ब्रह्मोस, अग्नि-5, तेजस को भूल जाइए, इस स्‍वदेशी महारथी ने चीन की उड़ाई नींद – Akash air defence missile system export Tajikistan Turkmenistan China

ब्रह्मोस, अग्नि-5, तेजस को भूल जाइए, इस स्‍वदेशी महारथी ने चीन की उड़ाई नींद – Akash air defence missile system export Tajikistan Turkmenistan China


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Akash Air-Defence Missile System: इंडिया का डिफेंस एक्‍सपोर्ट दिन दूनी और रात चौगुनी की रफ्तार से प्रोग्रेस कर रहा है. अकेले ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का निर्यात आने वाले कुछ महीनों में ₹57,83,03,40,000 (USD 600 Million) तक पहुंच सकता है. इसके अलावा स्‍वदेशी तकनीक से डेवलप एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम की मांग भी दुनिया के कई देशों में बढ़ रही है.

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स्‍वदेशी आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम ने चीन की नींद उड़ा दी है. (फाइल फोटो/Reuters)

Akash Air-Defence Missile System: भारत ही नहीं पूरी दुनिया में एक मान्‍य धारणा है कि एक पड़ोसी दूसरे पड़ोसी की प्रगति को सहन नहीं कर पाता है. चीन की हालत भी कुछ ऐसी ही है. पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है. भारतीय मिसाइल्‍स और एयर डिफेंस सिस्‍टम की धूम पूरी दुनिया में मची हुई है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इंडियन डिफेंस इक्विपमेंट्स ने जिस तरह का प्राक्रम दिखाया, उससे पूरी दुनिया स्‍तब्‍ध और हतप्रभ है. इसके बाद तो भारत के स्‍वदेशी रक्षा उत्‍पादों को खरीदने की होड़ सी लग गई है. फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल खरीदी है. चीन की दादागिरी से तंग दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों ने इस घातक मिसाइल को खरीदने की चाहत दिखाई है. कुछ देशों के साथ तो सैद्धांतिक सहमति भी बन चुकी है और कुछ के साथ बातचीत चल रही है. इसके अलावा देसी तकनीक से डेवलप किए गए आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम की डिमांड भी बढ़ गई है. अर्मेनिया के बाद अब ताजिकिस्‍तान और तुर्कमेनिस्‍तान ने भी इस सरफेस-टू-एयर मिसाइल को खरीदने की इच्‍छा जताई है. भारत ने इन दोनों देशों के साथ आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को लेकर किए गए सौदों की पुष्टि भी की है. डिफेंस मार्केट में भारत की बढ़ती साख ने चीन की नींद उड़ा रखी है.

जानकारी के अनुसार, भारत ने स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम का ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को निर्यात करने की बात कही है. इससे मध्य एशिया के रणनीतिक रक्षा बाजार में भारत ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है. डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने पिछले सप्ताह इन सौदों की पुष्टि करते हुए आकाश को भारत की रक्षा निर्यात क्षेत्र की सफल कहानियों में से एक बताया था. इन सौदों को भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह प्रमुख ग्‍लोबल डिफेंस एक्‍सपोर्टर बनने की ओर बढ़ रहा है. सेंट्रल एशिया में चीन पहले से ही अपनी जड़ें जमा चुका है, ऐसे में भारत की मौजूदगी बीजिंग को खटकने लगी है.

तेजस फाइटर जेट का निर्माण भी घरेलू तकनीक से किया जा रहा है. (फाइल फोटो/PTI)

अचूक एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित आकाश कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली स्वदेशी मिसाइल सिस्‍टम है. यह एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव की क्षमता से लैस है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आकाश 100 मीटर से 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद एरियल टार्गेट को निशाना बना सकती है और इसकी ऑपरेशनल मारक क्षमता करीब 4.5 से 25 किलोमीटर है. करीब 5.87 मीटर लंबी प्रत्येक मिसाइल का वजन लगभग 710 किलोग्राम है और यह कमांड गाइडेंस के जरिए लक्ष्य को साधती है. सिस्‍टम के एडवांस वेरिएंट आकाश प्राइम और आकाश-NG में बेहतर सेंसर और अन्य तकनीकी सुधार किए गए हैं.

5 प्‍वाइंट्स में समझें आकाश की कहानी

  • स्वदेशी और मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम: आकाश भारत में विकसित मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. इसे महत्वपूर्ण इलाकों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की हवाई सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है. यह लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई लक्ष्यों से निपटने में सक्षम है.
  • 25 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने की क्षमता: आकाश की ऑपरेशनल मारक क्षमता करीब 4.5 से 25 किलोमीटर तक है, जबकि इसके नए संस्करणों में यह क्षमता और बढ़ाई गई है. यह 100 मीटर से लेकर करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ रहे लक्ष्यों को निशाना बना सकता है. इसकी मोबाइल लॉन्चर प्रणाली इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात करने में मदद करती है.
  • एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला: आकाश सिस्‍टम एक बैटरी स्तर पर एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता रखती है. यह 64 तक लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और इनमें से 12 पर एक साथ कार्रवाई कर सकती है. इसकी लक्ष्य पहचान और ट्रैकिंग में राजेंद्र 3डी फेज्ड-एरे रडार अहम भूमिका निभाता है.
  • DRDO ने विकसित किया, BDL और BEL बनाते हैं: आकाश सिस्‍टम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. इसके निर्माण में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की प्रमुख भूमिका है. मोबाइल लॉन्चर, रडार, बैटरी कंट्रोल सेंटर और ग्रुप कंट्रोल सेंटर मिलकर इसकी नेटवर्क आधारित संचालन क्षमता को मजबूत करते हैं.
  • निर्यात बाजार में बढ़ रही भारत की पकड़: आकाश सिस्‍टम अब भारत की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षा का भी अहम हिस्सा बन गई है. इसके विभिन्न संस्करणों और प्रणालियों को भारत के अलावा आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों तक पहुंच मिली है. आकाश-1S के बाद आकाश प्राइम और नई पीढ़ी के आकाश-NG जैसे उन्नत संस्करण विकसित किए गए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में इसकी संभावनाएं और बढ़ी हैं.

सेंट्रल एशिया में आकाश की पहुंच क्‍यों अहम

सेंट्रल एशिया में आकाश की पहुंच इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से चीन के रक्षा प्रभाव में रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के हथियार निर्यात में गिरावट आई है, जबकि चीन ने इस मौके और मजबूती से लपका है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक रूस अभी भी मध्य एशिया का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता है. वहीं, चीन खासकर उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है. ऐसे में भारत का प्रवेश क्षेत्रीय देशों को हथियारों के लिए रूस और चीन पर निर्भरता कम करने का अवसर देता है. डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के लिए आकाश की खरीद चीन से आगे रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने का तरीका है. तुर्कमेनिस्तान पहले ही कई चीनी एयर डिफेंस सिस्‍टम्‍स खरीद चुका है और आकाश उसके वायु रक्षा ढांचे में मध्य स्तर की क्षमता को पूरा कर सकती है.

ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल पहले से ही चीन के लिए टेंशन का सबब बनी हुई है. (फाइल फोटो/Reuters)

भारत की मौजूदगी रूस के लिए कैसे बेहतर

भारत की यह मौजूदगी रूस के लिए अपेक्षाकृत स्वीकार्य विकल्प हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक मॉस्को के लिए यह बेहतर स्थिति होगी कि मध्य एशियाई देश भारतीय हथियार खरीदें, बजाय इसके कि वे NATO या पूरी तरह चीनी सैन्य मानकों के करीब चले जाएं. हालांकि चीन के लिए तस्वीर अलग है. चीन ने मध्य एशिया में खुद को प्रमुख मिलिट्री सप्‍लायर के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है. ऐसे में चीन की पश्चिमी सीमा के नजदीक भारतीय सैन्य प्रणालियों की मौजूदगी बीजिंग के लिए रणनीतिक रूप से असहज करने वाली हो सकती है. भारत के लिए यह विस्तार केवल आकाश तक सीमित नहीं रह सकता. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आकाश खरीदने वाले देश भविष्य में भारत से रडार, तोपखाने और अन्य मिसाइल प्रणालियां भी खरीद सकते हैं. रूस फिलहाल अपनी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की आपूर्ति को अपनी जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने पर अधिक ध्यान दे रहा है. इससे भारत के लिए बाजार में जगह बनाने का अवसर पैदा हुआ है.

कम कीमत का लाभ

भारत को आकाश की अपेक्षाकृत कम कीमत और घरेलू उत्पादन क्षमता का भी लाभ मिल रहा है. घरेलू मैन्‍यूफैक्‍चरिंग लाइन और भारतीय सशस्त्र बलों की अपनी खरीद से संभावित विदेशी ग्राहकों को आपूर्ति की विश्वसनीयता, तेजी से पुनःपूर्ति और प्रशिक्षण की सुविधा का भरोसा मिलता है. भारत रूसी मूल की प्रणालियों के रखरखाव में भी मध्य एशियाई देशों की मदद कर सकता है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा. आकाश के निर्यात को भारत के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह प्रणाली युद्ध के वास्तविक अनुभव से गुजर चुकी है. पाकिस्तान के साथ पिछले साल हुए सैन्‍य टकराव में इसके इस्तेमाल से इसे युद्ध में परखी हुई प्रणाली के रूप में पहचान मिली है. उनके अनुसार विदेशी बिक्री से भारत के रक्षा निर्यात को गति मिलने के साथ-साथ ग्राहकों से मिलने वाली प्रतिक्रिया भारत को अपने अन्य निर्यात-उन्मुख रक्षा उत्पादों में सुधार करने में मदद करेगी.



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