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Uttarakhand Congress News: उत्तराखंड में अगले साल चुनाव होने हैं. इसे लेकर कांग्रेस आलाकमान ने अपने नेताओं को साफ संदेश दिया है. खासकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अकेले प्रचार पर पार्टी का रूख काफी सख्त है. उनसे मुलाकात के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि पार्टी में किसी भी नेता का व्यक्तिगत प्रचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने साफ किया कि सभी नेताओं को कांग्रेस के बैनर तले संगठन द्वारा तय सामूहिक कार्यक्रमों के तहत ही काम करना होगा.
हरीश रावत पर भड़का कांग्रेस अलकमान.
Harish Rawat News: चुनावी राज्य उत्तराखंड में जीत की राह तलाश रही कांग्रेस ने अपनी रणनीति को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं. पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत के साथ एक अहम बैठक की. इस मुलाकात के दौरान राज्य में जारी चुनावी अभियानों, संगठनात्मक तैयारियों और जमीनी रणनीति पर मंथन किया गया.
बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि पार्टी में अब किसी भी स्तर पर गुटबाजी या अलग राह पकड़ने की छूट नहीं मिलेगी. उन्होंने कहा कि नेताओं द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर चलाए जाने वाले प्रचार अभियानों को पार्टी किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी. चुनावी मैदान में केवल वही कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिन्हें पार्टी संगठन द्वारा सामूहिक रूप से तैयार और निर्धारित किया गया हो.
केसी वेणुगोपाल की दो टूक में चेतावनी
खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में ही अभियान
वेणुगोपाल ने कहा कि उत्तराखंड में चुनावी अभियान को राज्य के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर साझा रूप से आगे बढ़ाया जाएगा. यह पूरा अभियान कांग्रेस के झंडे तले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में संचालित होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय पार्टी का एकमात्र और साझा लक्ष्य उत्तराखंड में कांग्रेस की स्पष्ट जीत सुनिश्चित करना है.
धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा के दौरान उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री.
जीत को लेकर आलाकमान आश्वस्त
बैठक के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने भरोसा जताया कि राज्य इकाई के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की सामूहिक ऊर्जा, एकजुटता और कड़ी मेहनत के दम पर कांग्रेस निश्चित रूप से उत्तराखंड में विजयी होकर उभरेगी. चुनाव से पहले आलाकमान के इस कड़े रुख को पार्टी के भीतर गुटबाजी पर नकेल कसने और सभी खेमों को एक मंच पर लाने की मजबूत कवायद के रूप में देखा जा रहा है.