यूरोप के दो बड़े देश युवाओं और जेन-Z के गुस्से से जल रहे हैं. लेकिन दोनों जगह गुस्से की वजह अलग है. फ्रांस में छात्र स्कूलों में शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ और खराब इमारतों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. जर्मनी में छात्र अनिवार्य मिलिट्री सर्विस दोबारा शुरू करने के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. फ्रांस में प्रदर्शन हिंसक होने के बाद सैकड़ों स्कूलों को सोमवार को बंद करना पड़ा है. जर्मनी में हजारों छात्र सड़कों पर उतर चुके हैं. दोनों घटनाएं ऐसे समय हो रही हैं, जब यूरोप में शिक्षा, सुरक्षा और सैन्य खर्च को लेकर बहस तेज है.
पहले फ्रांस की बात
फ्रांस में छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
छात्रों की मुख्य शिकायत स्कूलों की हालत को लेकर है. उनका कहना है कि कई स्कूलों में शिक्षक कम हैं, कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा छात्र हैं और इमारतें खराब हालत में हैं. पिछले हफ्ते शुरू हुआ आंदोलन पेरिस से निकलकर मॉंपीलिए, नांत और मार्सेय जैसे शहरों तक पहुंच गया.
प्रदर्शन इतना बड़ा कैसे हो गया?
हजारों छात्र सड़कों पर उतर चुके हैं. कई जगह छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई है. फ्रांस के न्याय मंत्री के मुताबिक शुक्रवार तक देश के 3,700 स्कूलों में से 735 किसी न किसी तरह के हिंसक प्रदर्शन से प्रभावित हुए थे.
सोमवार को स्कूल बंद क्यों रहे?
शिक्षा मंत्री एडुआर्ड जेफ्रे के मुताबिक करीब 400 से 500 स्कूलों में पढ़ाई पूरी या आंशिक रूप से रोकनी पड़ेगी. वजह है सुरक्षा. सरकार का कहना है कि कुछ स्कूलों में छात्रों और कर्मचारियों के लिए हालात सुरक्षित नहीं हैं.
कितने स्कूलों में तोड़फोड़ हुई है?
शिक्षा मंत्री के मुताबिक अब तक 24 स्कूलों में आगजनी या तोड़फोड़ हुई है. उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के 78 कर्मचारी घायल हुए हैं.
कितने लोग गिरफ्तार हुए?
शुक्रवार को अकेले 1,747 लोगों को गिरफ्तार किया गया. आंदोलन शुरू होने के बाद अब तक 5,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां होने की बात सामने आई है. इनमें करीब 85 फीसदी नाबालिग बताए गए हैं.
सरकार किसे जिम्मेदार मान रही है?
शिक्षा मंत्री का आरोप है कि कुछ अति-वामपंथी कार्यकर्ताओं ने छात्र आंदोलन में घुसकर उसे हिंसक बना दिया है. सरकार का कहना है कि इससे छात्रों और स्कूल कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है. हालांकि दिए गए इनपुट में इस आरोप के समर्थन में कोई स्वतंत्र सबूत नहीं दिया गया है.
सरकार अब क्या कर रही है?
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा है कि सरकार स्कूलों में पढ़ाई जारी रखने, सुविधाएं सुधारने, स्कूल के समय को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने और यूनिवर्सिटी दाखिले की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर काम कर रही है. सरकार तोड़फोड़ करने वालों से नुकसान का खर्च वसूलने वाले ‘वैंडल-पेज़’ कानून की समीक्षा भी तेज कर रही है.
क्या प्रदर्शन रुकने वाला है?
फिलहाल ऐसा नहीं दिख रहा. आयोजकों ने मंगलवार को भी प्रदर्शन जारी रखने का आह्वान किया है. उनका आरोप है कि सरकार ने अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए हैं.
जर्मनी में छात्रों का गुस्सा किस बात पर है?
फ्रांस में छात्र स्कूलों की हालत को लेकर सड़कों पर हैं, वहीं जर्मनी में सवाल सीधे सेना और अनिवार्य सैन्य सेवा का है.
जर्मनी में छात्र किस बात का विरोध कर रहे हैं?
जर्मनी में छात्र अनिवार्य सैन्य सेवा दोबारा शुरू करने के खिलाफ हैं. उनका डर है कि सरकार युवाओं को सेना में जाने के लिए मजबूर कर सकती है और देश की बढ़ती सैन्य तैयारियों का बोझ उनकी पीढ़ी पर आ सकता है.
हाल का प्रदर्शन कितना बड़ा था?
25 सितंबर को करीब 100 शहरों में प्रदर्शन हुए. आयोजकों के मुताबिक 45,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. बर्लिन में 3,400, हैम्बर्ग में 1,900, म्यूनिख में 700 और कील में करीब 600 छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए. यह 10 महीनों में चौथा राष्ट्रव्यापी स्कूल प्रदर्शन था.
जर्मनी सरकार सैन्य सेवा क्यों वापस ला रही है?
सरकार ने सैन्य तैयारियां बढ़ाई हैं और युवाओं की अनिवार्य मेडिकल जांच शुरू की है. इसके पीछे यूरोप की बदलती सुरक्षा स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी सैन्य चिंता को बड़ा कारण माना जा रहा है.
छात्रों को सबसे ज्यादा डर किस बात का है?
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि उन्हें युद्ध और उसमें युवाओं के शामिल होने का डर है. उनका सवाल है कि युद्ध का फैसला सरकारें करें और इसकी कीमत आम लोगों और युवाओं को क्यों चुकानी पड़े.
क्या पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की?
1 अगस्त को आई रिपोर्ट के मुताबिक बर्लिन में करीब 200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. पुलिस ने 16 लोगों को थोड़े समय के लिए हिरासत में लिया और 11 आपराधिक शिकायतें दर्ज कीं. इनमें संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपत्तिजनक व्यवहार जैसे आरोप शामिल थे. 17 और 19 साल के दो प्रदर्शनकारियों को चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मानहानि के आरोप में भी हिरासत में लिया गया था.
प्रदर्शन राइनमेटल के पास से क्यों निकला?
प्रदर्शनकारी राइनमेटल की एक नई गोला-बारूद फैक्टरी के पास से गुजरे. राइनमेटल जर्मनी की बड़ी रक्षा कंपनियों में से एक है. इसलिए सैन्य खर्च और हथियारों की बढ़ती भूमिका का विरोध करने वालों के लिए यह जगह खास तौर पर महत्वपूर्ण थी.
क्या जर्मनी में प्रदर्शन सिर्फ अनिवार्य सैन्य सेवा तक सीमित है?
नहीं. प्रदर्शन में युद्ध और बढ़ते सैन्य खर्च को लेकर भी नाराजगी दिखी. कुछ छात्रों ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए और कहा कि युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ता है.