RBI MPC Meeting : एक तरफ तो महंगाई का दबाव, ऊपर से आरबीआई ने कर्ज भी महंगा कर दिया, समझ में आ रहा इसका फंडा

RBI MPC Meeting : एक तरफ तो महंगाई का दबाव, ऊपर से आरबीआई ने कर्ज भी महंगा कर दिया, समझ में आ रहा इसका फंडा


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RBI MPC Meeting : आरबीआई की एमपीसी बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जैसे ही रेपो रेट बढ़ाया तो मकान खरीदने वालों का दिल हक्क से हो गया. उन्हें एक ही चिंता सताने लगी कि अब ईएमआई बढ़ने वाली है. गवर्नर ने कहा कि महंगाई बेकाबू होती देख रेपो रेट बढ़ाना पड़ रहा है. अब सवाल ये है कि महंगाई की मार पहले से ही पड़ रही थी, ऊपर से कर्ज भी महंगा कर दिया गया. आखिर यह कैसा फैसला है जो महंगाई का मुकाबला महंगाई से हो रहा है.

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कर्ज महंगा होने से महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है.

नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर, 2026 को जैसे ही रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया तो मकान खरीदने का सपना देखने वाले और होम लोन लेकर ईएमआई चुकाने वालों का कलेजा बैठ गया. रेपो रेट बढ़ाने का सीधा मतलब है कि अब बैंक भी अपनी लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने वाले हैं. ज्यादातर कर्ज को बाहरी बेंचमार्क जैसे रेपो रेट जोड़ा गया है जिसका मतलब है कि होम लोन की ब्याज दरों 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. यहां तक तो बात समझ में आती है, लेकिन जैसा कि गवर्नर ने कहा कि महंगाई के दबाव में रेपो रेट बढ़ाना पड़ा है तो यह फैक्टर आम आदमी को जरा कम समझ में आता है. एक तरफ तो महंगाई बढ़ रही है, ऊपर से कर्ज भी महंगा कर दिया. अब आप भी सोच रहे होंगे कि महंगाई को दूसरी महंगी चीज से कैसे हराया जा सकता है. चलिए, आज हम आपकी इसी कंफ्यूजन को दूर करते हैं.

महंगाई और कर्ज की ब्याज दरों के बीच हमेशा से ही सीधा रिश्ता रहा है. इसका मतलब है कि जब महंगाई बढ़ती है तो कर्ज भी महंगा हो जाता है और जब महंगाई कम होती है तो कर्ज भी सस्ता हो जाता है. यही वजह है कि आरबीआई भी रेपो रेट तय करने के लिए खुदरा महंगाई पर ही निगाह रखता है. खुदरा महंगाई जैसे ही बढ़ती है तो आरबीआई रेपो रेट को भी बढ़ाना शुरू कर देता है और जब महंगाई उसके काबू में रहती है तो वह कर्ज भी सस्ता कर देता है. इसी फॉर्मूले पर चलते हुए आरबीआई ने इस बार भी खुदरा महंगाई बढ़ते ही रेपो रेट को बढ़ा दिया है.

सस्ता कर्ज बढ़ाता है महंगाई
इसका जवाब बाजार की डिमांड और सप्लाई से जुड़ा है. यह सामान्य सी बात तो सभी को पता है कि बाजार में डिमांड बढ़ने पर सप्लाई पर असर पड़ता है और चीजें महंगी होने लगती हैं. ऐसा ही कुछ कर्ज के साथ भी होता है. जब कर्ज सस्ता होता है तो लोग ज्यादा से ज्यादा कर्ज लेते हैं और उनके हाथ में पैसा आता है तो बाजार में उसे खर्च करते हैं. इससे बाजार में डिमांड बढ़ जाती है. डिमांड बढ़ी तो चीजों की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं और आखिरकार महंगाई में उछाल आ जाता है. यही वजह है कि आरबीआई महंगाई बढ़ने पर कर्ज पर लगाम कसनी पड़ती है, ताकि बाजार में डिमांड पर काबू पाया जा सके और आगे चलकर महंगाई भी नीचे आए.

रेपो रेट बढ़ाने से सप्लाई पर क्या असर
अब आते हैं अगले स्टेज पर. जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ा देता है तो कर्ज महंगा हो जाता है. इससे कर्ज लेने वालों की संख्या में कमी आती है और जब उनके हाथ में पैसे कम आएंगे तो बाजार में खरीदारी या यूं कहें कि डिमांड भी कम हो जाएगी. इससे सप्लाई पर दबाव कम होगा और कीमतों पर काबू पाने में मदद मिलेगी. कीमत कम होगी तो महंगाई अपने आप नीचे आ जाएगी. मतलब, रेपो रेट बढ़ा तो महंगाई घटनी शुरू हो जाएगी. एक बार जैसे ही महंगाई आरबीआई के काबू में आ जाएगी तो फिर रेपो रेट घटाने पर फैसला किया जा सकता है.



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