वर्ल्ड कप में सबसे छोटे स्कोर पर आउट होने वाली 5 टीमें… 23 साल से कायम है विश्व कीर्तिमान

वर्ल्ड कप में सबसे छोटे स्कोर पर आउट होने वाली 5 टीमें… 23 साल से कायम है विश्व कीर्तिमान


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5 Teams Lowest totals in Cricket World Cup: क्रिकेट वर्ल्ड कप के इतिहास में कई बार दुनिया की मजबूत टीमें भी ताश के पत्तों की तरह बिगर गई हैं और स्कोरबोर्ड पर न्यूनतम स्कोर दर्ज हुए हैं. 23 साल पहले पार्ल में श्रीलंका के खिलाफ कनाडा का टोटल आज भी सबसे कम स्कोर के रूप में दर्ज है. इसके अलावा मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ कनाडा और पोटचेफस्ट्रूम में ऑस्ट्रेलिया के सामने नामीबिया की टीमें 50 रन के भीतर सिमट गईं. वानखेड़े में भारत के खिलाफ श्रीलंका का स्कोर और मीरपुर में वेस्टइंडीज के खिलाफ बांग्लादेश का सस्ते में ढेर होना इस बात की गवाही देता है कि खेल के सबसे बड़े मंच पर दबाव कितना बड़ा कारक होता है.

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वनडे वर्ल्ड कप में सबसे कम स्कोर पर आउट होने वाली 5 टीमें.

नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर हमेशा चौकों-छक्कों और रनों की बरसात नहीं होती. कई बार ऐसा भी वक्त आता है जब दुनिया की सबसे मजबूत टीमें भी घुटने टेक देती हैं और स्कोरबोर्ड पर ऐसे आंकड़े दर्ज हो जाते हैं जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अंकित हो जाते हैं. क्रिकेट वर्ल्ड कप का इतिहास ऐसे ही कई रोमांचक, हैरान करने वाले और कभी न भूलने वाले पलों से भरा पड़ा है. जब भी वर्ल्ड कप के सबसे न्यूनतम स्कोर की बात होती है, तो कुछ ऐसी पारियां याद आती हैं जिन्होंने फैंस को हैरान कर दिया था. वर्ल्ड कप में सबसे कम स्कोर पर ऑलआउट होने वाली 5 टीमों के बारे में जानते हैं.

दक्षिण अफ्रीका के पार्ल के मैदान पर 19 फरवरी 2003 में कनाडा की टीम श्रीलंका के सामने उतरी थी. कनाडा के लिए यह मुकाबला किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ.श्रीलंकाई गेंदबाजों के आगे कनाडा का कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं सका और पूरी टीम महज 36 रनों पर ढेर हो गई. यह वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे न्यूनतम स्कोर बन गया. पारी सिर्फ 18.4 ओवर तक ही चल पाई और रन रेट महज 1.92 का रहा. श्रीलंका ने इस छोटे से लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया, लेकिन कनाडा का यह स्कोर विश्व कप के इतिहास में एक अनचाहा रिकॉर्ड बन गया.

मैनचेस्टर में कनाडा का खराब प्रदर्शन
कनाडा के खराब प्रदर्शन का एक और अध्याय 13 जून 1979 को मैनचेस्टर में लिखा गया था. इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए कनाडा की टीम एक बार फिर पूरी तरह बिखर गई. इस मैच में कनाडाई टीम 40.3 ओवरों में महज 45 रन ही बना सकी. उस दौर में सीमित ओवरों के क्रिकेट में गेंदबाजी का स्तर और अनुशासन अलग हुआ करता था, लेकिन कनाडा की यह पारी बेहद निराशाजनक रही. इंग्लैंड ने इस मुकाबले में अपनी पकड़ मजबूत रखी और मैच आसानी से अपने नाम कर लिया.

नामीबिया का ऑस्ट्रेलिया के सामने समर्पण
इसी आंकड़े की बराबरी एक और एसोसिएट टीम नामीबिया ने 27 फरवरी 2003 को पोटचेफस्ट्रूम में की. ऑस्ट्रेलिया जैसी अजेय और खूंखार गेंदबाजी आक्रमण के सामने नामीबिया के बल्लेबाज पूरी तरह लाचार नजर आए. एडम गिलक्रिस्ट और ग्लेन मैक्ग्रा की आग उगलती गेंदों के आगे नामीबिया की पारी महज 14 ओवरों में ही 45 रनों पर सिमट गई. गिलक्रिस्ट ने विकेट के पीछे जहां छह शानदार कैच लपके वहीं मैक्ग्रा ने सात विकेट चटकाए. हालांकि ओवर कम खेलने की वजह से उनका रन रेट 3.21 जरूर रहा, लेकिन परिणाम वही पुराना रहा एक बड़ी हार. ऑस्ट्रेलिया ने इस लक्ष्य को बिना किसी परेशानी के पार कर लिया.

वानखेड़े में श्रीलंका का ढह जाना
विश्व कप के सबसे न्यूनतम स्कोर की लिस्ट में एक ऐसा नाम भी शामिल है जिसे देखकर आज भी क्रिकेट जगत हैरान रह जाता है और वह नाम है श्रीलंका. जी हां, दो बार की विश्व चैंपियन श्रीलंका की टीम 2 नवंबर 2023 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ खेलते हुए मात्र 55 रनों पर ऑल आउट हो गई थी. भारतीय गेंदबाजों ने घरेलू मैदान पर कहर बरपाते हुए श्रीलंकाई बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने का कोई मौका नहीं दिया. यह पारी सिर्फ 19.4 ओवर चली. वानखेड़े की फ्लडलाइट्स में भारत की तेज गेंदबाजी का जादू ऐसा चला कि श्रीलंका का बल्लेबाजी क्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया. यह मुकाबला विश्व कप के सबसे बड़े उलटफेरों और न्यूनतम स्कोर में एक मॉडर्न उदाहरण बन गया.

मीरपुर में बांग्लादेश का बिखरना
ऐसी ही एक और दर्दनाक दास्तान बांग्लादेश की है. 4 मार्च 2011 को मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रही बांग्लादेशी टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ बुरी तरह लड़खड़ा गई. कैरेबियन गेंदबाजों के सामने बांग्लादेश के बल्लेबाज दबाव नहीं झेल पाए और पूरी टीम 18.5 ओवरों में सिर्फ 58 रनों पर ढेर हो गई. घरेलू मैदान पर अपनी ही जनता के सामने यह स्कोर किसी सदमे से कम नहीं था. वेस्टइंडीज ने इस मामूली स्कोर को पलक झपकते ही हासिल कर लिया और बांग्लादेश के लिए यह विश्व कप का सबसे काला दिन बन गया.



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