सर्वपितृ अमावस्या पर बना शनिश्चरी योग! शाम को इन 5 जगह जरूर जलाएं दीपक
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Shanishchari Amavasya 2026: सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर इस बार विशेष शनिश्चरी योग का निर्माण हुआ है. पितरों की विदाई के इस पावन दिन शाम के समय किन 5 प्रमुख स्थानों पर दीपक जलाने से शनिदेव और पितर दोनों की कृपा प्राप्त होती है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, सात्विकता और पितरों का स्मरण ही इस दिन की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. जानिए इससे जुड़ी खास धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारियां जो आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आएंगी.
Shanishchari Amavasya 2026: 10 अक्टूबर को आश्विन मास की अमावस्या तिथि है और इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है. सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि करके पितरों की विदाई की जाती है. इस बार सर्वपितृ अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है, जिससे इस तिथि को शनिश्चरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाएगा. इस तरह सर्वपितृ अमावस्या के दिन शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों के साथ शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व होता है. इस शुभ दिन पर पितरों की विदाई के समय शाम को कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे पितरों को शांति मिलती है और शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है. आइए जानते हैं वे 5 स्थान कौन से हैं…
पीपल के पेड़ के नीचे – पीपल के पेड़ को पितरों और देवताओं से जुड़ा माना गया है. सर्वपितृ अमावस्या की शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करें. मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है.
दक्षिण दिशा में – हिंदू धर्म में दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है और इस दिशा से पितर विदा भी होते हैं. ऐसे में शाम के समय घर के बाहर या सुरक्षित स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर पितरों से सुख-शांति की प्रार्थना कर सकते हैं.
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शनि मंदिर में – सर्वपितृ अमावस्या पर शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है, ऐसे में इस शुभ दिन पर शनि मंदिर में दीपक जलाने का विशेष महत्व माना जाता है. सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर शनिदेव से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें.
घर के मुख्य द्वार पर – सर्वपितृ अमावस्या को पितरों की विदाई के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है. साथ ही विदाई के समय पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है.
तुलसी के पास – सर्वपितृ अमावस्या के दिन शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और पितरों का स्मरण करें. इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहने की मान्यता है. साथ ही पितृदोष समेत कई दोषों से मुक्ति मिलती है और कई परेशानियों से राहत भी मिलती है.