कांग्रेस के गढ़ के दिग्गज सपाई ने दिया झटका, अखिलेश के 3 बागी अब भाजपा में, राकेश सिंह, अभय सिंह और…


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सपा के तीन बागी विधायक- अमेठी के गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या के गोसाईगंज से अभय सिंह और जालौन के कालपी से विनोद चतुर्वेदी 14 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहे हैं. राकेश प्रताप सिंह ने इसका ऐलान करते हुए अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘जो राम और राष्ट्र का नहीं, हम उसके साथ नहीं चल सकते.’ इस कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ स्मृति ईरानी के भी मौजूद रहने की संभावना है.

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अखिलेश के 3 बागी अब भाजपा में, राकेश सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदीZoom

सपा के तीन बागी 14 अक्टूबर को भाजपा में शामिल होंगे

UP Politics News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाले हैं. इसे देखते हुए सभी पार्टियां जोर-शोर जुटी हैं. वार-पलटवार के साथ बागी नेताओं का भी खेल जारी है. इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) को भी तगड़ा झटका लगा है. सपा के तीन बागी 14 अक्टूबर को विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होनी की घोषणा की है. इसमें कांग्रेस के गढ़ गौरीगंज के लगातार तीन बार के विधायक राकेश प्रताप सिंह अमेठी में एक जनसभा में भाजपा में शामिल होंगे. वहीं, उनके साथ सपा के दो और बागी अयोध्या के गोसाईगंज विधायक अभय सिंह और जालौन के कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी भी कमल का दामन थामेंगे.

14 अक्टूबर को अमेठी सपा के गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी विधानसभा से विधायक विनोद चतुर्वेदी कमल का दामन थामेंगे. राकेश प्रताप सिंह ने गुरुवार दोपहर 12 बजे अपने आवास पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में इस बात का औपचारिक ऐलान किया. भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने का यह भव्य कार्यक्रम विधायक राकेश सिंह के आवास ‘मंगलम’ के पास आयोजित किया जाएगा. इस बड़े सियासी कार्यक्रम में पूर्व सांसद स्मृति ईरानी तथा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे.

जो राम और देश के नहीं हम उसके साथ नहीं

कैसे शुरू हुई थी बगावत की ये पूरी कहानी?

इन विधायकों की बगावत की कहानी कोई रातों-रात नहीं लिखी गई है. दरअसल, साल 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने के बाद से ही राकेश प्रताप सिंह और अन्य बागी विधायक व्यावहारिक रूप से सपा से अलग हो चुके थे. हालांकि, पार्टी ने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन लगभग 16 महीने बाद जून 2025 में सपा ने राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय और अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया. पार्टी का तर्क था कि इन्हें वापसी का मौका दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. निष्कासन के बाद से ये तीनों विधानसभा में ‘अनअटैच्ड’ (असंबद्ध) सदस्य के रूप में माने जा रहे हैं, यानी उनकी विधायकी तो बरकरार है, लेकिन वे सपा के अधिकृत सदस्य नहीं हैं. अगस्त 2026 में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद ही राकेश प्रताप के भाजपा में जाने की पटकथा पूरी तरह से तय हो गई थी.

2021 के इस्तीफे से चर्चा में आए थे राकेश प्रताप

राकेश प्रताप सिंह अपने सख्त और आक्रामक राजनीतिक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. इससे पहले अक्टूबर 2021 में उन्होंने अपनी ही गौरीगंज क्षेत्र की दो जर्जर सड़कों के मुद्दे पर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उनका आरोप था कि सदन में सरकार के आश्वासन के बावजूद सड़क सुधार का काम नहीं हुआ. इसके विरोध में उन्होंने लखनऊ में अनशन भी किया था. बाद में इस्तीफा वापस लिया और 2022 में फिर से सपा के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की थी.



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