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Khedi Mahmudabad News: किसानों को खाद वितरण में राहत देने के लिए शुरू किया गया ई-टोकन सिस्टम अब परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है. पोर्टल खुलने के कुछ ही मिनट बाद टोकन बुक नहीं हो रहे, जिससे किसानों को तीन-तीन दिन तक ऑनलाइन केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. टोकन मिलने के बाद भी गोदामों पर डीएपी उपलब्ध नहीं होने से किसान खाली हाथ लौट रहे हैं.
किसानों के लिए ई-टोकन सिस्टम बना परेशानी
खेड़ी महमूदबाद. किसानों को राहत देने के नाम पर लागू किया ई-टोकन सिस्टम अब किसानों के लिए परेशानी बनता नजर आ रहा है. डिजिटल व्यवस्था के फेर में फंसा किसान एक-एक बोरी खाद के लिए तरस रहा है. आलम यह है कि गोदामों में डीएपी भरा हुआ है लेकिन किसानों को नहीं मिल रहा रहा है. तीन दिनों की जद्दोजहद के बाद ही किसान ई-टोकन बुक करा पा रहा है. वहीं गोदाम पर लाइन में लगने के बाद किसानों को यूरिया दिया जा रहा, जबकि रबी बोवनी की पहली जरूरत डीएपी है जो नहीं मिल रहा है. जिले में रबी सीजन का कुल रकबा 1 लाख 96 हजार हेक्टेयर है और डीएपी की कुल डिमांड 25 हजार एमटी है और उपलब्ध 7 हजार एमटी है, वहीं यूरिया की डिमांड 50 हजार एमटी है और उपलब्ध 25 हजार एमटी है.
किसानों को लाइन की झंझट से मुक्ति दिलाने और आसान वितरण सुविधा के लिए शुरू की खाद की ई-टोकन प्रणाली अब किसानों की परेशानी का सबब बन गई है. पोर्टल खुलने के बाद 10 मिनट बाद ही ई टोकन बुक नहीं हो रहे हैं, जिसके कारण किसानों को डीएपी और यूरिया नहीं मिल पा रहा है. कई किसान खाली हाथ ऑनलाइन केंद्रों से लौट रहे हैं.
किसानों की परेशानी को बढ़ा रही व्यवस्था
विपणन संघ के गोदाम पर लाइन में लगे किसान मयूर ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से ई-टोकन के लिए परेशान थे. ई-टोकन बुक हुआ तो हरदा में विपणन संघ के गोदाम पर यूरिया और डीएपी लेने आए. यहा उन्हें डीएपी नहीं मिला. ई-टोकन व्यवस्था ने किसानों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है.
क्या है ई-टोकन
मध्य प्रदेश में किसान को खाद लेने से पहले ऑनलाइन टोकन बुक करना होता है. यह व्यवस्था ई-विकास पोर्टल के जरिए चलती है. 2026 में इस व्यवस्था को लेकर किसानों का विरोध भी हुआ था और जुलाई में सरकार ने इसे फिलहाल स्थगित कर उच्चस्तरीय समिति से समीक्षा कराने का फैसला किया था.