MHA Blacklisting Guidelines: भारत ने विदेशी नागरिकों की एंट्री और देश में रहने पर रोक लगाने के लिए ब्लैकलिस्टिंग के नियमों को और सख्त कर दिया है. संशोधित इमिग्रेशन और ब्लैकलिस्टिंग गाइडलाइंस के तहत अब साइबर अपराध, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, बाल तस्करी, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े रैकेट, आतंकवाद को वित्तीय मदद, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला जैसे मामलों को भी विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई का आधार बनाया गया है. सूत्रों के मुताबिक, इन दिशानिर्देशों को उस समय तैयार और जारी किया गया था, जब अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिक मार्च 2026 में भारत में गिरफ्तार किए गए थे.
वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया था. मामला म्यांमार स्थित आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन वॉरफेयर में कथित प्रशिक्षण देने से जुड़ा था. NIA ने शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक प्रावधान लगाए थे. बाद में दाखिल आरोपपत्र में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए, जबकि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत जांच जारी रही. संशोधित प्रावधान पुराने ब्लैकलिस्टिंग सिस्टम की तुलना में काफी व्यापक है. पहले भी गंभीर अपराध, इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन, फर्जी दस्तावेज, सुरक्षा से जुड़े मामलों और अन्य निर्धारित गतिविधियों में शामिल विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता था. लेकिन अब नए नियम डिजिटल अपराधों और वित्तीय अपराधों के उन रूपों को भी स्पष्ट रूप से शामिल करते हैं, जिनका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद या विध्वंसक गतिविधियों से हो सकता है.
पिछले साल तैयार किए गए एक आदेश में विदेशी नागरिकों के प्रवेश या भारत में रहने से इनकार करने के आधारों में भारत विरोधी गतिविधियां, जासूसी, आतंकवाद, विध्वंसक गतिविधियां, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, फर्जी यात्रा दस्तावेज और करेंसी रैकेटियरिंग शामिल थे. अब इस दायरे में साइबर अपराध और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है. मानव तस्करी के मामले में बाल तस्करी को भी विशेष रूप से दायरे में लाया गया है. ताजा दिशानिर्देशों में आतंकवादी या विध्वंसक गतिविधियों को आर्थिक सहायता देने वाले मामलों को भी गंभीरता से लिया गया है. ऐसे मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला के जरिए धन उपलब्ध कराने को ब्लैकलिस्टिंग के लिए प्रासंगिक आधार माना गया है. क्रिप्टोकरेंसी के जरिये होने वाली वित्तीय गतिविधियों को भी अब करंसी रैकेटियरिंग के साथ जोड़ा गया है. इससे विदेशी नागरिकों से जुड़े उन मामलों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है, जिनमें डिजिटल माध्यमों के जरिए अवैध धन का लेन-देन या आपराधिक गतिविधियों को वित्तीय समर्थन देने के आरोप हों.
ग्रेड A, B, C और D की मौजूदा श्रेणियां बरकरार
ब्लैकलिस्टिंग के लिए मंजूरी के स्तर भी अलग-अलग रखे गए हैं. ग्रेड ए के मामलों में कार्रवाई गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी अथवा ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त द्वारा की जा सकती है. 2025 के नए इमिग्रेशन कानून के तहत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को उन विदेशी नागरिकों की अपडेटेड लिस्ट बनाए रखना भी जरूरी है, जिनके भारत में प्रवेश पर रोक है. ऐसे मामलों की समय-समय पर समीक्षा का भी प्रावधान किया गया है. वैनडाइक मामले ने विदेशी नागरिकों की गतिविधियों और उनके वीजा की शर्तों के बीच संबंध को लेकर भारत की इमिग्रेशन और सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से ध्यान खींचा है. 6 यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ के हवाई अड्डों पर हिरासत में लिया गया था, जबकि वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था. सितंबर में दिल्ली की एक अदालत ने वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत दी. इसके बाद अदालत ने सभी सातों को एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति भी दी, हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें लगाई गई थीं.