50 हजार लगाकर कमाए ₹1 लाख! मचान-मल्चिंग विधि से किसान अरुण ने बदली किस्मत
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Bokaro Agriculture Success Story: बोकारो के पेटरवार प्रखंड के भंगाट गांव के किसान अरुण महतो ने मचान और मल्चिंग विधि से झींगा (तोरई) की खेती कर एक लाख रुपये का मुनाफा कमाया है. 50 हजार की लागत से एक एकड़ में 50 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है, जिससे उनकी आमदनी में इजाफा हुआ है.
Agriculture Success Story: बोकारो जिले में पारंपरिक खेती के साथ किसान अब सब्जियों की उन्नत खेती से भी बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं. पेटरवार प्रखंड के भंगाट गांव के किसान अरुण महतो ने एक एकड़ जमीन पर मचान और मल्चिंग विधि से झींगा ( तोरई ) सब्जी की खेती कर मोटा मुनाफा कमा रहें हैं. Local18 से बातचीत में अरुण कुमार महतो ने बताया कि वह किसान परिवार से आते हैं. खेती के प्रति उन्हें अपने माता-पिता और दादा दादी से प्रेरणा मिली. इसके बाद उन्होंने खेती को ही अपना सहारा बनाया और अलग-अलग सब्जियों की खेती कर अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं.
30 से 35 दिन में तैयार हो जाती है फसल
आगे किसान अरुण ने बताया कि उन्होंने अगस्त महीने में एक एकड़ जमीन पर झींगा सब्जी की खेती शुरू की थी. मचान और मल्चिंग विधि का इस्तेमाल करने से पौधों को विकास अच्छी तरीके से होता है. खेत में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है. झींगा सब्जी की फसल करीब 30 से 35 दिनों में तोड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद लगभग डेढ़ महीने तक लगातार तोड़ाई कर किसान लगातार आमदनी कमा सकते.
एक एकड़ में करीब 50 क्विंटल उत्पादन
किसान के अनुसार एक एकड़ में झींगा की खेती करने में करीब 50 हजार रुपये की लागत आती है. अच्छी तरह फसल तैयार होने पर एक एकड़ से करीब 50 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. बाजार में पूरे साल झींगा सब्जी का औसत भाव करीब 30 रुपये प्रति किलो होता है. वहीं अगर 50 क्विंटल औसतन 30 रुपये प्रति किलो की दर से भी बिक्री होती है. किसान इससे करीब 1.50 लाख रुपये की सकल आमदनी हो सकती है. इसमें करीब 50 हजार रुपये लागत निकालने के बाद लगभग 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है.
पीलापन और पत्तियां मुड़ने की समस्या से रहें सावधान
आखिर में अरुण ने किसानों को सलाह दी है कि झींगा सब्जी कि फसल में कई बार पत्तियों में पीलापन और पत्तियां मुड़ने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. ऐसे में किसान को बिना जानकारी के किसी दवा का इस्तेमाल करने के बजाय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर उचित दवा का छिड़काव करना चाहिए. इससे फसल को रोग और कीटों से बचाने में मदद मिल सकती है. झींगा की फसल का उत्पादन भी बेहतर होता है.