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पाकिस्तान के आसमान में जब भारत के फॉक्सबैट ने उड़ान भरी तो पड़ोसी मुल्क में दहशत फैल गई थी. यह भारत का एक टोही मिशन था. इस्लामाबाद के आसमान में सुपरसोनिक स्पीड से उड़ने वाला ये मिग-25, दुनिया के सबसे तेज विमानों में से एक था. जो 2006 तक IAF में तैनात रहा.
मिग-25 भारत का टोही विमान था. (AI की मदद से तैयार प्रतीकात्मक इमेज )
इस्लामाबाद में अचानक दहशत फैल गई. लोगों को लगा कि धमाके हो रहे हैं. पाकिस्तान के कई शहरों में डर का माहौल था. ये दहशत तब और बढ़ गई जब कुछ घरों की खिड़कियां टूट गईं. हालांकि बाद में ये दावा किया गया कि खिड़कियां टूटी नहीं बल्कि हिल गईं थीं. असल में ये धमाका नहीं भारत के उस फॉक्सबैट का कमाल था जो धड़धडाते हुए पाकिस्तान की सीमा में घुस गया था. जब तक पाकिस्तान संभला और एयरफोर्स एक्टिव हुई तब तक भारत का मिशन पूरा हो चुका था.
पाकिस्तान की सीमा को चीरने वाला फॉक्सबैट एक जासूसी विमान था. इसे मिग-25 के नाम से जाना जाता है. इसकी अधिकतम गति मैक-3 थी, यानी आवाज से भी 3 गुना ज्यादा तेज. इसीलिए NATO ने इसे फॉक्सबैट नाम दिया था. सोवियत संघ द्वारा निर्मित यह सुपरसोनिक इंटरस्पेटर और टोही विमान दुनिया के सबसे तेज सैन्य विमानों में से था. जब सैटेलाइट नहीं हुआ करते थे, तब सीमा और सीमा पार नजर रखने के लिए इस विमान का प्रयोग किया जाता था. भारत के पास ऐसे 10 विमान थे.
इस्लामाबाद में क्या हुआ था उस दिन?
भारत का ये टोही विमान 10 मई 1997 को सीमा पार कर पाकिस्तान में दाखिल हो गया था. हाल ही में NDTV के एक पॉडकास्ट में विंग कमांडर (रिटायर्ड) प्रदीप जसवंत ने कहा कि जिस समय ये घटना हुई उस समय विमान तकरीबन 65617 फीट यानी तकरीबन 20 किलोमीटर ऊंचाई पर 2.4 मैक गति से उड़ रहा था. यानी तकरीबन 2550 किमी प्रति घंटा. धमाकों की जैसी आवाज इसकी स्पीड की वजह से थीं.
टोही विमान पाकिस्तान में संवेदनशील और बुनियादी ढांचा स्थलों की फिल्मिंग करने के लिए गया था. बातचीत में उन्होंने बताया कि ये मनगढ़ंत बात है कि विमान ने पाकिस्तान को नीचा दिखाने के लिए सुपरसोनिक स्पीड पकड़ी थी. 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर विमान सबसोनिक होना यानी 1200 किमी प्रति घंटा से कम की रफ्तार पर आना मुश्किल है. ऐसा होने पर विमान गिर जाएगा.
PAK ने फाल्कन भेजा, तब तक दूर जा चुका था फॉक्सबैट
पाकिस्तान कुछ देर में ये जान चुका था कि भारतीय मिग-25 सीमा में घुस चुका है. बाद में जानकारी मिली कि पाकिस्तानी वायुसेना ने F-16 फाइटिंग फाल्कन विमान भेजे थे, लेकिन वे फाइटर जेट फॉक्सबैट के पास जब तक पहुंचते, तब तक वह गायब हो चुका था. असल में भारत के मिग-25 विमानों की यही कहानी थी. चाहे पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र हो चीन का हवाई क्षेत्र. यह विमान इतनी तेज होते थे कि किसी के कुछ भी प्रतिक्रिया करने से पहले ही बहुत दूर जा चुके होते थे.
चाहकर भी कुछ न बिगाड़ पाता पाकिस्तान
फॉक्सबैट दुनिया के सबसे तेज विमानों में शामिल था. इस्लामाबाद के ऊपर ये तकरीबन 20 किलोमीटर ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था. यानी उस दौर में यह पाकिस्तान के पास सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की सीमा से ऊपर था. हो हर मिनट तकरीबन 40 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा था. ऐसे में अगर फॉक्सबैट पर अटैक करना होता तो पाकिस्तान को आमने-सामने कॉम्बैट करना होता. उसने में एक हल्के से मोड़ से किसी भी हमले को मात दी जा सकती थी. विंग कमांडर ठाकुर के मुताबिक सिर्फ पांच डिग्री बदलाव ही पूरी स्थिति को बिगाड़ सकता था.
टोही विमान थे फॉक्सबैट
भारतीय वायुसेना के मिग-25 विमानों का काम सिर्फ टोह लेना था. यह पाकिस्तान-चीन और अन्य क्षेत्रों की फिल्म बनाता था. इसके लिए प्लेन के आगे के हिस्से में पांच कैमरे होते थे. यह 100 किमी चौड़ी पट्टी तक की तस्वीर लेते थे. हालांकि जब भी मिग-25 विमान किसी मिशन पर जाते थे तो मिशन बहुत ही सीक्रेट रखे जाते थे. असल में पायलट को भी ये नहीं बताया जाता है कि वह किस मिशन पर जाने वाला है. न ही कभी फोन पर आदेश आते थे. जब ये विमान किसी मिशन पर जाता था तो अन्य एयरबेस को भी इसके लिए तैयार रखा जाता था, कि अगर विमान वहां लौटे तो तैयारी पूरी हो.
81 में हुए थे कमीशन, 25 साल तक की सेवा
मिग-25 को 1960 में विकसित किया गया था. 1970 में यह सेवा में आया. भारतीय वायुसेना में यह विमान 17 अगस्त 1981 को कमीशन हुआ था, जिसे गरुड़ भी कहा जाता था. इनकी तैनाती बरेली एयरबेस पर की गई थी. जो पूरी तरह से जासूसी और टोही टॉप सीक्रेट मिशनों को अंजाम देता था. 25 साल लगातार सेवा के बाद 2006 में इसे रिटायर कर दिया गया था.