रेलवे के कबाड़ से जुगाड़! स्क्रैप से बना रहे आकर्षक कलाकृतियां, हुनर देख रह जाएंगे हैरान

रेलवे के कबाड़ से जुगाड़! स्क्रैप से बना रहे आकर्षक कलाकृतियां, हुनर देख रह जाएंगे हैरान


बिलासपुर. रेलवे के यार्ड और वर्कशॉप में पड़ा पुराना लोहा, गुड्स ट्रेन के अनुपयोगी पार्ट्स, पुराने स्लीपर और दूसरे कबाड़ के सामान को देखकर आमतौर पर लगता है कि अब इनकी कोई उपयोगिता नहीं बची है लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रेलवे के कर्मचारियों ने इसी कबाड़ में रचनात्मकता की नई राह तलाश ली है. ‘कबाड़ से जुगाड़’ के कॉन्सेप्ट के तहत बेकार पड़े लोहे और स्क्रैप को काटकर, जोड़कर और अलग-अलग आकार देकर आकर्षक कलाकृतियों में बदला जा रहा है, यानी जिस सामान की उपयोगिता रेलवे के नियमित काम में खत्म हो चुकी है, वही अब कर्मचारियों के हुनर से सजावटी और देखने लायक आकृतियों का रूप ले रहा है. खास बात यह है कि इन कलाकृतियों के लिए नया सामान खरीदने के बजाय रेलवे से निकलने वाले अनुपयोगी स्क्रैप का ही इस्तेमाल किया जा रहा है.

रेलवे में हर दिन बड़ी मात्रा में ऐसा सामान निकलता है, जिसकी व्यवहारिक उपयोगिता खत्म हो जाती है. पुराने लोहे के पार्ट्स, गुड्स ट्रेन के सामान, स्लीपर और कई तरह के उपकरण स्क्रैप में चले जाते हैं. ऐसे सामान को नीलाम करने के बजाय जहां संभव है, वहां उसका रचनात्मक इस्तेमाल किया जा रहा है. कर्मचारी अपनी तकनीकी जानकारी और हुनर से इन्हीं लोहे के टुकड़ों को अलग-अलग आकृतियों में ढाल रहे हैं.

कबाड़ से तैयार हो रहीं कलाकृतियां
कबाड़ से जुगाड़ के तहत पुराने लोहे को पहले जरूरत के मुताबिक काटा जाता है. इसके बाद अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर उन्हें मनचाहा आकार दिया जाता है. इस तरह स्क्रैप से कई तरह की आकृतियां और सजावटी सामान तैयार किए जा रहे हैं. खास बात यह है कि कलाकृति तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर सामान वही है, जिसे पहले अनुपयोगी मानकर कबाड़ में रखा गया था.

रेलवे कर्मचारियों के हुनर का कमाल
इन कलाकृतियों के पीछे रेलवे के कर्मचारियों की मेहनत और रचनात्मक सोच है. कर्मचारी अपने स्तर पर उपलब्ध स्क्रैप को देखकर यह तय करते हैं कि उससे किस तरह की आकृति तैयार की जा सकती है. कहीं पुराने पार्ट्स किसी आकृति का हिस्सा बन जाते हैं, तो कहीं लोहे के दूसरे सामान को सजावटी रूप दिया जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया में कबाड़ सिर्फ सामान नहीं रहता बल्कि कला का माध्यम बन जाता है.

रायपुर में स्क्रैप से बनाई भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल रायपुर के वैगन रिपेयर शॉप में स्क्रैप से भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा तैयार की गई थी. रेलवे के पुराने और अनुपयोगी सामान से बनी इस प्रतिमा को लोगों ने काफी पसंद किया था. इस प्रयोग को मिली सराहना के बाद स्क्रैप से अलग-अलग तरह की कलाकृतियां तैयार करने का सिलसिला आगे बढ़ाया गया.

सजावट के काम भी आ रहा रेलवे का कबाड़
स्क्रैप से तैयार की जा रही कई आकृतियों का इस्तेमाल सजावट के लिए भी किया जा सकता है. पुराने लोहे के उपकरणों और पार्ट्स को इस तरह नया रूप दिया जा रहा है कि वे देखने में आकर्षक लगें, यानी जिस सामान को हटाने की जरूरत थी, उसी सामान को रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल कर एक नई उपयोगी पहचान दी जा रही है.

स्क्रैप का बेहतर इस्तेमाल, नीलामी भी विकल्प
रेलवे के मुताबिक, हर अनुपयोगी सामान को कलाकृति में बदलना संभव नहीं होता, इसलिए जो स्क्रैप दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, उसका रचनात्मक इस्तेमाल किया जाता है. वहीं जो सामान पूरी तरह अनुपयोगी है, उसे नियमानुसार स्क्रैप के तौर पर नीलाम किया जा सकता है. इससे स्क्रैप का बेहतर प्रबंधन भी होता है और उपयोगी सामान को दोबारा इस्तेमाल करने का मौका भी मिलता है.

सामान का दो तरह से इस्तेमाल
रेलवे के सीनियर पीआरओ संतोष कुमार ने बताया कि रेलवे में अनुपयोगी हो चुके सामान को दो तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. जो सामान पूरी तरह अनुपयोगी है, उसे स्क्रैप के रूप में नीलाम किया जा सकता है जबकि जिस स्क्रैप से कुछ उपयोगी या आकर्षक बनाया जा सकता है, उसका रचनात्मक इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी सोच के तहत कर्मचारियों द्वारा स्क्रैप से अलग-अलग तरह की कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं.

स्क्रैप को नया रूप दे रहा हुनर
रेलवे का यह प्रयोग बताता है कि किसी सामान की उपयोगिता खत्म होने के बाद भी उसकी कहानी खत्म नहीं होती. सही सोच और रचनात्मक हुनर हो, तो बेकार पड़ा लोहा भी खूबसूरत कलाकृति बन सकता है. ‘कबाड़ से जुगाड़’ की यही सोच रेलवे के पुराने स्क्रैप को नया रूप दे रही है और कर्मचारियों की रचनात्मकता को भी सामने ला रही है.



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