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Indian Economy : आरबीआई के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के प्रधान सलाहकार शक्तिकांत दास ने कहा है कि भारत की विकास दर अब 8 फीसदी के आसपास पहुंच गई है. यह कुछ दिन पहले जताए गए अनुमान के करीब है. यह ग्रोथ अचानक नहीं आई है, बल्कि इसके लिए लंबे समय से लगातार कोशिश हो रही है. भारत को साल 2027 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है, जिसके लिए आगे भी निर्यात सहित अन्य फैक्टर्स पर जोर देना होगा.
भारत की विकास दर 8 फीसदी के आसपास पहुंच गई है.
नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने बताया कि आखिर क्यों भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर दुनिया में सबसे तेज है. दास ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 8 फीसदी के करीब पहुंच गई है. माल एवं सेवा कर (जीएसटी), महंगाई पर काबू, बैंकिंग सुधारों और राजकोषीय अनुशासन जैसे व्यापक सुधारों से आर्थिक वृद्धि को मजबूती मिली है. कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर दास ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूती से टिके रहना व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का परिणाम है.
उन्होंने कहा कि अगर वित्तवर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर से वित्तवर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून अवधि को लिया जाए, तो भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि 8 फीसदी से कुछ अधिक है. यह कुछ महीने पहले फाइनेंशियल टाइम्स, लंदन को दिए मेरे बयान के अनुरूप है कि भारत 8 फीसदी की वृद्धि के बेहद करीब है. भारत की जीडीपी जून तिमाही में 7.8 फीसदी बढ़ी थी, जो अनुमान से बेहतर रही. दास ने इस मजबूत प्रदर्शन का श्रेय मजबूत घरेलू मांग और निवेश के अनुकूल माहौल को दिया.
संयोग नहीं है भारत की मजबूती
उन्होंने कहा कि भारत की मजबूती कोई संयोग नहीं है. यह व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का परिणाम है. दास ने कहा कि पिछले एक दशक में किए गए सुधार कोई एक बार किए जाने वाले उपाय नहीं थे, बल्कि इनके जरिये ऐसे सुरक्षा उपाय तैयार किए गए जिनसे अर्थव्यवस्था को झटकों का सामना करने और तेजी से उबरने में मदद मिले. उन्होंने महंगाई को तय लक्ष्य के आसपास रखने की नीति, जीएसटी लागू करने, राजकोषीय अनुशासन, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को ऐसे प्रमुख कदमों में शामिल किया.
इन फैक्टर ने दिलाई भारत को मजबूती
आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र और बाहरी क्षेत्र का सतर्क प्रबंधन भी आर्थिक वृद्धि के मजबूत आधार बनकर उभरे हैं. निर्यात में विविधता, मुक्त व्यापार समझौते, सेवा व्यापार में लगातार अधिशेष और विदेशों से लगातार आने वाले धन से बाहरी क्षेत्र की स्थिति मजबूत बनी हुई है. दास ने कहा कि भारत अपने विकास के महत्वपूर्ण दौर में है और ऊंची आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए उसे कृत्रिम मेधा (एआई) क्रांति का लाभ उठाना होगा. भारत की एआई रणनीति दो पूरक स्तंभों पर आधारित है. पहला, देश में विकसित मूल एआई मॉडल, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं, सेमीकंडक्टर विकास और मजबूत नवाचार तंत्र में निवेश के जरिये अपनी एआई क्षमता विकसित करना.
इन सेक्टर्स का भी बड़ा योगदान
दास ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र काफी विकसित हुआ है, लेकिन वृद्धि के अगले चरण के लिए दीर्घकालीन वित्त और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वाली पूंजी की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉरपोरेट बॉण्ड बाजार, पेंशन और बीमा कोष, नगर निकायों के वित्तपोषण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नए वित्तपोषण माध्यमों को और विकसित करना होगा. देश की वृद्धि के अगले चरण में सतत विकास और जलवायु के क्षेत्र में नेतृत्व पर भी ध्यान देना होगा. इसके लिए राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक परिवहन, ऊर्जा का बुनियादी ढांचा, टिकाऊ कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसी पहलों को आगे बढ़ाना होगा. दास ने कहा कि साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों की गति बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा. भारत की रणनीति केवल तेजी से बढ़ना नहीं है, बल्कि लंबे समय में टिकाऊ और मजबूत आर्थिक वृद्धि हासिल करना है.