Election Commission on Rahul Gandhi Protest: 240 सांसदों से कैसे मिलते? राहुल-प्रियंका के हल्ला बोल पर आया चुनाव आयोग का बयान, 6 प्वाइंट में दिया जवाब

Election Commission on Rahul Gandhi Protest: 240 सांसदों से कैसे मिलते? राहुल-प्रियंका के हल्ला बोल पर आया चुनाव आयोग का बयान, 6 प्वाइंट में दिया जवाब


मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित विपक्षी नेताओं को पुलिस ने आखिरकार ने आकाशवाणी भवन से जबरन हटा दिया है. राहुल गांधी समेत ये तमाम विपक्षी नेता सुबह से ही वहां धरना दे रहे थे और चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात होने तक धरना जारी रखने पर अड़े हुए थे. विपक्ष का कहना था कि वह चुनाव आयोग से मिलकर अपनी बात रखना चाहता है, लेकिन आयोग उनसे मिलने को तैयार नहीं है. इसलिए जबतक चुनाव आयोग की तरफ से मुलाकात के लिए बुलावा नहीं आता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा. हालांकि पुलिस ने उन्हें मंगलवार 6 अक्टूबर की शाम हिरासत में लेकर जबरन बस में बैठाया और आकाशवाणी भवन परिसर खाली करा लिया. आज दिन भरे चले इस हंगामे के बीच एक सवाल यही उठ रहा था आखिर चुनाव आयोग के अधिकारी इनसे मिलने को तैयार क्यों नहीं. ऐसे में चुनाव आयोग ने अब इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष साफ कर दिया है.

चुनाव आयोग के मुताबिक, शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिये मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा था. करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से आयोग को जानकारी मिली कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलना और ज्ञापन सौंपना चाहता है.

चुनाव आयोग ने दिया प्रक्रिया का हवाला

चुनाव आयोग की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि दिन में कुछ राजनीतिक दलों के सांसदों के आयोग से मिलने की खबरें मीडिया के जरिए सामने आई थीं, लेकिन शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग से मिलने का समय नहीं मांगा था.

आयोग ने बताया कि 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया बनाई गई थी. इसके तहत किसी पार्टी या कई दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को पहले अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए बैठक का अनुरोध करना होता है. इसके बाद आयोग और संबंधित दल के बीच आपसी सहमति से तारीख और समय तय किया जाता है.

फिर 4 बजे क्या हुआ?

आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस के DCP की ओर से उसे जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है. लेकिन आयोग को जो जानकारी दी गई, उसके मुताबिक इस प्रतिनिधिमंडल में करीब 240 सांसद शामिल थे, जो सभी संसद भवन एनेक्सी में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात करना चाहते थे.

240 सांसदों से एक साथ मुलाकात क्यों नहीं?

चुनाव आयोग का कहना है कि करीब 240 सांसदों के समूह के साथ संसद भवन एनेक्सी में बैठक का अनुरोध असामान्य था और मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत इसे स्वीकार करना संभव नहीं था.

आयोग ने साफ किया कि राजनीतिक दलों या उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ ऐसी बैठकें सामान्य तौर पर निर्वाचन आयोग के परिसर में होती हैं. इसलिए प्रस्तावित स्थान और प्रतिनिधिमंडल के आकार को देखते हुए आयोग ने बैठक का अनुरोध स्वीकार नहीं किया.

आयोग ने खुद सुझाया विकल्प

चुनाव आयोग ने दावा किया कि उसने एक वैकल्पिक रास्ता भी सुझाया. प्रेस रिलीज में बताया गया है कि ECI ने प्रस्ताव दिया कि विपक्षी सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजा जा सकता है, जो कि अपने आप में ही एक अभूतपूर्व कदम होता. हालांकि, इस अनुरोध को भी इन सांसदों ने अस्वीकार कर दिया.’

आयोग की तरफ से कहा गया कि वह देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है, और अपने स्वयं के प्रोटोकॉल और परंपराओं का भी सम्मान करता है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. कोई भी राजनीतिक दल, किसी भी समय, चुनाव आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है; और आयोग समय की अनुकूलता के दृष्टिगत, उनसे मिलने की तिथि और समय निर्धारित कर सकता है. यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है.



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