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Closing Auction Session : एफएंडओ ट्रेडर्स के लिए जी का जंजाल बना क्लोजिग ऑक्शन सेशन (CAS) जल्द बंद हो सकता है. सेबी सीएएस को हमेशा के लिए तो नहीं पर एक साल के लिए त्याग सकता है. सीएएस की वजह से ट्रेडिंग के अंतिम क्षणों में हो रहे भारी उतार-चढ़ाव ने ट्रेडर्स को सकते में डाल दिया है.
नए सिस्टम में फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है.
नई दिल्ली. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस की गणना के लिए हाल ही में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) सिस्टम को कम से कम एक साल के लिए बंद कर सकता है. सीएएस के आने के बाद एक्सपायरी के दिनों में डेरिवेटिव्स की कीमतों में अत्यधिक और अनियंत्रित उतार-चढ़ाव (volatility) को देखते हुए सेबी सीएएस को बंद करने का फैसला ले सकता है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दो सूत्रों के हवाले ये यह जानकारी दी गई है. बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव की वजह से ट्रेडर्स को भारी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है. सीएएस को लेकर सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिस पर करीब 20,000 सुझाव अब तक नियामक को प्राप्त हुए हैं. सेबी इन संशोधित नियमों को इसी महीने के अंत तक नोटिफाई कर सकता है.
सेबी ने इसी साल अगस्त में उन शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) व्यवस्था लागू की थी, जो F&O ट्रेडिंग का हिस्सा हैं. इसके तहत कारोबारी दिन के अंत में एक छोटी ऑक्शन के जरिए क्लोजिंग प्राइस तय की जाती है. अमेरिकी और हांगकांग के बाजारों की तर्ज पर शुरू की गई इस व्यवस्था का मकसद बेहतर प्राइस डिस्कवरी था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका उल्टा असर दिखा. एक्सपायरी वाले दिन आखिरी पलों में कीमतों में अचानक तेज उतार-चढ़ाव आने लगे. इससे छोटे और बड़े ट्रेडर्स के सौदे अनचाहे स्तरों पर कटने लगे.
अब 30 मिनट का VWAP बनेगा डेरिवेटिव्स प्राइसिंग का आधार
एक सूत्र ने बताया कि क्लोजिंग ऑक्शन को स्थगित कर सेबी डेरिवेटिव्स की प्राइसिंग तय करने के लिए पुराने फॉर्मूले पर लौट सकता है. नए प्रस्ताव के तहत, कारोबार के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) को सेटलमेंट का आधार बनाया जाएगा. हालांकि, कम लिक्विडिटी वाले कैश मार्केट में अंडरलाइंग शेयरों के लिए दिन का अंतिम भाव निकालने हेतु क्लोजिंग ऑक्शन का सीमित इस्तेमाल जारी रह सकता है.
इंटरनेशनल मार्केट्स के साथ बढ़ेगा तालमेल
30 मिनट के VWAP मॉडल पर लौटने से भारतीय बाजार अमेरिका और यूरोपीय बाजारों की बेस्ट प्रैक्टिसेज के अधिक करीब आ जाएगा. वैश्विक स्तर पर भी डेरिवेटिव्स का सेटलमेंट केवल एक सिंगल क्लोजिंग ऑक्शन के आधार पर करने के बजाय एक तय कारोबारी अवधि के दौरान वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस से तय किया जाता है. इससे प्राइस मैनिपुलेशन का रिस्क बहुत कम हो जाता है.