Hyderabad News I भक्त रामदास की जन्मभूमि है ये गांव, यहीं से शुरू हुई थी भक्ति और संगीत की अनोखी यात्रा

Hyderabad News I भक्त रामदास की जन्मभूमि है ये गांव, यहीं से शुरू हुई थी भक्ति और संगीत की अनोखी यात्रा


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12 साल जेल में रहे, फिर भी नहीं टूटी भक्ति, भक्त रामदास की जन्मभूमि की कहानी

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Bhadrachalam Sri Sita Ramachandra Swamy Temple: तेलंगाना के नेलकोंडपल्ली में महान रामभक्त और संगीतकार कंचर्ला गोपन्ना यानी भक्त रामदास की जन्मस्थली आज भी आस्था और इतिहास का केंद्र है. भद्राचलम राम मंदिर से जुड़ी उनकी भक्ति, 12 साल का कारावास और अमर रामदास कीर्तनालु इस पावन भूमि की कहानी को खास बनाते हैं.

तेलंगाना. पावन भूमि का आध्यात्मिक इतिहास बेहद समृद्ध और गौरवशाली रहा है. गोदावरी नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध भद्राचलम श्री सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर की ख्याति पूरे देश में फैली हुई है, लेकिन इस भव्य मंदिर के निर्माण में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले महान रामभक्त भक्त रामदास की जन्मस्थली आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए एक विशेष आस्था का केंद्र बनी हुई है. तेलंगाना के खम्मम जिले में स्थित नेलकोंडपल्ली वही ऐतिहासिक गांव है जहां 17वीं सदी के महान संत, संगीतकार और वाग्गेयकार कंचर्ला गोपन्ना जिन्हें पूरी दुनिया भक्त रामदास के नाम से जानती है यही उनका जन्म हुआ था. जन्मस्थलीय की देखभाल करने वाले बताते हैं कि कंचर्ला गोपन्ना गोलकोंडा के कुतुब शाही शासक अबुल हसन तानिशा के शासनकाल के दौरान पालवंचा परगने के तहसीलदार नियुक्त किए गए थे.

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भद्राचलम में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण कराया और देवी-देवताओं के लिए अद्भुत आभूषण बनवाए. मंदिर निर्माण में सरकारी खजाने का धन खर्च करने के आरोप में उन्हें गोलकोंडा किले के कारागार में 12 वर्षों तक कठोर कारावास की सजा भुगतनी पड़ी थी. जेल में बिताए गए उस कठिन दौर में भी उनकी भक्ति अटूट रही और उन्होंने कई भावपूर्ण संकीर्तनों की रचना की, जिन्हें कर्नाटक संगीत परंपरा में रामदास कीर्तनालु के नाम से जाना जाता है. नेलकोंडपल्ली में स्थित उनकी जन्मस्थली को एक शांत और सुरम्य स्मारक के रूप में सहेज कर रखा गया है, जिसे श्री भक्त रामदास ध्यान मंदिरम् कहा जाता है. इस पवित्र परिसर की देखरेख भद्राचलम मंदिर देवस्थानम द्वारा की जाती है.

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्त रामदास की हाथ में तानपूरा लिए एक आकर्षक प्रतिमा नजर आती है जो उनके संगीत और प्रभु राम के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है. इस परिसर का एक अन्य प्रमुख आकर्षण वह प्राचीन कुआं है जो रामदास के पारिवारिक समय से जुड़ा हुआ बताया जाता है. इस ऐतिहासिक जल स्रोत को आज भी संरक्षित रखा गया है, इसके साथ ही यहां श्रद्धालुओं के लिए एक ध्यान कक्ष और सभागार भी निर्मित है. हर वर्ष रामदास जयंती और श्रीरामनवमी पर यहां विशेष भक्ति संगीत व संकीर्तन के कार्यक्रम होते हैं. नेलकोंडपल्ली की यह पावन धरती तेलंगाना की समृद्ध भक्ति और संगीत परंपरा की अनमोल धरोहर को जीवित रखे हुए है.



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