नई दिल्ली. पाकिस्तान की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाइए कि हर कुछ महीने बाद उसकी नजर IMF की तरफ होती है और उम्मीद होती है कि वहां से कुछ अरब डॉलर मिल जाएं तो खजाने की सांस चलती रहे. अब एक बार फिर IMF ने पाकिस्तान के लिए करीब 1.21 अरब डॉलर की फंडिंग का रास्ता खोल दिया है. हालांकि पैसा खाते में अभी नहीं आया है, इसके लिए आईएमएफ के एक्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी जरूरी है.लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को जो करना होगा, उसे देखकर आप भी कहेंगे कि शहबाज शरीफ ने तो देश ही गिरवी रख दिया.
IMF के आंकड़ों के मुताबिक जून 2025 तक पाकिस्तान का कुल सरकारी और सरकार की गारंटी वाला कर्ज करीब 307.5 अरब डॉलर था. यह उसकी GDP का करीब 76.6 फीसदी है. यानी जिस देश को अपनी कमाई से सड़क, बिजली, अस्पताल और रोजगार पर पैसा लगाना चाहिए, उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा पहले से लिए गए कर्ज और उसके भुगतान में फंस रहा है. आईएमएफ के आंकड़ों में 2025-26 के लिए पाकिस्तान का कुल कर्ज चुकाने का अनुमान करीब 92.1 अरब डॉलर है. अब सोचिए, 1.21 अरब डॉलर का नया कर्ज कितना बड़ा सहारा है और कितना बड़ा बोझ होगा.
IMF से पैसा आता है, साथ में शर्तों की पोटली भी
IMF मुफ्त में पैसा नहीं देता. पाकिस्तान को इसके बदले टैक्स बढ़ाने, सरकारी खर्च को काबू में रखने, बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करने और अर्थव्यवस्था में कई बदलाव करने पड़ते हैं. इस बार भी IMF के साथ समीक्षा पूरी होने के बाद फंडिंग का रास्ता खुला है. यानी पाकिस्तान को पैसा चाहिए तो IMF की शर्तों पर चलना होगा. यही वजह है कि IMF से मिलने वाला हर नया डॉलर राहत के साथ एक नई जिम्मेदारी भी लेकर आता है.
आज 1.21 अरब डॉलर की खुशी, कल किस्त चुकाने की चिंता
पाकिस्तान की मुश्किल सिर्फ यह नहीं है कि उसे कर्ज लेना पड़ रहा है. असली समस्या यह है कि पुराने कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाने के लिए भी भारी रकम चाहिए. IMF के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में पाकिस्तान का कुल कर्ज भुगतान करीब 86.3 अरब डॉलर रहा, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 92.1 अरब डॉलर रहने का अनुमान है. यानी एक तरफ नया पैसा लेने की खबर आती है और दूसरी तरफ पुराने कर्ज की किस्तों का पहाड़ खड़ा है. इसे ऐसे समझिए कि घर में खर्च चलाने के लिए नया उधार लिया और उसी उधार का कुछ हिस्सा पुराने उधार की किस्त चुकाने में चला गया.
चीन, IMF और… पाकिस्तान किस-किस के भरोसे?
पाकिस्तान का कर्ज सिर्फ IMF का नहीं है. IMF के आंकड़ों के मुताबिक जून 2025 में उसके कुल सरकारी और सरकार की गारंटी वाले कर्ज में बाहरी कर्ज करीब 107 अरब डॉलर था. इसमें चीन का हिस्सा भी बड़ा है. करीब 23.5 अरब डॉलर चीन से जुड़े द्विपक्षीय कर्ज के रूप में था, जबकि चीनी वाणिज्यिक बैंकों का कर्ज करीब 5.7 अरब डॉलर था. यानी पाकिस्तान के सामने एक नहीं, कई कर्जदाताओं को पैसा लौटाने की जिम्मेदारी है. IMF से मिलने वाला 1.21 अरब डॉलर इस बड़े कर्ज पहाड़ के सामने छोटा दिखता है, लेकिन पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार और तत्काल भुगतान क्षमता के लिए यह रकम महत्वपूर्ण है.