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UAE Co-Pilot News: फ्लाई दुबई के को-पायलट हमाम अल-हम्मामी को लेकर एक नई खबर आई है. रिपोर्ट के मुताबिक उसे मौत की सजा दी जा सकती है. 29 साल के को-पायलट ने पहले अपने पायलट पर हमला किया था. खास बात यह भी है कि वह प्लेन को इजरायल में गिराना चाहता था. उसने जानबूझकर इजरायल जाने वाली एयरलाइन में नौकरी हासिल की थी.
फ्लाई दुबई प्लेन में हमला करने वाला को-पायलट हमाम अल-हम्मामी.
Fly Dubai Co-Pilot: फ्लाईदुबई के पैसेंजर प्लेन में पायलट पर हमले की जांच जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ही एजेंसियों के लिए चौंकाने वाले खउलासे हो रहे हैं. ओमान का रहने वाला 29 साल का पायलट हमाम अल-हम्मामी ने प्लेन में कुल्हाड़ी से पायलट स्मित मच्छर पर हमला किया था. पब्लिक ने जब प्लेन को क्रैश होने से बचा लिया तब वह कह रहा था कि उसे मार दो. रिपोर्ट के मुताबिक UAE उसे मौत की सजा दे सकता है. जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, अल-हम्मामी ने खुद बताया कि विमान को बेन गुरियन एयरपोर्ट से टकराना उसका ‘सपना’ था. उसने इजरायल जाने वाली एयरलाइनों के बारे में जानकारी जुटाई और इसी वजह से फ्लाईदुबई में नौकरी हासिल करने की कोशिश की. अगर UAE में उसे सच में मौत की सजा होती है तो कानून के मुताबिक उसे फायरिंग स्क्वाड के जरिए मारा जाएगा. यहां फांसी या सऊदी अरब की तरह पब्लिक में गला काटने का रिवाज नहीं है. 9 लोग एक कमरे में दोषी को गोली से मारते हैं.
प्लेन क्रैश कराने के लिए ही नौकरी जॉइन की
रिपोर्ट के मुताबिक, अल-हम्मामी करीब 8 महीने से फ्लाईदुबई के साथ काम कर रहा था. जांचकर्ताओं के मुताबिक उसने बताया कि उसने इजरायल जाने वाली एयरलाइनों की जानकारी जुटाई थी. उसका मकसद ऐसी एयरलाइन में नौकरी हासिल करना था, जिससे वह इजरायल जाने वाली फ्लाइट तक पहुंच सके. कथित तौर पर उसने बताया कि नौकरी मिलने से पहले ही उसने इस पूरे ऑपरेशन की प्लानिंग कर ली थी. जांचकर्ताओं को शक है कि वह किसी आतंकी संगठन के आदेश पर नहीं, बल्कि अकेले ही यह योजना बना रहा था. हालांकि इस पहलू की जांच अभी जारी है.
जुलाई में भी प्लेन क्रैश कराने का इरादा था?
रिपोर्ट के मुताबिक, अल-हम्मामी जुलाई में ही विमान क्रैश कराने की योजना बना चुका था. लेकिन उस समय उसने अपना इरादा बदल दिया क्योंकि वह एक क्रू मेंबर के करीब था. इसके बावजूद विमान को इजरायल में गिराने की योजना से वह पीछे नहीं हटा. जांच में यह भी सामने आया है कि वह हमला इतनी तेजी से करना चाहता था कि इजरायली सेना को लड़ाकू विमान हवा में भेजने का मौका ही न मिले.
इजरायल जाने वाली फ्लाइट कैसे मिली?
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि अल-हम्मामी को इजरायल जाने वाली फ्लाइट में को-पायलट के तौर पर काम करने की मंजूरी कैसे मिली. दरअसल इजरायल और ओमान के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं. इसी वजह से फ्लाइट के पायलट और यात्रियों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. लेकिन जांच से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि यह संभव है कि हमाम के पास दोहरी नागरिकता हो.
UAE में कैसे दी जाती है मौत की सजा?
यूएई में मौत की सजा का कानूनी तरीका फायरिंग स्क्वाड है. फांसी या सार्वजनिक तौर पर सजा यहां नहीं दी जाती. मौत की सजा पर अमल से पहले अदालतों में अपील की प्रक्रिया पूरी होती है और इसके बाद अमीरात के शासक या संघीय मामलों में यूएई के राष्ट्रपति की लिखित मंजूरी जरूरी होती है. इसके बाद जेल के एक हिस्से में दोषी को ले जाया जाता है.रिपोर्ट्स के मुताबिक फायरिंग स्क्वाड में आम तौर पर 9 लोग होते हैं. इन सभी को बंदूक दी जाती है. ज्यादातर बंदूकों में असली गोलियां होती हैं, लेकिन कम से कम 1 बंदूक या उससे ज्यादा ऐसी होती हैं, जिसमें गोली नहीं होती. ऐसा इसलिए ताकि जब एकसाथ गोली चले तो किसी को यह न पता चल सके कि आखिर वह गोलियां किसने चलाई, जिससे मौत की सजा मिली. हत्या के मामलों में पीड़ित परिवार के पास सजा की मांग, माफी या ब्लड मनी लेकर मामला खत्म करने का विकल्प भी हो सकता है. हालांकि मौत की सजा सुनाया जाना और उस पर अमल होना अलग-अलग बातें हैं.