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यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब ने अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया है. इस ऑपरेशन में F-15 फाइटर जेट की भूमिका चर्चा में है. करीब 40-45 साल पुराने इस फाइटर जेट को लगातार अपग्रेड किया गया है.
45 साल पुराना F-15
यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग फिर तेज हो गई है. सऊदी अरब की अगुवाई वाला गठबंधन हूतियों पर लगातार हमले कर रहा है. इस अभियान को ‘ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन’ नाम दिया गया है. गठबंधन का दावा है कि इस ऑपरेशन में करीब 100 लड़ाकू विमान शामिल हुए हैं. अब तक 324 अहम ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है. सऊदी समर्थित यमनी बलों ने बाब-अल-मंदेब इलाके में भी बढ़त बनाने का दावा किया है. यह समुद्री रास्ता काफी अहम माना जाता है.
इस पूरे ऑपरेशन में सऊदी अरब के लड़ाकू विमान अहम भूमिका निभा रहे हैं. इनमें F-15 सबसे ज्यादा चर्चा में है. यह अमेरिका में बना एक ताकतवर लड़ाकू विमान है. अब सवाल है कि आखिर सऊदी अरब का F-15 इतना खास क्यों है? और यमन की इस जंग में इसकी भूमिका कितनी अहम है? चलिए जानते हैं.
F-15E फाइटर जेट की खासियतें
- मल्टीरोल फाइटर जेट: F-15E हवा में दुश्मन के विमान से लड़ने के साथ जमीन पर मौजूद ठिकानों पर भी हमला कर सकता है.
- भारी हथियार ले जाने की क्षमता: यह बड़ी मात्रा में बम और मिसाइलें लेकर उड़ सकता है. यही इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है.
- तेज रफ्तार: F-15 की अधिकतम रफ्तार करीब Mach 2.5 तक बताई जाती है.
- लंबी दूरी: इसके अलग-अलग वेरिएंट लंबी दूरी के मिशन के लिए बनाए गए हैं. अतिरिक्त ईंधन और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग से इसकी ऑपरेशनल रेंज और बढ़ सकती है.
- आधुनिक रडार: नए F-15 वेरिएंट में आधुनिक रडार और सेंसर लगे हैं. इससे दुश्मन के विमान और जमीन के टारगेट को पहचानने में मदद मिलती है.
F-15 की खासियत (AI Generated)
एक्सपर्ट ने बताई खासियत
एक्सपर्ट के मुताबिक, F-15 भले ही पुराना फाइटर जेट है, लेकिन आज भी काफी ताकतवर है. इस विमान ने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है.एक्सपर्ट बताते हैं कि F-15 की सबसे बड़ी खासियत इसकी हथियार ले जाने की क्षमता है. यह एक बार में काफी ज्यादा हथियार लेकर उड़ सकता है. इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे ज्यादा हथियार ले जाने वाले लड़ाकू विमानों में गिना जाता है.
हूती भी कर रहे पलटवार
दूसरी तरफ हूती भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे. उनके हमलों में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. सऊदी अरब के एयरपोर्ट, सैन्य ठिकाने और दूसरी अहम जगहें उनके निशाने पर रही हैं. ऐसे में यमन का संघर्ष अब सिर्फ जमीन पर चल रही लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट के बीच बड़ा एयर-वॉर भी बनता जा रहा है.