Explained: क्या होती है डेडहेडिंग… जिस वजह से फ्लाई दुबई के विमान में हीरो वाली एंट्री ले सके दो पायलट?

Explained: क्या होती है डेडहेडिंग… जिस वजह से फ्लाई दुबई के विमान में हीरो वाली एंट्री ले सके दो पायलट?


फ्लाई दुबई का विमान FZ1073 तकरीबन 34 हजार फीट की ऊंचाई पर था. 30 सेकेंड के अंदर ही ये 14 हजार फीट नीचे गिर गया. पायलट स्मित मच्छर ने अदम्य साहस दिखाते हुए को पायलट हम्मान अल हम्मामी से मुकाबला किया. कॉकपिट का दरवाजा खोला. यात्री यानीव हयून समेत 4 लोग कॉकपिट की तरफ दौड़े और हम्मामी को दबोच लिया.

स्मित मच्छर घायल हो चुके थे, मगर प्लेन को संभालने की कोशिश कर रहे थे. ठीक इसी बीच कॉकपिट में दो यात्रियों की एंट्री हुई और दरवाजा बंद हो गया. यात्री डरे हुए थे, उन्हें नहीं पता था कि कॉकपिट में हीरो वाली एंट्री लेने वाले ये दो शख्स कौन हैं. प्लेन में सवार यात्री डैनियल श्लिक्टर के मुताबिक 45 मिनट बाद जब ये बताया गया कि प्लेन सऊदी के तबुक में उतरेगा तब जान में जान आई.

कॉकपिट में एंट्री लेने वाले ये दो शख्स असल में फ्लाई दुबई के ही रिजर्व पायलट थे. इनमें से एक ब्रिटिश नागरिक था. विमान कंपनी की ओर से सुरक्षा कारणों की वजह से दोनों पायलटों के नाम सार्वजिनक नहीं किए गए हैं. दुबई एयरपोर्ट से तेल अवीव के लिए उड़ान भरने वाले विमान में दोनों पायलट इसलिए सफर कर रहे थे, क्योंकि इन्हें इस प्लेन को वापस लाना था. एविएशन इंडस्ट्री में इसे डेडहेडिंग कहते हैं, जिसमें प्लेन के पायलट या केबिन क्रू यात्री के तौर पर सफर करते हैं.

क्या होती है डेडहेडिंग

डेडहेडिंग असल में वह प्रक्रिया होती है जिसमें कोई एयरलाइट पायलट या क्रू सदस्य को एक शहर से दूसरे शहर भेजती है, ताकि वहां जाकर वह अपनी अगली ड्यूटी संभाल सके. यह सामान्य यात्री की तरह ही यात्रा करते हैं. फ्लाई दुबई के जिस विमान को गिराने की साजिश की गई थी, उसमें दोनों पायलट इसलिए यात्रा कर रहे थे, क्योंकि इन्हें यही फ्लाइट तेल अवीव से वापस दुबई तक लानी थी.

डेडहेडिंग की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि कई बार किसी पायलट की शिफ्ट खत्म होने की वजह से, अचानक बीमार होने या इमरजेंसी छुट्टी लेने की वजह से पायलटों की कमी हो जाती है. कई बार लंबी उड़ान के बाद आराम नियमों के चलते ही कंपनियों को क्रू बदलनी पड़ती है, इसीलिए डेडहेडिंग का सहारा लिया जाता है.

डेडहेडिंग करने वाला पायलट प्लेन उड़ा सकता है?

डेडहेडिंग कर रहा पायलट असल में प्लेन नहीं उड़ा सकता. दरअसल वो ऑपरेटिव क्रू का हिस्सा नहीं होता. विमान की जिम्मेदारी कॉकपिट में मौजूद कैप्टन और को पायलट की ही होती है, लेकिर अगर उड़ान के दौरान कोई इमरजेंसी हो जाए और किसी अतिरिक्त पायलट की जरूरत पड़े तो एयरलाइन नियमों के मुताबिक यात्री के तौर पर विमान में मौजूद पायलट मदद कर सकता है. हालांकि ये जरूरी नहीं कि हर फ्लाइट में डेडहेडिंग क्रू हो.

स्मित मच्छर को पता था डेडहेडिंग क्रू है

बेशक विमान में यात्रा कर रहे लोगों को डेडहेडिंग क्रू के बारे में न पता हो, लेकिन फ्लाई दुबई की फ्लाइट उड़ा रहे स्मित मच्डर को डेडहेडिंग क्रू की पूरी जानकारी थी. फ्लाइट मेनिफेस्ट में उड़ान भरने से पहले कैप्टन को विमान में यात्रा कर रहे सभी लोगों के बारे में बताया जाता है. कई बार विमान में सवार होने के बाद या पहले डेडहेडिंग कर रहे पायलट मुख्य ऑपरेटिंग क्रू से मुलाकात करते हैं, ताकि वे एक दूसरे की उपस्थिति से वाकिफ हों.

इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत ही ऑपरेटिंग क्रू को ये बताया जाता है कि आपातकाल की स्थिति में फ्लाइट में ऐसे कोन लोग हैं जो सुरक्षा या मदद के लिए योग्य हैं. इसीलिए इमरजेंसी में स्मित मच्छर ने सबसे पहले कॉकपिट का दरवाजा खोजा, ताकि उन्हें आपातकालीन मदद मिल सके.

क्यों डरे हुए थे यात्री?

विमान में सवार यात्री डैनियर श्लिक्टर ने एसोसएिटेड प्रेस से बातचीत में बताया कि हीरो जैसी एंट्री लेने वाले दो शख्स कौन थे, ये यात्रियों को पता ही नहीं था. कॉकपिट का दरवाजा बंद होने के बाद यात्री दहशत में थे कि कहीं प्लेन को हाईजैक न कर लिया जाए. लोगों को ये भी डर था कि कहीं प्लेन को हाइजैक कर ईरान न ले जाया जाए. श्लिक्टर के मुताबिक जब चीख पुकार मची, तब कुछ यात्रियों ने आरोपी को पायलट को दबोच लिया.

इसी अफरा तफरी के बीच दो शख्स कॉकपिट में दाखिल हो गए और प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया. उन्होंने दरवाजा इसलिए बंद कर दिया, ताकि वे नहीं चाहते थे कि कोई और वहां मौजूद रहे. श्लिक्टर के मुताबिक उन्हें बताया गया कि दोनों पायलट हैं, लेकिन लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि आखिर विमान में दोनों पायलट कहां से आए. हालांकि, लगभग 45 मिनट बाद, पायलटों ने घोषणा की कि वे सऊदी अरब के तबुक में लैंडिंग करेंगे और सब कुछ ठीक रहेगा. श्लिक्टर ने कहा कि इसके बाद उन्होंने उन पर भरोसा करने का फैसला किया. यह बिल्कुल चमत्कारी था.



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