बाबा श्याम के दरबार में पहुंचे ईशांत शर्मा, परिवार संग लिया आशीर्वाद
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Ishant Sharma Khatushyam Ji Visit:भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज रहे ईशांत शर्मा सपरिवार खाटूश्यामजी पहुंचे और बाबा श्याम के दरबार में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया. मंदिर पहुंचने पर श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से उनका स्वागत किया गया. कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने ईशांत शर्मा का अभिनंदन करते हुए उन्हें बाबा श्याम का पवित्र निशान और श्याम दुपट्टा भेंट किया. इसके बाद ईशांत शर्मा ने परिवार के साथ बाबा के दिव्य दर्शन किए और देश व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. क्रिकेटर को मंदिर में देखकर श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता नजर आई. ईशांत शर्मा लंबे समय तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं और टेस्ट क्रिकेट में अपनी तेज गेंदबाजी के लिए खास पहचान बना चुके हैं. खाटूश्यामजी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. राजनीति, खेल, धर्म और फिल्म जगत की हस्तियां भी समय-समय पर बाबा श्याम के दरबार में दर्शन करने पहुंचती हैं.
सीकर. विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है. आम श्रद्धालुओं के साथ राजनीति, धर्म, खेल और फिल्म जगत से जुड़ी हस्तियां भी समय-समय पर बाबा श्याम के दरबार में पहुंचकर दर्शन करते हैं. इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज रहे ईशांत शर्मा सपरिवार खाटूधाम पहुंचे. यहां उन्होंने बाबा श्याम के दरबार में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और बाबा का आशीर्वाद लिया.
खाटूश्यामजी मंदिर पहुंचने पर श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से ईशांत शर्मा का स्वागत किया गया. मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने उनका अभिनंदन करते हुए बाबा श्याम का पवित्र निशान भेंट किया. इसके साथ ही उन्हें श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. मंदिर कमेटी की ओर से ईशांत शर्मा को बाबा श्याम का आशीर्वाद और प्रतीक चिह्न भी भेंट किया गया. इसके बाद ईशांत शर्मा सपरिवार बाबा श्याम के दरबार में पहुंचे. उन्होंने बाबा श्याम के दिव्य दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर देश और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में भी क्रिकेटर ईशांत शर्मा को देखने को लेकर उत्सुकता नजर आई.
सपरिवार खाटूश्यामजी के दरबार में पहुंचे थे इशांत शर्मा
जानिए कौन हैं बाबा श्याम?
बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में उतरने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे शीश दान मांगा. बर्बरीक ने बिना झिझक भगवान कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया. इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे हारे हुए लोगों के सहारा बनेंगे. तभी से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के नाम से पूजे जाते हैं.