राजकोट. वैसे तो बच्चे स्कूल में पढ़ने जाते हैं लेकिन गुजरात का एक स्कूल छात्रों को हर घंटे 5 रुपये कमाने का मौका दे रहा है. इसके लिए उसे न तो कोई काम करना है और न कोई मेहनत उसे सिर्फ पढ़ना है. जी हां, आप सही सुन रह हैं और यह स्कूल ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि बच्चों के हाथ में मोबाइल की जगह किताबें आ सके. ऐसे में गुजरात के राजकोट के एक निजी स्कूल ने बच्चों को किताबों की तरफ वापस लाने के लिए एक अनोखा प्रयोग शुरू किया है.
न्यूज 18 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल ने बच्चों से कहा है कि किताब पढ़ो और पैसे कमाओ. इसके तहत छात्र जितने घंटे किताब पढ़ेंगे, उन्हें हर घंटे के हिसाब से 5 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. स्कूल का मकसद सिर्फ बच्चों को पैसे देना नहीं है, बल्कि उन्हें धीरे-धीरे किताब पढ़ने की आदत लगाना है.
1 घंटे पढ़ो तो ₹5, 2 घंटे पढ़ो तो ₹10
राजकोट के वर्धमाननगर स्थित आरबी स्कूल ने यह प्रयोग शुरू किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना कक्षा 3 से 10 तक के करीब 150 छात्रों के लिए लागू की गई है. अगर कोई बच्चा एक घंटे किताब पढ़ता है तो उसे ₹5 मिलेंगे. दो घंटे पढ़ने पर ₹10 और इसी हिसाब से पढ़ने का समय बढ़ने पर प्रोत्साहन राशि भी बढ़ेगी. स्कूल ने यह प्रयोग बच्चों के मोबाइल और टीवी जैसे स्क्रीन टाइम को कम करने और उन्हें किताबों की ओर लाने के मकसद से शुरू किया है.
अपनी पसंद की किताब पढ़ सकते हैं बच्चे
इस योजना की एक खास बात यह है कि बच्चों पर किसी खास किताब को पढ़ने का दबाव नहीं है. वे अपनी पसंद की किताब चुन सकते हैं और अपनी सुविधा के हिसाब से पढ़ सकते हैं. यानी स्कूल यह नहीं कहता कि आपको यही किताब पढ़नी है या इतने बजे ही पढ़ना है. बच्चा अपनी पसंद की किताब और अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकता है.
सिर्फ बोलने से नहीं मिलेंगे पैसे, स्कूल रख रहा पूरा हिसाब
अब सवाल है कि अगर बच्चा सिर्फ यह कह दे कि उसने दो घंटे किताब पढ़ी है तो क्या उसे ₹10 मिल जाएंगे? ऐसा नहीं है. स्कूल ने इसके लिए बाकायदा एक रिकॉर्ड सिस्टम बनाया है. छात्र को एक चार्ट में किताब का नाम, कितने घंटे पढ़ा और कितने पन्ने पढ़े, इसकी जानकारी दर्ज करनी होती है. इस रिकॉर्ड पर माता-पिता और क्लास टीचर के हस्ताक्षर भी लिए जाते हैं.
टीचर भी लेते हैं पढ़ी हुई किताब का टेस्ट
स्कूल ने यह सुनिश्चित करने का भी तरीका निकाला है कि बच्चा वास्तव में किताब पढ़ रहा है या सिर्फ रिकॉर्ड में घंटे बढ़ा रहा है. जब छात्र अपना रिकॉर्ड टीचर के पास जमा करता है तो उसे पढ़ी हुई किताब भी दिखानी होती है. इस पर टीचर बच्चों से किताब से संबंधित सवाल-जवाब करसकते हैं. अगर बच्चा पढ़े हुए कंटेंट से जुड़े सवालों के जवाब दे देता है, तभी टीचर रिकॉर्ड पर साइन करते हैं. इसके बाद महीने के अंत में छात्र को उसके पढ़ने के घंटों के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाती है.
बच्चों को भी आने लगा किताब पढ़ने में मजा
इस पहल में शामिल कुछ छात्रों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि किताब पढ़ना बोरिंग है लेकिन जब पढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलने लगा तो उन्होंने किताबें उठानी शुरू कीं. धीरे-धीरे उन्हें किताबों में दिलचस्पी आने लगी. कुछ छात्रों का कहना है कि अब उन्हें यह समझ आने लगा है कि मोबाइल पर समय बिताने के बजाय किताब पढ़ना भी मजेदार हो सकता है.
स्कूल को उम्मीद- आगे बिना पैसे के भी पढ़ेंगे बच्चे
स्कूल प्रशासन का मानना है कि पैसे सिर्फ शुरुआत का एक प्रोत्साहन हैं. असली मकसद बच्चों में ऐसी आदत विकसित करना है कि आगे चलकर वे बिना किसी इनाम के भी किताब पढ़ना पसंद करें. स्कूल का मानना है कि अगर बच्चों को शुरुआत में किताब पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए तो धीरे-धीरे पढ़ना उनकी आदत बन सकता है. प्रशासन के मुताबिक, पढ़ने की अच्छी आदत का असर छात्रों के प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है.
150 बच्चे रोज 2 घंटे पढ़ें तो कितना खर्च होगा?
न्यूज 18 गुजराती की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर स्कूल के सभी 150 छात्र रोजाना 2 घंटे पढ़ते हैं तो एक महीने में प्रोत्साहन राशि करीब ₹45 हजार तक पहुंच सकती है. वहीं, अगर सभी छात्र रोज 3 घंटे पढ़ें तो यह रकम करीब ₹67 हजार तक हो सकती है. यानी स्कूल के लिए यह सिर्फ बच्चों को पैसे देने की योजना नहीं, बल्कि मोबाइल से किताब तक बच्चों की आदत बदलने का एक प्रयोग है.
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