दिल्ली. बाजार में सेल और डिस्काउंट देखकर खरीदारी करना आजकल बहुत आम हो गया है. कपड़ों से लेकर जूते, कॉस्मेटिक्स और घर के सामान तक, हर जगह 50, 60 या 70 फीसदी तक छूट के बोर्ड दिखाई देते हैं. ऐसे में कई बार हम उस चीज को भी खरीद लेते हैं जिसकी हमें असल में जरूरत नहीं होती. देखने में यह खरीदारी सस्ती लगती है, लेकिन महीने का बजट बिगाड़ने में इन छोटी-छोटी खरीदारी का बड़ा हाथ होता है. अर्थशास्त्री आकाश जिंदल ने बताया कि आखिर सेल और डिस्काउंट के लालच में होने वाली फिजूलखर्ची से कैसे बचा जा सकता है.
जरूरत देखें
आकाश जिंदल के मुताबिक खरीदारी हमेशा अपनी जरूरत देखकर करनी चाहिए, न कि सिर्फ इसलिए कि किसी सामान पर भारी छूट मिल रही है. मान लीजिए आपके पास पहले से ही 15 ऐसे कपड़े हैं जिन्हें आप ऑफिस, पार्टी या किसी दूसरे काम के लिए पहन सकते हैं. इसके बाद रास्ते में किसी दुकान पर 35 फीसदी की सेल दिखी और आपने दो और कपड़े खरीद लिए. ऐसे में आपको खुद से पूछना चाहिए कि क्या इन कपड़ों की सच में जरूरत थी. अगर जवाब नहीं है तो सिर्फ छूट देखकर सामान खरीदना सही फैसला नहीं है. डिस्काउंट तभी फायदेमंद है जब आप वैसे भी उस चीज को खरीदने वाले थे.
छूट का खेल समझें
अक्सर 50 से 70 फीसदी डिस्काउंट देखकर हमें लगता है कि हमने बहुत पैसे बचा लिए. लेकिन आकाश जिंदल कहते हैं कि सिर्फ डिस्काउंट देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए. पहले यह देखना जरूरी है कि सामान की असली कीमत क्या है और क्या आपको उसकी जरूरत भी है. मान लीजिए किसी ड्रेस की कीमत 10 हजार रुपये बताकर उस पर 60 फीसदी छूट दी जा रही है. ऐसे में सिर्फ यह देखकर खुश होने की जरूरत नहीं कि 60 फीसदी बचत हो रही है. असली सवाल यह है कि क्या आप उस ड्रेस को बिना छूट के भी खरीदते? अगर नहीं, तो केवल छूट के कारण उसे खरीदना बचत नहीं, बल्कि अतिरिक्त खर्च है.
लालच से बचें
सेल और डिस्काउंट का सबसे बड़ा असर हमारी सोच पर पड़ता है. बड़े-बड़े डिस्काउंट देखकर हमें लगता है कि अगर अभी नहीं खरीदा तो मौका चला जाएगा. इसी सोच में हम कई बार बिना सोचे सामान खरीद लेते हैं. आकाश जिंदल का कहना है कि खरीदारी का फैसला किसी विज्ञापन या लालच के आधार पर नहीं होना चाहिए. सामान खरीदने से पहले थोड़ा रुकें और सोचें कि इसकी जरूरत कितनी है. अगर जरूरत नहीं है तो उसे छोड़ देना ही बेहतर है.
खर्च की सीमा रखें
आम जिंदगी में कभी-कभी अचानक खरीदारी हो ही जाती है. खासकर जब हम कहीं घूमने जाते हैं. किसी जगह की याद के तौर पर कोई छोटी चीज खरीदना या अपने लिए कुछ लेना गलत नहीं है. लेकिन इसके लिए भी एक सीमा तय होनी चाहिए. आकाश जिंदल ने कहा कि आप घूमने निकले हैं तो ऐसे छोटे-मोटे अचानक होने वाले खर्च को पूरी आउटिंग के खर्च का करीब 2 से 3 फीसदी तक रखा जा सकता है. इससे घूमने का मजा भी बना रहेगा और बजट भी ज्यादा नहीं बिगड़ेगा.
छोटी खरीदारी जोड़ें
कई लोगों को लगता है कि 200-300 रुपये की खरीदारी से क्या फर्क पड़ेगा. लेकिन महीने में कई बार की गई ऐसी छोटी खरीदारी आखिर में बड़ा खर्च बन जाती है. कभी सेल में कपड़े, कभी ऑनलाइन ऑफर में सामान और कभी बिना जरूरत कोई छोटी चीज खरीदना, ये सभी खर्च धीरे-धीरे आपकी बचत को कम कर देते हैं. आकाश जिंदल के मुताबिक आज के समय में सिर्फ कम कमाई ही समस्या नहीं है. कई बार अच्छी कमाई होने के बाद भी लोग जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं. इसलिए कमाई चाहे जितनी हो, खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी है.
पहले बचत करें
फिजूलखर्ची से बचने का सीधा तरीका यही है कि हर खरीदारी से पहले जरूरत और बजट देखें. खुद से पूछें कि अगर इस सामान पर कोई डिस्काउंट नहीं होता तो क्या मैं इसे खरीदता? अगर जवाब नहीं है, तो उस सामान को छोड़ देना बेहतर है. क्योंकि हर डिस्काउंट बचत नहीं होता. जिस चीज की जरूरत नहीं है, उस पर 70 फीसदी छूट मिलने के बाद भी पैसा खर्च करना बचत नहीं, खर्च ही है. इसलिए सेल देखकर तुरंत खरीदारी करने के बजाय अपनी जरूरत, बजट और बचत को पहले महत्व दें.