हरिद्वार की इस दुकान पर मिल रहा मथुरा का पेड़ा, यहां का मलाई समोसा भी खास
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Haridwar Famous Sweet Shop: हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास स्थित प्राचीन मथुरा वाले की दुकान 100 साल से भी पुरानी है. यहां शुद्ध मावे से बनी स्वादिष्ट मिठाइयां मिलती हैं, जो अपनी शुद्धता और अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं.
हरिद्वार की पहचान केवल गंगा घाटों, मंदिरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां के पुराने खान-पान को देश-विदेश में रहने वाले बखूबी जानते हैं. हर की पौड़ी के पास ब्रिटिश दौर से संचालित प्राचीन मथुरा वाले की दुकान आज भी अपनी शुद्धता के लिए विख्यात है. मथुरा वाले की दुकान पर एक ओर देसी घी के नमकीन पकवान और मिठाई मिलती है तो वहीं दूसरी तरफ शुद्ध दूध को घंटों कढ़ाकर बनाए गए मावे से स्वादिष्ट मिठाइयां मिलती हैं, जिनका स्वाद हरिद्वार आने वाले यात्रियों को अपनी ओर खींचता है.
प्राचीन मथुरा वाले की दुकान परपारंपरिक लोकप्रिय मिठाई मथुरा वाले का पेड़ा है. इसे तैयार करने के लिए ताजे दूध के मावे को आग की धीमी आंच पर घंटों तक भुना जाता है, जिससे इसका रंग गहरा भूरा और खुशबू मनमोहक हो जाती है. शुद्धता से भरपूर यह पेड़ा बिना फ्रिज के भी लगभग बीस दिनों तक पूरी तरह ताजा रहता है, जिसके चलते बाहर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इसे हरिद्वार के प्रामाणिक प्रसाद के रूप में अपने साथ लेकर जाते हैं.
प्राचीन मथुरा वाले की दुकान पर चर्चित और अनोखा मलाई समोसा मिलता है. यह नमकीन समोसे से बिल्कुल अलग है. इस समोसे को तैयार करने में मैदे का इस्तेमाल नहीं है, बल्कि शुद्ध ताजे दूध की गाढ़ी मलाई की नाजुक परत से तैयार किया जाता है. इस समोसे का सुंदर आकार बाहर की मलाई से बन जाता है और इसके अंदर काजू, बादाम और पिस्ते की स्टफिंग की जाती है. इसमें मिठास इतनी हल्की और प्राकृतिक रखी जाती है कि कम मीठा पसंद करने वाले और डायबिटीज़ मरीज भी इसका बेझिझक स्वाद लेते हैं.
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प्राचीन मथुरा वाले की दुकान पर तीसरी मिठाई पिस्ता मावा की मिठाई है, जो अपनी शुद्धता के लिए फेमस है. इसमें किसी भी प्रकार का आर्टिफिशियल रंग या केमिकल आदि नहीं मिलाया जाता. कड़ाही में गाढ़े दूध से बने ताजा सफेद मावे को बहुत हल्की चाशनी के साथ जमाकर चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है. शुद्ध मावे की बर्फी स्वाद में काफी अच्छी लगती है. मावे की यह मिठाई मुंह में रखते ही घुल जाती है, जिससे इसके अनोखे स्वाद का अहसास होता है.
प्राचीन मथुरा वाले की चौथी खास मिठाई पिस्ता की बर्फी है, जो मेवों के शौकीन लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. शुद्ध मावे के मिश्रण में बारीक कटे हुए उत्तम श्रेणी के पिस्ते और हरी इलायची का मिश्रण किया जाता है. हरे और हल्के सुनहरे रंग की यह बर्फी दिखने में जितनी आकर्षक है, स्वाद और पौष्टिकता में भी उतनी ही समृद्ध मानी जाती है, जिसे खास उत्सवों पर श्रद्धालु बड़े चाव से खरीदते हैं.
प्राचीन मथुरा वाले की दुकान का सफेद पेड़ा इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की पहली पसंद बना है. ताजे दूध को घंटों धीमी आंच पर कढ़ाकर तैयार किए गए शुद्ध मावे से यह स्वादिष्ट पेड़ा बनता है. बिना किसी मिलावट के तैयार इस पेड़े का अनोखा स्वाद मुंह में रखते ही घुल जाता है. गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु इस स्वादिष्ट पेड़े का स्वाद लेने के साथ-साथ अपनों के लिए भी इसे पैक कराकर लेकर जाते हैं.
प्राचीन मथुरा वाले की 100 साल पुरानी दुकान के भूरे रंग के लड्डू इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. शुद्ध ताजे दूध को भट्ठी पर घंटों पकाकर कढ़ाया जाता हैं. जब दूध कढ़कर मावा बन जाता है तो उसका सुनहरा भूरा रंग बन जाता है. पारंपरिक विधि से ये गोल लड्डू तैयार किए जाते हैं. इलायची की महक और हल्की मिठास से भरपूर यह मिठाई बिना फ्रिज के भी 20 दिनों तक खराब नहीं होती. गंगा स्नान के बाद देश भर से आने वाले यात्री इसे हरिद्वार के प्रसाद के रूप में खरीद कर लेकर जाते हैं.
हरिद्वार की 100 साल पुरानी प्राचीन मथुरा वाले की दुकान पर मलाईदार रबड़ी का स्वाद श्रद्धालुओं को काफी ज्यादा पसंद आ रहा है. शुद्ध दूध को बड़े कड़ाहे में कई घंटों धीमी आंच पर खौलाकर इसकी मोटी परतें तैयार की जाती हैं. ताजे दूध की प्राकृतिक मिठास और केसर की महक से सजी यह रबड़ी बेहद ही लाजवाब है. हर की पौड़ी पर गंगा स्नान के बाद आने वाले श्रद्धालु इस ठंडी और स्वादिष्ट रबड़ी का स्वाद लेते हैं.