Pitru Paksha: घर में दिखे ये संकेत तो समझ जाइए आपके पितर हैं नाराज, गयाजी के आचार्य ने बताए मनाने के उपाय

Pitru Paksha: घर में दिखे ये संकेत तो समझ जाइए आपके पितर हैं नाराज, गयाजी के आचार्य ने बताए मनाने के उपाय


गयाजीः गयाजी को मोक्ष की नगरी कहा गया है. यहां पूर्वजों का पिंडदान करने से उन्हें जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है. ऐसा कहा जाता है कि पितरों की आत्मा इस मोह माया की दुनिया में भटकती रहती है. ऐसे में गया में पिंडदान करने मात्र से इससे मुक्ति मिलती है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है. सनातन धर्म में पितरों को देवता के समान माना गया है. इसलिए पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध किया जाता है.

ऐसा माना जाता है कि पितरों के नाराज होने पर जीवन में उथल-पुथल मच सकती है. सुखी जीवन के लिए जरूरी है कि हमारे पूर्वज खुश रहें. कुछ ऐसे संकेत हैं जिससे पता चलता है कि हमारे पूर्वजों हमसे नाराज हैं. कई बार परिवार में लगातार परेशानियां आने पर लोग कहते हैं हमारे पितर रूठे हुए हैं, हमारे घर में पितृ दोष है, हमारे काम नहीं बनते, नौकरी नहीं लगती, शादी नहीं होती, संतान नहीं होती, घर में लड़ाई होती है, पैसा नही टिकता यह सब रूठे पितरों के लक्षण हैं.

क्या कहते हैं गयाजी के आचार्य?
गया मंत्रालय रामाचार्य वैदिक पाठशाला के पंडित राजा आचार्य बताते हैं कि पितृपक्ष में घर में कुछ ऐसे संकेत दिखते हैं जिससे पता चलता है कि हमारे पूर्वज नाराज हैं. इसमें यदि आप जो भी कार्य कर रहे हैं, उसमें रुकावट आ रही है और कोई भी कार्य संपन्न नहीं होता है तो इसे पितरों के नाराज होने या पितृदोष का लक्षण माना जाता है. घर में थोड़ी-बहुत खटपट तो चलती रहती है लेकिन यदि रोज ही गृहकलह हो रही है तो यह समझा जाता है कि पितृ आपसे नाराज हैं. ऐसी मान्यता है कि पितृ नाराज रहते हैं तो संतान पैदा होने में बाधा आती है.

ऐसी मान्यता है कि पितरों के नाराज रहने के कारण घर की किसी संतान का विवाह नहीं होता है और यदि हो भी जाए तो वैवाहिक जीवन अस्थिर रहता है. ऐसी मान्यता है कि यदि पितृ नाराज हैं तो आप जीवन में किसी आकस्मिक नुकसान या दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं. आपका रुपया जेलखाने या दवाखाने में ही बर्बाद हो जाता है. इसके अलावा भी अन्य लक्षण बताए गए हैं, जैसे कि मांगलिक कार्यों में अचानक कोई बाधा उत्पन्न हो, संतान का पढ़ाई में दिल नहीं लगना, श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों द्वारा भोजन नहीं खाया जाना, घर में बरकत नहीं रहना आदि.

पितर बहुत अधिक रूठे हों तो क्या करें?
यदि पितर बहुत ज्यादा रूठे हैं, 5 साल से ज्यादा दोष है तो गया जाकर त्रिपिंडी श्राद्ध कराएं. गया में विष्णु पद पर पिंडदान करने से 21 पीढ़ी के रूठे पितर भी मान जाते हैं. यदि गया नहीं जा सकते तो किसी तीर्थ प्रयाग, काशी, हरिद्वार, उज्जैन, या नर्मदा किनारे त्रिपिंडी श्राद्ध कराएं. घर में भागवत कथा कराएं, या भागवत का मूल पाठ कराएं, भागवत सुनने से प्रेत भी मुक्त हो जाते हैं, तो रूठे पितर तो तुरंत मान जाएंगे.

यदि आपके माता-पिता जीवित हैं, और आपने उन्हें दुख दिया है तो उनके पैरों में गिरकर क्षमा मांग लें, उनके चरण धोकर पिएं, उन्हें भोजन कराएं, यदि माता-पिता जीवित में मान गए तो मरे हुए पितर अपने आप मान जाएंगे. पितरों को सबसे ज्यादा प्रिय है पिंड. पिंड अर्थात चावल, जौ, काला तिल, शहद, घी, गंगाजल से बना गोला, जो पुत्र गया जाकर पिंडदान करता है, उसके 21 पीढ़ी के पितर मुक्त हो जाते हैं.

Disclaimer: यह लेख लोक मान्यताओं और तीर्थ पुरोहित से बातचीत पर आधारित है. यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए लोकल 18 उत्तरदायी नहीं है..



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