भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्ते अब सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेंगे. दोनों देश इन्वेस्टमेंट, एक्सपोर्ट, डिफेंस, न्यूक्लियर एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच बातचीत में कई अहम फैसले हुए हैं. भारत फोकस स्विट्जरलैंड में भारतीय सामान की बिक्री बढ़ाना और वहां से ज्यादा निवेश भारत लाना. इस पर बड़े समझौते हुए हैं.
समझौतों के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि आज हुए माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट और यंग प्रोफेशनल्स एग्रीमेंट से, भारत के स्टूडेंट, रिसर्चर्स, प्रोफेशनल्स और युवाओं के लिए स्विटजरलैंड में कई नए अवसर खुलेंगे. हमने भारत के एक्सपोर्ट का स्विट्जरलैंड में मार्केट एक्सेस बढ़ाने, और दोनों देशों के बीच इनवेस्टमेंट को और सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. इससे भारत के एग्रीकल्चर, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग गुड्स का स्विट्जरलैंड में निर्यात बढ़ेगा. साथ-साथ, भारत के बायोटेक, लाइफ साइंसेज़, बैंकिंग, इन्श्योरेन्स, फूड प्रोसेसिंग और सस्टे-निबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हम नए स्विस इनवेस्टमेंट को आकर्षित करेंगे.
10 पॉइंट में जानिए क्या-क्या हुई डील
1. स्विट्जरलैंड में भारतीय सामान ज्यादा बिकेगा
भारत स्विट्जरलैंड में अपने उत्पादों की मार्केट एक्सेस बढ़ाने की कोशिश करेगा. इसके लिए दोनों देशों ने कई फैसले लिए हैं. इसका सीधा फायदा भारतीय एक्सपोर्टर्स को मिल सकता है. खास तौर पर कृषि उत्पाद, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सामान को स्विस बाजार में ज्यादा जगह दिलाने पर जोर है. यानी भारत की कोशिश है कि यूरोप के इस बड़े और अमीर बाजार में भारतीय कंपनियों की बिक्री बढ़े.
2. भारत में आएगा 100 अरब डॉलर का निवेश
भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन यानी EFTA के बीच ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट लागू हो चुका है. EFTA में स्विट्जरलैंड के अलावा नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं. इस समझौते के जरिए भारत अगले 15 साल में 100 अरब डॉलर का निवेश लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. सरकार को उम्मीद है कि इससे करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. यानी मकसद सिर्फ विदेशी पैसा लाना नहीं है. इसके साथ रोजगार और कारोबार भी बढ़ाना है.
3. स्विस कंपनियों के लिए भारत में नए सेक्टर खुलेंगे
भारत स्विट्जरलैंड से नए निवेश को आकर्षित करना चाहता है. इसके लिए कई सेक्टर चिन्हित किए गए हैं. इनमें बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबिलिटी शामिल हैं. भारत चाहता है कि स्विस कंपनियां यहां सिर्फ सामान न बेचें. वे भारत में प्लांट लगाएं. रिसर्च करें. टेक्नोलॉजी लाएं. स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करें.
4. 330 से ज्यादा स्विस कंपनियां पहले से भारत में
भारत के लिए स्विट्जरलैंड कोई नया कारोबारी पार्टनर नहीं है. देश में 330 से ज्यादा स्विस कंपनियां पहले से काम कर रही हैं.इनका कारोबार इंजीनियरिंग, सर्विसेज, प्रिसीजन इंस्ट्रूमेंट्स, केमिकल्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में है. अब भारत इन कंपनियों से और ज्यादा निवेश की उम्मीद कर रहा है.खास बात यह है कि भारतीय कंपनियां भी स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं. IT, फार्मा और मशीनरी में भारतीय कंपनियां कारोबार कर रही हैं.
5. भारत के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में स्विस कंपनियां
इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस साझेदारी का बड़ा हिस्सा होगा.भारत ने स्विस कंपनियों को देश में बड़े पैमाने पर निवेश करने का न्योता दिया है. खास तौर पर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाया जाएगा. भारत में पहले से स्विस कंपनियों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल हो रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी रोपवे, जेवर एयरपोर्ट और पहाड़ी इलाकों में रेलवे-टनल प्रोजेक्ट्स का उदाहरण दिया. अब ऐसे सहयोग का दायरा और बढ़ सकता है.
6. डिफेंस में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और स्विट्जरलैंड रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाएंगे. दोनों देशों ने मिलिट्री एक्सचेंज और डिफेंस प्रोडक्शन में नई संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई है. भारत लगातार अपनी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है. ऐसे में स्विट्जरलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को साथ लाने की कोशिश होगी.
7. न्यूक्लियर एनर्जी में नई साझेदारी
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग बढ़ेगा. भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूक्लियर पावर पर जोर दे रहा है. ऐसे में स्विट्जरलैंड के साथ टेक्नोलॉजी, रिसर्च और विशेषज्ञता के स्तर पर सहयोग अहम हो सकता है.
8. हेल्थ, क्लीन एनर्जी और स्पेस में साथ रिसर्च
भारत और स्विट्जरलैंड नए संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट भी शुरू करेंगे. फोकस तीन बड़े क्षेत्रों पर रहेगा. हेल्थ, क्लीन एनर्जी और स्पेस. दोनों देशों के वैज्ञानिक और रिसर्च संस्थान मिलकर काम करेंगे. इससे नई तकनीक और नए प्रोजेक्ट विकसित करने का रास्ता खुल सकता है.
9. भारतीय युवाओं के लिए स्विट्जरलैंड में अवसर
भारत और स्विट्जरलैंड ने माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए हैं. इसके साथ यंग प्रोफेशनल्स एग्रीमेंट भी हुआ है. इसका फायदा भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं, प्रोफेशनल्स और युवाओं को मिल सकता है. दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही और पेशेवर अवसरों को आसान बनाने की कोशिश होगी.
10. India-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट पर नजर
अब अगली नजर India-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट पर नजर पर है.यह बुधवार को होगा. यहां भारत की कोशिश होगी कि TEPA के तहत किए गए वादों को जमीन पर उतारा जाए. यानी सिर्फ समझौते नहीं. बल्कि वास्तविक निवेश, नए कारोबार और रोजगार. भारत की रणनीति काफी साफ है. स्विट्जरलैंड में भारतीय एक्सपोर्ट बढ़ाना है. स्विस कंपनियों का निवेश भारत में लाना है.नई टेक्नोलॉजी हासिल करनी है.इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस में सहयोग बढ़ाना है. और इसके साथ भारतीय युवाओं के लिए स्विट्जरलैंड में नए अवसर खोलने हैं.