नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा 7 अक्टूबर को जब मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में हुए फैसलों का खुलासा करेंगे तो सभी की नजर उन पर ही रहेगी. इस बार बहुत दावे के साथ यह कयास लगाया जा रहा है कि आरबीआई करीब साढ़े 3 साल बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है. इससे पहले फरवरी, 2023 में रेपो रेट बढ़ाया गया था. रेपो रेट वह दर है, जो आपके होम और ऑटो सहित हर तरह के खुदरा लोन की ब्याज दरें तय करता है. आरबीआई का फैसला आने से पहले ही रियल एस्टेट सेक्टर में चिंता का माहौल दिख रहा है.
दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक से पहले रेपो रेट को लेकर बाजार में चर्चा तेज है. अगर रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर होम लोन की ब्याज दरों और आगे चलकर घर खरीदारों की ईएमआई पर पड़ सकता है. रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी से कुछ खरीदारों के फैसले प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन मजबूत मांग वाले बाजारों में इसका असर सीमित रहने की संभावना है.
त्योहारों से पहले लग सकता है झटका
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के मुताबिक, त्योहारी मौसम में घर खरीदने का फैसला करने वालों के लिए ब्याज दरों में स्थिरता काफी महत्वपूर्ण होती है. खासकर पहली बार घर खरीदने वाले और बजट को लेकर संवेदनशील खरीदार ईएमआई में छोटी बढ़ोतरी को भी ध्यान में रखते हैं. लिहाजा रेपो रेट में 0.25 फीसदी वृद्धि होने पर कुछ खरीदार अपने फैसले को टाल सकते हैं. काउंटी ग्रुप के निदेशक अमित मोदी के अनुसार, त्योहारी मौसम में ब्याज दरों का स्थिर रहना घर खरीदने वालों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण है. अगर रेपो रेट में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी होती है, तो इससे होम लोन की ईएमआई बढ़ सकती है.
ईएमआई से घर खरीदारों पर क्या असर
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का कहना है कि रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर होम लोन की लागत पर पड़ता है. इससे खरीदार की ईएमआई बढ़ सकती है और कुछ लोग घर खरीदने का फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते हैं.
मिगसन ग्रुप के निदेशक यश मिगलानी के मुताबिक, ब्याज दर रियल एस्टेट की मांग को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक जरूर है, लेकिन यह अकेला आधार नहीं है. मौजूदा समय में खरीदार अच्छी लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं और भरोसेमंद डेवलपर को भी लोग प्राथमिकता दे रहे हैं. रेपो रेट में सीमित बढ़ोतरी से बाजार की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन इससे मांग में बड़ी गिरावट आए ऐसा जरूरी नहीं है.
डेवलपर्स को कीमत देना होगा ध्यान
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का के अनुसार, ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में डेवलपर्स के लिए कीमतों को संतुलित रखना जरूरी होगा. साथ ही आसान भुगतान योजनाएं और खरीदारों के लिए सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराकर बढ़ी हुई ईएमआई के असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है. मजबूत वित्तीय स्थिति वाले डेवलपर्स के लिए ऐसी स्थिति को संभालना आसान होगा. MUREC के एमडी अमोघ बंसल ने कहा कि आवासीय रियल एस्टेट की गति बनाए रखने के लिए संतुलित नीतिगत व्यवस्था जरूरी है. खरीदार अब बेहतर प्लानिंग, बड़े और बेहतर डिजाइन वाले घर, गुणवत्ता और जीवनशैली से जुड़ी सुविधाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं.
गुरुग्राम की तरह क्वालिटी प्रोजेक्ट की डिमांड
MRG Group के मैनेजिंग डायरेक्टर रजत गोयल का कहना है कि महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के बीच संतुलन जरूरी है. रियल एस्टेट के लिए कर्ज की लागत में स्थिरता और स्पष्टता महत्वपूर्ण है, क्योंकि घर खरीदना लंबे समय का वित्तीय फैसला होता है. गुरुग्राम जैसे बाजारों में खरीदार अब बेहतर प्लानिंग, जगह के सही इस्तेमाल, डिजाइन और जीवन की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में ब्याज दरों का स्थिर और अनुमान के मुताबिक रहना खरीदारों को अधिक भरोसे के साथ फैसला लेने में मदद कर सकता है.