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Saharanpur Big News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर पुलिस और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे शहर की आयशा मस्जिद में याचिकाकर्ताओं के पांच बार अजान पढ़ने के अधिकार में दखल न दें. यह निर्देश इस शर्त पर दिया गया कि वे लाउडस्पीकर के नियमों का पालन करेंगे.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश.
सहारनपुर : सहारनपुर के मुस्लिमों को बड़ी राहत मिली है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर पुलिस और जिला प्रशासन को साफ-साफ निर्देश दिया है कि वे शहर की आयशा मस्जिद में याचिकाकर्ताओं के पांच बार अजान पढ़ने के अधिकार में दखल न दें. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का जो नियम है उसका सख्ती से पालन करना होगा.
6 लोगों की याचिका पर सुनवाई
आदेश जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दिया. कोर्ट शहनवाज खान और पांच अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद में पांच बार अजान पढ़ने और इसके लिए लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी. उन लोगों का कहना था कि अदालत के पूर्व के फैसलों के बावजूद अधिकारी उन्हें अजान के लिए लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.
राज्य सरकार ने क्या दलील दी ?
इस पर राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं को अजान पढ़ने से नहीं रोका जा रहा है. केवल लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के तरीके पर रोक है और इसमें ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन करना जरूरी है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 2020 के अफजल अंसारी और 2 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य मामले का हवाला दिया.
पहले क्या था आदेश?
बता दें, इस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि अजान इस्लाम का जरूरी और अहम हिस्सा हो सकती है, लेकिन लाउडस्पीकर या अन्य आवाज बढ़ाने वाले उपकरणों से अजान देना धर्म का जरूरी हिस्सा नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि ध्वनि बढ़ाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के अधीन है. हाईकोर्ट ने अपने पुराने फैसले में स्पष्ट किया था कि जिला प्रशासन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि-वर्धक उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे सकता. बिना अनुमति इन उपकरणों का इस्तेमाल भी गैरकानूनी है. हालांकि, मुअज्जिन बिना किसी एम्प्लीफाइंग डिवाइस के अपनी आवाज में मस्जिद की मीनार से अजान दे सकता है.
अब कोर्ट ने कही ये बात
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 और 2020 के हाईकोर्ट के फैसले में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन नहीं करेंगे. अजान के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल भी लागू नियमों के मुताबिक ही किया जाएगा. इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे दस्तखत वाला नोटरीकृत शपथ-पत्र लगाकर आवेदन दें. इसमें नियमों और कोर्ट के पुराने फैसले के निर्देशों का सख्ती से पालन करने का वचन देना होगा.
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि याचिकाकर्ता शपथ-पत्र में दिए गए वचन का पालन करें. यदि नियमों या दिए गए वचन का उल्लंघन होता है तो पुलिस और प्रशासन कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे.