Donald Trump Iran News : ईरान के सामने अमेरिका के 2 शहरों की बलि चढ़ाने को तैयार ट्रंप, ‘छोटी कीमत’ बताकर अटैक का दिया ऑफर

Donald Trump Iran News : ईरान के सामने अमेरिका के 2 शहरों की बलि चढ़ाने को तैयार ट्रंप, ‘छोटी कीमत’ बताकर अटैक का दिया ऑफर


वॉशिंगटन : अमेरिका की इंटरनल राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है. नवंबर में मिडटर्म चुनाव है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने गलत फैसलों को सही ठहराने करने में एडी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. इसी जुगत में उन्होंने ईरान के सामने अपने 2 शहरों की बलि चढ़ाने का ऐलान कर दिया है. नेब्रास्का में अपनी एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसकी उम्मीद शायद उनकी पार्टी को भी नहीं होगी. ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान अमेरिकी शहरों को निशाना बनाता है तो लॉस एंजिल्स और सैन डिएगो की तबाही वैश्विक सुरक्षा और अमेरिका के हितों के लिए ‘एक बहुत छोटी कीमत’ होगी.

अमेरिका के 2 शहरों की बलि चढ़ाने के तैयार ट्रंप

एक राष्ट्रपति का अपनी ही आवाम के 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान और देश के दो सबसे ताकतवर आर्थिक-सामरिक शहरों को दुश्मन देश के आगे ‘ऑफर’ की तरह पेश कर देना, अमेरिकी इतिहास की सबसे अजीब और खतरनाक घटनाओं में गिना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर कैलिफोर्निया के बड़े-बड़े नेता इस बयान को ‘सनकी, खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना’ करार दे रहे हैं.

नेब्रास्का की रैली में आखिर ट्रंप ने ऐसा क्या कहा?

नेब्रास्का के ग्रैंड आइलैंड में पिनेकल बैंक एक्सपो सेंटर में अपनी पार्टी के समर्थकों से बात करते हुए ट्रंप ईरान के साथ जारी जंग और देश में आसमान छू रही ईंधन की कीमतों पर अपनी बात रख रहे थे. इसी दौरान, उन्होंने कैलिफोर्निया के दो सबसे बड़े ‘ब्लू स्टेट’ यानी डेमोक्रेटिक पार्टी के गढ़ माने जाने वाले शहरों पर हमला बोल दिया.

उन्होंने कहा ’ये दुनिया और हमारे देश की सुरक्षा के लिए चुकाई जाने वाली एक बहुत छोटी कीमत है. वो किसी शहर को तबाह कर सकते हैं. उन्हें लॉस एंजिल्स को तबाह करने दो. उन्हें सैन डिएगो को तबाह करने दो. ये बहुत छोटी कीमत है और बहुत जल्द ये सब खत्म हो जाएगा. सच कहें तो ये लगभग खत्म ही हो चुका है’.

जैसे ही ट्रंप के मुंह से ये शब्द निकले, अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में मानो भूचाल आ गया. रिपब्लिकन समर्थक ट्रंप का बचाव कर रहे हैं. उनका कहना है कि ट्रंप का मतलब शहरों पर मिसाइल गिरने से नहीं था, बल्कि वो युद्ध के कारण अमेरिकी जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ और तेल के दामों की ओर इशारा कर रहे थे. लेकिन ट्रंप ने जिस तरह खुलेआम ‘उन्हें तबाह करने दो’ जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, उसने उनके विरोधियों को तीखा हमला करने का पूरा मौका दे दिया.

लॉस एंजिल्स और सैन डिएगो: केवल शहर नहीं, अमेरिका की असली ताकत

ट्रंप के इस ऑफर से अमेरिका के आम नागरिक इसलिए हैरान हैं क्योंकि लॉस एंजिल्स और सैन डिएगो कोई आम शहर नहीं हैं. ये केवल डेमोक्रेटिक पार्टी के वोटों का ठिकाना नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत रीढ़ हैं.

  1. लॉस एंजिल्स (LA): ये शहर सिर्फ चमक-धमक और हॉलीवुड की फिल्मों तक सीमित नहीं है. अमेरिका का ये दूसरा सबसे बड़ा शहर प्रशांत महासागर के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सबसे बड़ा दरवाजा है. यहां का पोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पूरे अमेरिका की सप्लाई चेन को चलाता है. इसके अलावा, एयरोस्पेस, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल कल्चर में इस शहर का कोई विकल्प नहीं है.
  2. सैन डिएगो: ये शहर अमेरिकी सेना और नेवी के लिए किसी रीढ़ की हड्डी से कम नहीं है. सैन डिएगो में अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकाने हैं, जहां से पूरे प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सेना अपने ऑपरेशन्स को कंट्रोल करती है. इसके साथ ही ये शहर बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज और मेक्सिको बॉर्डर के जरिए व्यापार का बहुत बड़ा सेंटर है.

इन दोनों शहरों को ईरान के आगे दांव पर लगाना या इनकी तबाही को ‘छोटी कीमत’ बताना, असल में 1 करोड़ से ज्यादा अमेरिकियों की सुरक्षा और पूरे देश की अर्थव्यवस्था को आग में झोंकने जैसा है.

कैलिफोर्निया के नेताओं का गुस्सा और पलटवार

ट्रंप का ये बयान सामने आते ही कैलिफोर्निया के टॉप नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है. राज्य के गवर्नर से लेकर दोनों शहरों के मेयरों ने ट्रंप पर सीधा और तीखा हमला किया है.

  1. गेविन न्यूसम (गवर्नर, कैलिफोर्निया): न्यूसम ने सोशल मीडिया पर ट्रंप को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें ‘सनकी और खतरनाक’ करार दिया. उन्होंने खुलकर लिखा, ‘राष्ट्रपति हमारे विदेशी दुश्मनों से ये कह रहे हैं कि वो हमारे 1 करोड़ से अधिक अमेरिकियों पर हमला कर दें. ये बिल्कुल सामान्य नहीं है. ऐसा सोचना भी खौफनाक है’.
  2. करेन बास (मेयर, लॉस एंजिल्स): लॉस एंजिल्स की मेयर ने ट्रंप पर अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रपति की सबसे पहली और बुनियादी जिम्मेदारी अपने देशवासियों की रक्षा करना होता है, न कि विदेशी दुश्मनों को अपने ही नागरिकों और शहरों पर हमला करने के लिए उकसाना या न्योता देना.
  3. टॉड ग्लोरिया (मेयर, सैन डिएगो): सैन डिएगो के मेयर ने साफ शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘सैन डिएगो का कोई भी नागरिक किसी युद्ध में बलि का बकरा बनने के लिए नहीं है. हमारे लोग बेकार नहीं हैं और हम कभी भी किसी की ‘छोटी कीमत’ नहीं हो सकते. ट्रंप को अपनी इस गैर-जिम्मेदाराना और जहरीली बयानबाजी को तुरंत बंद करना चाहिए’.

क्या वाकई खत्म होने वाला है अमेरिका-ईरान युद्ध?

ट्रंप का ये दावा कि ‘युद्ध लगभग खत्म हो चुका है’, जमीनी हकीकत से काफी दूर नजर आता है. आज भी अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बेहद खतरनाक दौर में है.

युद्ध की शुरुआत और सीजफायर: सात महीने पहले फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ये युद्ध शुरू हुआ था. इसके बाद जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी. नाजुक युद्धविराम: ये सीजफायर नाममात्र का ही रहा है. दोनों तरफ से छिटपुट मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं. ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज में तेल के टैंकरों की आवाजाही और अमेरिका द्वारा लगाई गई सख्त पाबंदियों जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई हल नहीं निकल पाया है.

ईरान का शांति प्रस्ताव: हाल ही में तेहरान ने शांति समझौते के लिए एक नया प्रस्ताव वाशिंगटन को भेजा था. ईरान ने शर्त रखी थी कि अगर अमेरिका उस पर से आर्थिक पाबंदियां हटाता है और जब्त संपत्तियों को आजाद करता है, तो वो होर्मुज को व्यापार के लिए पूरी तरह खोल देगा. वाशिंगटन ने इस पर अपना जवाब तो भेज दिया है, लेकिन बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेगी या जंग और भड़केगी, ये कहना अभी मुश्किल है.



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