9 जीवों से बनी प्रतिमा नवरात्रि में होंगी विराजमान, अर्जुन का घमंड तोड़ने श्री हरि ने लिया था विचित्र अवतार

9 जीवों से बनी प्रतिमा नवरात्रि में होंगी विराजमान, अर्जुन का घमंड तोड़ने श्री हरि ने लिया था विचित्र अवतार


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Navratri 2026: सागर में 9 जीवों से बनी नवगुंजर प्रतिमा नवरात्रि में स्थापित की जाएगी. यह प्रतिमा भगवान नारायण के विचित्र नवगुंजर अवतार को दर्शाती है, जिसे अर्जुन का घमंड तोड़ने के लिए श्री हरि ने लिया था. इसका वर्णन उड़ीसा की लोककथाओं और महाभारत में मिलता है.

11 अक्टूबर से शारदेय नवरात्रि का त्योहार शुरू हो रहा है. इस नवरात्रि में माता की प्रतिमाओं को विराजमान कर पूजा अर्चना की जाती है. देशभर में बड़े ही धूमधाम के साथ दुर्गा उत्सव को मनाया जाता है. खासकर अलग-अलग समितियो के द्वारा श्रद्धालुओं को अपने दुर्गा पंडाल तक लाने के लिए आकर्षक झांकियां सजाई जाती है. इसके लिए वह मूर्तिकारों से महंगी-महंगी न्योछावर में प्रतिमाएं तैयार करवाते हैं. ऐसे ही भोपाल की समिति के द्वारा सागर में भी भगवान नारायण के नवगुंजर अवतार की आकर्षक दुर्लभ प्रतिमा सागर के मूर्तिकारों से तैयार करवाई गई है. जिसमें 9 जीवों के स्वरूप से मिलकर एक जीव को प्रतीकात्मक रूप से बनाया गया है.

श्रीहरि के इस विचित्र नवगुंजर अवतार का वर्णन उड़ीसा क्षेत्र की लोककथाओं और केवल उड़ीसा के महाभारत में ही मिलता है. माना जाता है कि इस ग्रन्थ की रचना 15वीं सदी में जन्में उड़ीसा के आदि कवि श्री सरला दास ने की है. सरला दास ने महाभारत के अलावा उड़िया बिलंका रामायण की भी रचना की है.

मूर्तिकार अंकित विश्वकर्मा बताते हैं कि श्री कृष्ण के इस विचित्र अवतार को मूर्ति का रूप देने में लगभग 10 महीने का समय लगा है. एक साल पहले इसका ऑर्डर बुक हो गया था. इस 9 जीवों से मिलकर बने नवगुंजर प्रतिमा की लंबाई 12 फीट ऊंचाई साढ़े 11 फीट और बजन 9 क्विंटल है. इसके साथ में मां दुर्गा की प्रतिमा अलग से है जिसके साथ ब्लैक जैक्वार है. यह भोपाल के बरखेड़ी फाटक के पास स्थापित की जानी है. जिसमें आगे दुर्गा प्रतिमा और पीछे बैकग्रांउड में नवगुंजर रहेंगे.

9 जीवों से मिलकर बना है नवगुंजर
नवगुंजर जिन 9 जीवों से मिलकर बना है उसमें सबसे ऊपर सर मुर्गे का है, फिर उसके नीचे गर्दन मयूर (मोर) का है. कूबड़ की बात करें तो वह नंदी का बना है. कमर शेर की हैं. पूंछ सर्प (सांप) की है. पैरों को लेकर जाने तो चारों पैर भी अलग अलग है जिसमें पिछला बांया पैर बाघ का है, पिछला दायां पैर अश्व (घोड़े) का है,
अगला बांया पैर गज (हाथी) का है. अगला दायां पैर (हाथ) श्री हरि विष्णु का है.

विचित्र नवगुंजर अवतार को लेकर जो लोक कथा है उसके अनुसार एक बार अर्जुन को अपनी शक्तियों पर बहुत घमंड हो गया था तब एक जगह उन्हें अचानक से विचित्र जीव दिखाई दिया जिसे देखकर वह भयभीत हो गए. इसके डर से अर्जुन ने अपना गांडीव उठाया और उस पर तीर चढ़ा लिया लेकिन अचानक उन्हें इस जीव में आगे का एक हाथ श्री हरि का दिखाई दिया जिसमें सुदर्शन चक्र था, इसके बाद अर्जुन समझ गए कि नारायण ही है, वह उनके चरणों में जाकर गिर गए और भगवान से माफी मांगी.



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