खेत में गिर गई है धान की फसल? अभी भी है टाइम, ये उपाय बचा सकते हैं आपकी मेहनत
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Paddy Crop Farming Tips: कृषि विशेषज्ञ अवनीश पटेल ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि विंध्य क्षेत्र में भारी बारिश की वजह से कई स्थानों पर धान की फसल गिरने की दिक्कत देखने को मिल रही है. उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि इस समय फसल की मजबूती पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए. खेतों में संतुलित खाद, जरूरी पोषक तत्व और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था रखना जरूरी है.
सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में धान की फसल इस समय गोभ अवस्था में है और बालियों में दाना भरना शुरू हो गया है. तेज हवा और बारिश के कारण पौधों के खेत में गिरने की समस्या बढ़ रही है, जिसे लॉजिंग कहा जाता है. इस महत्वपूर्ण समय में फसल की सुरक्षा और सही देखभाल को लेकर कृषि विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं. दरअसल विंध्य क्षेत्र में धान की फसल इस समय बहुत ही महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है. फसल में दाना भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन इसी दौरान अत्यधिक बारिश और तेज हवाओं के कारण धान के पौधे खेतों में गिरने की समस्या सामने आ रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दाना भरने के साथ पौधे का वजन बढ़ जाता है और यदि जड़ या तना कमजोर हो तो पौधा टिक नहीं पाता.
कृषि विशेषज्ञ अवनीश पटेल ने लोकल 18 से कहा कि विंध्य क्षेत्र में अत्यधिक बारिश की वजह से कई स्थानों पर धान की फसल गिरने की दिक्कत आ रही है. उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि इस समय फसल की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. खेतों में संतुलित खाद, जरूरी पोषक तत्व और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था रखना आवश्यक है.
कमजोर जड़ों का असर
सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ शैलेंद्र गौतम ने बताया कि पौधे की मजबूती उसकी जड़ों पर निर्भर करती है. पोटाश, फास्फोरस या कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की कमी से जड़ और तना कमजोर रह जाते हैं. बाहर से हरा दिखने के बावजूद जमीन के अंदर पौधे की पकड़ कमजोर हो सकती है, जिससे तेज हवा या बारिश का दबाव सहन करना मुश्किल हो जाता है. फसल गिरने से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होती है और नमी रहने पर दाने काले पड़ सकते हैं.
उर्वरकों और पानी का प्रबंधन
डॉ गौतम के अनुसार, फास्फोरस जड़ों के विकास में सहायक है और पोटाश तने को मजबूती देता है. किसान मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोटाश, फास्फेट और जिंक का संतुलित इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसके लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है. इसके अलावा गोभ अवस्था में खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा न होने देने की बात कही गई है ताकि कमजोर पौधों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.