Explained: क्या था ‘द ग्रेट मद्रास अकाल’ जिसमें गई थी 90 लाख लोगों की जान, इसी पर बेस्ड है रश्मिका और विजय की फिल्म रणबाली?

Explained: क्या था ‘द ग्रेट मद्रास अकाल’ जिसमें गई थी 90 लाख लोगों की जान, इसी पर बेस्ड है रश्मिका और विजय की फिल्म रणबाली?


रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की फिल्म रणबाली चर्चा में है. यह फिल्म एक पीरियड ड्रामा है जो ब्रिटिश शासन के दौरान अकाल, शोषण और उसके खिलाफ हुए संघर्ष पर आधारित है. हालांकि फिल्म की कहानी का केंद्र द ग्रेट मद्रास अकाल है, जिसकी वजह से 80 से 90 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

भारत ने 1876 से 1878 के बीच इतिहास की सबसे भयावह त्रासदी झेली थी. इन दोनों सालों में दक्षिण भारत में बारिश न के बराबर हुई. इससे फसलें बर्बाद हुईं और ऐसा अकाल पड़ा जिसने 80 से 90 लाख लोगों की जान ले ली. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन PubMed के मुताबिक इसे ग्रेड मद्रास फैमाइन और साउदर्न इंडिया फैमाइन जैसे नामों से जाना जाता है. फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है, जिसका निर्देशन राहुल संकृत्यन ने किया है.

क्या था द ग्रेट मद्रास अकाल?

द ग्रेट मद्रास अकाल का कारण कमजोर मानसून था. दरअसल दक्षिण भारत में 1875 से ही बारिश में कमी आनी शुरू हो गई थी. 1876 में हालात और खराब हो गए. एडवांसिंग अर्थ एवं स्पेस साइंसिस में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक 1876 में साउथ इंडिया में तकरीबन 41 प्रतिशत तक बारिश की कमी रही.

इस कारण मिट्टी की नमी में कमी आई और बड़े इलाके सूखे की चपेट में आ गए. इस वजह से फसल उत्पादन प्रभावित हुई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई. इसका असर मद्रास प्रेसीडेंसी औ साउथ के अन्य इलाकों में पड़ा. खासतौर से बॉम्बे प्रेसीडेंसी, मैसूर और हैदराबाद की रियासतें भी प्रभावित हुईं. 1877 तक अकाल का प्रभाव मध्य भारत तक पहुंच गया था और उत्तर पश्चिमक प्रॉविसेंज और पंजाब के इलाके भी प्रभावित होने लगे थे. हालांकि सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति मद्रास प्रेसीडेंसी रायलसीमा क्षेत्र में थी, जिसमें अनंतपुर, कुरनूल और कडप्पा इलाके आते हैं. फिल्म में भी रायलसीमा के हालात को ही दिखाया गया है.

सिर्फ सूखा नहीं था अकाल की वजह

खास बात ये है कि द ग्रेट मद्रास अकाल की अकेली वजह सूखा नहीं था. इतिहासकारों के हवाले से एडवांसिंग अर्थ एवं स्पेस साइंसिस एक आर्टिकल के मुताबिक ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों ने इसे और भयावह बनाया. उस दौर में भारत पर ब्रिटिश शासन था. ऐसे में फसल की उपलब्धता, कर व्यवस्था, व्यापार सब अंग्रेजों के हाथ में था.

रिसर्च के मुताबिक उस भीषण अकाल के दौरान भी भारत से अनाज का निर्यात जारी रहा. इस वजह से प्रभावित इलाकों में अनाज महंगा होता गया. PubMed में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक उस दौर में जमाखोरी भी बड़ी समस्या थी. अनाज की कीमतें बढ़ने की उम्मीद में व्यापारियों ने अनाज जमा करना शुरू कर दिया था.

कितने लोगों की मौत हुई थी?

द ग्रेट मद्रास अकाल में हुई मौतों का सटीक आंकड़ा आज तक उपलब्ध नहीं है.हालांकि इस पर जो रिसर्च हुए हैं उनमें अकाल की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा 80 से 90 लाख तक दिया गया था. Kiwix Server की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकाल का प्रभाव तकरीबन 6.7 लाख वर्ग किलोमीटर तक था, जिस वजह से 5.85 करोड़ लोगों को संकट का सामना करना पड़ा और 82 लाख लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे. फिल्म के टीजर में भी तकरीबन 80 लाख लोगों के मारे जाने की बात दिखाई गई है.

भूख के साथ बीमारियों ने भी ली जान

इस अकाल के दौरान मौत का कारण सिर्फ भूख नहीं थी. भरपेट खाना न मिलने की वजह से लोग कुपोषण का शिकार हुए और उस समय फैलने वाली घातक बीमारियों की चपेट में आए. मद्रास प्रेसीडेंसी में 1876-78 के अकाल की परिस्थितियों के दौरान बेरी-बेरी बीमारी फैली थी जो पोषण संबंधी था. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक पर्याप्त पोषण न मिलने की वजह से ही ये बीमारी लोगों को शिकार बनाती थी.

रणबाली में क्या दिखाई देगा?

अकाल के दौरान ब्रिटिश प्रशासन ने कथित तौर पर राहत के कुछ उपाय किए थे. राहत शिविर लगाए गए थे और लोगों को काम के बदलने खाना और पैसे देने की व्यवस्था शुरू की गई थी. हालांकि इतिहासकारों के मुताबिक इसके नियम बहुत कठोर थे. कई बार लोगों से काम कराया जाता था, मगर उन्हें बेहद कम खाना या बहुत कम मजदूरी दी जाती है. जो संघर्ष करते थे उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी जाती थीं. फिल्म रणबाली में इसी को दिखाया गया है. हालांकि फिल्म की पूरी कहानी को लेकर मेकर्स ने बहुत ज्यादा जानकारी सावर्जनिक नहीं की.



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