लगातार हिंसक और अस्थिर होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को समझना चाहिए कि लगातार टकराव आखिरकार देश को ही नुकसान पहुंचा सकता है.
पाकिस्तान के साथ संबंधों पर सख्त रुख
इंटरव्यू में सबसे कड़ा विदेशी नीति से जुड़ा संदेश पाकिस्तान को लेकर था. राशिद ने कहा कि बांग्लादेश को पाकिस्तान के साथ तब तक कोई राजनयिक या अन्य महत्वपूर्ण संबंध नहीं रखना चाहिए, जब तक इस्लामाबाद में वास्तव में चुनी हुई नागरिक सरकार स्थापित नहीं हो जाती.
उनकी यह टिप्पणी बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हाल ही में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सहयोग को लेकर हुए समझौते के संदर्भ में आई. राशिद ने इस समझौते के रणनीतिक आधार पर सवाल उठाया. उनका कहना था कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया तंत्र देश की राजनीतिक और सुरक्षा संस्थाओं पर जरूरत से ज्यादा प्रभाव रखते हैं.
उन्होंने आम पाकिस्तानी नागरिकों और पाकिस्तान की सैन्य प्रभाव वाली राजनीतिक व्यवस्था के बीच अंतर किया. उन्होंने कहा कि आम पाकिस्तानी लोग मित्रवत और मेहमाननवाज हैं, लेकिन पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना का प्रभाव है.
राशिद के अनुसार, बांग्लादेश को पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर ज्यादा रणनीतिक नजरिया अपनाना चाहिए और ऐसे देश के साथ सुरक्षा सहयोग नहीं बढ़ाना चाहिए, जहां उनके आकलन के अनुसार सेना अब भी राजनीतिक फैसलों पर निर्णायक प्रभाव रखती है.
उन्होंने खास तौर पर चिंता जताई कि नशीले पदार्थों की रोकथाम से जुड़े सहयोग के जरिए पाकिस्तान के सुरक्षा कर्मियों या कानून लागू करने वाली एजेंसियों को बांग्लादेश में मौजूदगी या काम करने का रास्ता मिल सकता है. राशिद ने यह भी सवाल किया कि क्या बांग्लादेश में आने वाले नशीले पदार्थों का कोई बड़ा स्रोत पाकिस्तान है. उन्होंने इसके बजाय क्षेत्र में तस्करी के दूसरे रास्तों और घरेलू स्तर पर नशीले पदार्थों के उत्पादन की ओर इशारा किया.
इसी आधार पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ ऐसे सहयोग को बढ़ाने का बांग्लादेश के पास बहुत कम रणनीतिक आधार है. राशिद की स्थिति साफ थी कि “जब तक पाकिस्तान में लोकतंत्र बहाल नहीं होता”, तब तक बांग्लादेश को इस्लामाबाद के साथ संबंधों को सामान्य या व्यापक करने से बचना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को केवल द्विपक्षीय संबंधों के नजरिए से नहीं, बल्कि पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था के बड़े सवाल के तौर पर देखा जाना चाहिए.
दिसंबर से पहले की चिंताएं
दिसंबर नजदीक आने और समर्थकों के बीच शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी की उम्मीद के बीच राशिद ने आने वाले समय को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बताया. उन्होंने कहा कि अगर शेख हसीना वापस आती हैं तो प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार को उनकी शांतिपूर्ण और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए पहले से कदम उठाने चाहिए.
राशिद ने अधिकारियों से सुरक्षा स्थिति का सावधानीपूर्वक आकलन करने और पहले से यह तय करने की भी अपील की कि शेख हसीना को सुरक्षा कैसे दी जाएगी और उनके खिलाफ चलने वाली किसी भी कानूनी कार्रवाई को किस तरह संभाला जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि जमात-ए-इस्लामी समेत सभी राजनीतिक दलों को किसी भी ऐसे कदम से पहले सावधानी से विचार करना होगा, जिससे देश में और अस्थिरता पैदा हो सकती है.
राशिद की मुख्य चेतावनी थी कि बांग्लादेश के राजनीतिक मतभेदों को ऐसे संघर्ष में नहीं बदलने देना चाहिए, जिससे देश की संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता को खतरा हो. उन्होंने राष्ट्रीय जिम्मेदारी और राजनीतिक संयम की अपील की. उनका कहना था कि राजनीतिक नेताओं के पास सरकार चलाने, विपक्ष में रहने या बड़े पदों पर रहने के मौके तभी बने रहेंगे, जब बांग्लादेश खुद स्थिर और सुरक्षित बना रहेगा.
इंटरव्यू में उन्होंने व्यापक तौर पर यह तर्क रखा कि बांग्लादेश की तत्काल चुनौती केवल राजनीतिक दलों के बीच की लड़ाई नहीं है. असली चुनौती काम करने वाली राज्य संस्थाओं को मजबूत करना, पेशेवर सुरक्षा बलों में भरोसा बहाल करना, राजनीतिक स्थिरता लाना और एक स्पष्ट विदेश नीति तैयार करना है.
पाकिस्तान को लेकर राशिद का रुख साफ है—इस्लामाबाद में वास्तविक लोकतांत्रिक नागरिक शासन बहाल होने तक बांग्लादेश को पाकिस्तान के साथ संबंधों को गहरा नहीं करना चाहिए. वहीं, शेख हसीना की संभावित वापसी को लेकर उन्होंने सभी पक्षों से उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देने और राजनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की, ताकि यह मुद्दा हिंसा का एक और कारण न बने.