नैनीताल. गांधी जयंती के बाद मिले लंबे वीकेंड में उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी. सरोवर नगरी नैनीताल भी इससे अछूती नहीं रही. शहर की माल रोड, मल्लीताल, तल्लीताल, भोटिया मार्केट और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों का सैलाब नजर आया. यही हाल बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम का भी रहा. बड़ी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के पहुंचने से सड़कें और पार्किंग फुल हो गईं और कई जगह घंटों लंबा जाम लगा रहा. अब स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठने लगा है कि क्या सिर्फ भीड़ बढ़ना ही पर्यटन का विकास है. लोकल 18 से स्थानीय निवासी मोहन चंद्र पांडे बताते हैं कि छुट्टी के बाद अखबारों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि नैनीताल में करीब 35 हजार से अधिक पर्यटक पहुंचे. इतनी बड़ी भीड़ के चलते पूरा शहर पैक हो गया. नैनीताल की भौगोलिक स्थिति अलग है. यहां सड़कें संकरी हैं और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. ऐसे में एक साथ हजारों वाहनों और पर्यटकों के पहुंचने से स्थानीय लोगों की आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है.
बढ़ जाता है किराया
मोहन पांडे कहते हैं कि गांधी जयंती और श्राद्ध पक्ष के कारण कई स्थानीय लोगों को अपने घरों तक पहुंचने में परेशानी हुई. हल्द्वानी जाने के लिए उनके बच्चों को करीब 500 रुपये किराया देना पड़ा, जबकि भवाली से नैनीताल आने में भी करीब 300 रुपये खर्च करने पड़े. पर्यटन का दबाव केवल नैनीताल और कैंची धाम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आसपास के दूसरे पर्यटन स्थलों को भी विकसित कर पर्यटकों को वहां भेजने की जरूरत है.
1 किमी का सफर, लगा 3 घंटे से ज्यादा
स्थानीय निवासी इमरान बताते हैं कि वह बचपन से नैनीताल में रह रहे हैं और शहर में पर्यटकों की भीड़ कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार स्थिति बेहद परेशान करने वाली रही. उनके मुताबिक मल्लीताल से तल्लीताल के बीच महज एक से तीन किलोमीटर का सफर तय करने में तीन घंटे से ज्यादा समय लग गया. इमरान ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि नैनीताल में गंभीर मरीजों को अक्सर इलाज के लिए हल्द्वानी ले जाना पड़ता है. ऐसे में यदि सड़क पर लंबा जाम लगा हो तो मरीजों की परेशानी कई गुना बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि भीड़ के दौरान एंबुलेंस तक जाम में फंसती नजर आईं.
सुविधाएं पर्याप्त नहीं
मां नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन का कहना है कि पर्यटन बढ़ने की परिभाषा को केवल भीड़ से जोड़ना गलत है. उनके मुताबिक, हजारों पर्यटकों के आने को पर्यटन का विकास मान लिया जाता है, जबकि जरूरी बुनियादी सुविधाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं. उन्होंने कहा कि नैनीताल के लिए बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को लेकर लंबे समय से बातें होती रही हैं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित काम नहीं हुआ. कैंची धाम की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, इसके बावजूद बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक मार्ग, बाईपास और ट्रैफिक प्लान तैयार नहीं किए गए हैं. पुनीत टंडन के मुताबिक, जब भी शहर में अत्यधिक भीड़ बढ़ती है तो इसका सीधा असर स्थानीय लोगों पर पड़ता है. जाम में घंटों फंसना अब उनके लिए परेशानी के साथ-साथ सजा जैसा बनता जा रहा है.
रील और कंटेंट ने बढ़ाई परेशानी
नैनीताल निवासी प्रो. अजय रावत भी इस भीड़ से परेशान नजर आए. वे कहते हैं कि उन्हें लेक्चर देने के लिए जाना था, लेकिन वह खुद घंटों जाम में फंसे रहे. उनका कहना है कि नैनीताल और कैंची धाम की ओर आने वाली भीड़ अब अनियंत्रित होती जा रही है. प्रो. रावत ने कैंची धाम में बढ़ते पर्यटन के स्वरूप पर भी सवाल उठाया. उनके अनुसार, कई लोग आध्यात्मिक अनुभव के बजाय रील और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के उद्देश्य से पहुंच रहे हैं. इससे मंदिर की मर्यादा और श्रद्धालुओं के अनुभव पर भी असर पड़ रहा है.
2.5 गुना तक बढ़ा कूड़ा
पर्यटकों की भारी भीड़ का असर नैनीताल की सफाई व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दिया. नैनीताल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने बताया कि गांधी जयंती के बाद वीकेंड में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक पर्यटक शहर पहुंचे. सामान्य दिनों में नैनीताल से प्रतिदिन करीब 7 से 8 टन कूड़ा निकलता है, जबकि इस बार यह बढ़कर करीब 15 से 16 टन प्रतिदिन पहुंच गया. यानी सामान्य दिनों की तुलना में लगभग ढाई गुना तक अधिक कचरा शहर से निकला. ईओ के मुताबिक, सफाई व्यवस्था को संभालने के लिए 24 घंटे कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां चलाई गईं और डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण करने वाले कर्मचारियों ने भी अतिरिक्त मेहनत की. इस दौरान शहर के लगभग सभी डस्टबिन पूरी तरह भर गए थे. कई पर्यटकों को होटल में कमरा नहीं मिलने के कारण अपनी गाड़ियों में रात गुजारनी पड़ी. इसके बाद गाड़ियों से भी कचरा निकलने की स्थिति सामने आई. शहर की लगभग सभी पार्किंग फुल रहीं और 7,500 से अधिक वाहन नैनीताल पहुंचे.
पर्यटन को रोकना समाधान नहीं
नैनीताल में बढ़ती पर्यटकों की संख्या निश्चित तौर पर पर्यटन कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इस बार की भीड़ ने शहर की सीमित क्षमता को भी सामने ला दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन को रोकना समाधान नहीं है, लेकिन नियंत्रित और टिकाऊ पर्यटन की दिशा में काम करना जरूरी है. नैनीताल जैसे संवेदनशील पहाड़ी शहर में पार्किंग, यातायात, कचरा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और वैकल्पिक पर्यटन स्थलों का विकास किए बिना लगातार बढ़ती भीड़ भविष्य में स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकती है.