RBI MPC Meeting: रेपो रेट बढ़ा तो सोने पर क्या असर होगा, जानें ब्याज दर और गोल्ड का कनेक्शन

RBI MPC Meeting: रेपो रेट बढ़ा तो सोने पर क्या असर होगा, जानें ब्याज दर और गोल्ड का कनेक्शन


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की अक्टूबर बैठक पर बाजार की नजरें टिकी हैं. इस बैठक में महंगाई, आर्थिक विकास और ब्याज दरों समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है. रेपो रेट पर फैसला 7 अक्टूबर को आएगा. अभी रेपो रेट 5.25% है. मार्केट के एक्सपर्ट्स के अनुसार, RBI इस बार ब्याज दर बढ़ा सकता है. हालांकि, MPC के सदस्यों के रुख और आर्थिक आंकड़ों पर फैसला निर्भर करेगा.

RBI के फैसले का असर सिर्फ लोन और EMI पर नहीं पड़ता, बल्कि सोने जैसी एसेट क्लास पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. खासकर जब ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद हो, तब निवेशक बॉन्ड, FD में अपना पैसा निवेश करने पर विचार करते हैं. ऐसे में सवाल है कि अगर RBI ने दर बढ़ाई तो सोने की कीमत गिरेगी या नहीं? और अगर दर में कोई बदलाव नहीं हुआ तो Gold पर क्या असर पड़ेगा?

रेपो रेट बढ़ा तो सोने पर क्यों बन सकता है दबाव?

सोना ऐसा निवेश है जिससे नियमित ब्याज नहीं मिलता. वहीं, बैंक FD और बॉन्ड जैसे ऑप्शन ब्याज देते हैं. इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो फिक्स्ड इनकम वाले निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. मान लीजिए RBI रेपो रेट बढ़ाता है और इसके चलते बाजार में ब्याज दरें भी ऊपर जाती हैं. ऐसी स्थिति में निवेशकों को FD, बॉन्ड या दूसरे ब्याज देने वाले ऑप्शन से बेहतर रिटर्न की उम्मीद हो सकती है. इससे सोने की मांग पर शॉर्ट टर्म में दबाव आ सकता है.

इसके अलावा, अगर RBI का रुख आगे भी ब्याज दरों को ऊंचा रखने वाला रहता है, तो इसका असर सोने की कीमतों पर कुछ समय तक रह सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दरें बढ़ते ही सोना निश्चित रूप से गिर जाएगा. सोने की कीमत कई दूसरे घरेलू और ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती है.

RBI रेपो रेट में कटौती करे तो क्या होगा?

अगर RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करता और आगे के लिए नरम रुख दिखाता है, तो सोने को कुछ सपोर्ट मिल सकता है. ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर बॉन्ड और FD से मिलने वाला संभावित रिटर्न कम आकर्षक हो सकता है. ऐसे में कुछ निवेशक सोने की ओर रुख कर सकते हैं.

सोना आर्थिक और जियो-पॉलिटिकल अनसर्टिनिटी के समय भी निवेशकों को आकर्षित करता है. अगर महंगाई, ग्लोबल तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ सकती है. इसलिए RBI का फैसला सोने की दिशा तय करने वाला अकेला फैक्टर नहीं है.

क्या है एक्सपर्ट की राय?

Otto Money के CEO और फाउंडर Apurv Gupta मुताबिक, सोने से कोई ब्याज नहीं मिलता. इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डेट यानी ब्याज देने वाले निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं और आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव आता है. इसी तरह, ब्याज दरों में कटौती सोने के लिए पॉजिटिव होती है. क्योंकि बाजार पहले ही 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, इसलिए कल का फैसला सोने की कीमतों में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं ला सकता. लंबे समय में सोने की कीमत पर डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरें और सेंट्रल बैंक की खरीद ज्यादा असर डालती हैं. उनके मुताबिक, निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने की जगह होनी चाहिए.

इन चीजों पर भी नजर रखें

सोने की कीमत पर RBI की पॉलिसी के साथ-साथ अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, महंगाई और वैश्विक तनाव का भी असर पड़ता है. भारत में रुपये की चाल भी अहम है. डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर भारत में आयातित सोना महंगा हो सकता है. इसलिए 7 अक्टूबर के RBI फैसले के बाद सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि रेपो रेट बढ़ा, घटा या स्थिर रहा. यह भी देखना होगा कि RBI आगे की ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है. अगर सेंट्रल बैंक का रुख सख्त रहता है तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है. वहीं, नरम रुख या दरों में कटौती की उम्मीद गोल्ड को सपोर्ट दे सकती है.

लेकिन केवल एक फैसले के आधार पर जल्दबाजी में खरीदारी या बिक्री करने के बजाय अपनी निवेश अवधि, जोखिम और टारगेट को ध्यान में रखना बेहतर है.

(Disclaimer: यहां बताए गए स्‍टॉक्‍स ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्‍टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)



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