Pineapple Fiber I कचरे के ढेर से फैशन की दुनिया तक पहुंचा अनानास, जानिए पत्तियों का अनोखा खेल

Pineapple Fiber I कचरे के ढेर से फैशन की दुनिया तक पहुंचा अनानास, जानिए पत्तियों का अनोखा खेल


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अनानास के खेतों में छिपा है कमाई का रास्ता, पत्तियों से बन रहा धागा और चमड़ा

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Pineapple Fiber: अनानास की फसल के बाद बची पत्तियां अब कचरा नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बन रही हैं. इन पत्तियों से प्राकृतिक फाइबर निकालकर पिना फैब्रिक, वेगन लेदर, बैग, जूते, रस्सियां और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग तैयार की जा रही है. इससे किसानों को अतिरिक्त आय के साथ टिकाऊ फैशन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है.

हैदराबाद. अक्सर फल तोड़ने के बाद अनानास के पौधों और उनकी पत्तियों को बेकार समझकर खेतों में छोड़ दिया जाता है या जला दिया जाता है. लेकिन अब यही एग्रीकल्चरल वेस्ट पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ फैशन उद्योग के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो रहा है. अनानास की लंबी और सख्त पत्तियों से निकाले जाने वाले प्राकृतिक रेशे की मांग कपड़ा और हस्तशिल्प उद्योग में तेजी से बढ़ रही है. अनानास के फल की तुड़ाई के बाद बची हरी पत्तियों को विशेष रूप से तैयार लकड़ी के फ्रेम और स्क्रैपर टूल या आधुनिक डीकॉर्टिकेटर मशीनों की मदद से छीला जाता है. इस प्रक्रिया में पत्ती की ऊपरी हरी परत और गूदा अलग हो जाता है जिससे अंदर मौजूद महीन, चमकदार और बेहद मजबूत रेशे बाहर निकल आते हैं.

इसके बाद इन रेशों को पानी से अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाया जाता है. सूखने के बाद यह रेशा बिल्कुल रेशम और जूट जैसा मजबूत और लचीला रूप ले लेता है. इन रेशों को आपस में जोड़कर और कातकर धागा तैयार किया जाता है, ग्लोबल बाजार में इस कपड़े को पिना फैब्रिक के नाम से भी जाना जाता है. यह कपड़ा हल्का, हवादार और टिकाऊ होता है. इसके अलावा, इस फाइबर से वेगन लेदर यानी बिना जानवरों को नुकसान पहुंचाए पर्यावरण-अनुकूल चमड़ा भी तैयार किया जा रहा है जिसका इस्तेमाल बैग, जूते, बेल्ट, जैकेट और फर्नीचर के कवर बनाने में होता है.

यही नहीं, इससे उच्च गुणवत्ता वाला क्राफ्ट पेपर, रस्सियां और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग सामग्री भी बनाई जा रही है. यह नवाचार वेस्ट टू वेल्थ यानी कचरे से संपदा बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. फसल के बाद जिस कचरे के निस्तारण में किसानों का पैसा खर्च होता था, अब उसी से उन्हें अतिरिक्त आय मिल रही है. वहीं दूसरी ओर, सिंथेटिक कपड़ों और प्लास्टिक आधारित चमड़े से होने वाले प्रदूषण को कम करने में यह प्राकृतिक रेशा एक आदर्श विकल्प बनकर उभर रहा है.



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