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हिंदी सिनेमा की ‘ट्रेजेडी क्वीन’ मीना कुमारी ने अपनी गजब की एक्टिंग से लोगों के दिलों पर राज किया था. पर्द पर उनके आते ही वह अपनी एक्टिंग से समा बांध दिया करती थीं. कोई अहसास तक नहीं कर पाता था कि उनकी असल जिंदगी इतनी दर्द भरी है. महज 4 साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखने वाली मीना कुमारी ने छोटी उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था. लेकिन उनका अंत बहुत ही दर्दनाक रहा था. कहा जाता है कि उनका आखिरी समय तो बहुत ही मुश्किलों भरा था
नई दिल्ली. मीना कुमारी ने अपने करियर में वो फिल्में की, जो सुपर डुपर हिट साबित हुई. अपने किरदारों को तो उन्होंने अमर बना दिया था. लेकिन आखिरी समय में कहा जाता है कि उनके परिवार के पास उनका शव अस्पताल से शव छुड़ाने के लिए 3,500 रुपये तक नहीं थे. लेकिन इतनी बड़ी बड़ी हिट देने वाली एक्ट्रेस की हालात आखिर ऐसे कैसे हो गई.
मीना कुमारी को फिल्म इडंस्ट्री में ‘ट्रेजेडी क्वीन’ कहा जाता था. फिल्म ‘पाकीजा’ में उन्होंने अपने किरदार में तो जान ही फूंक दी थी. फिल्म में वह बला की खूबसूरत लगी थीं. उनकी एक्टिंग देख लोग उनके मुरीद हो गए थे. महज 4 साल की उम्र में उनके पिता उन्हें फिल्मों में ले आए थे.
बहुत छोटी उम्र से ही वह अपने परिवार की जिम्मेदारियां उठा रही थीं. स्टारडम पाने के बाद भी एक्ट्रेस की जिंदगी से दुख दूर नहीं हुए थे. बहुत कम लोग जानते हैं कि मीना कुमारी का असली नाम महजबीन बानो था. उनके पिता अली बख्श उन्हें महज 4 साल की उम्र में फिल्म स्टूडियो ले गए थे.
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साल 1939 में उन्होंने विजय भट्ट की फिल्म ‘लेदरफेस’ में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करना शुरू किया था. इस फिल्म के जरिए उन्हें फीस के तौर पर सिर्फ 25 रुपये मिले थे. छोटी उम्र में काम करने की वजह से मीना कुमारी का स्कूल भी छूट गया था.
परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें लगातार फिल्मों में काम करना पड़ा. धीरे-धीरे उनकी कमाई घर चलाने का बड़ा सहारा बन गई. मीना कुमारी और उनके पिता के रिश्ते हमेशा मुश्किलों से भरे रहे.परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें लगातार फिल्मों में काम करना पड़ा. धीरे-धीरे उनकी कमाई घर चलाने का बड़ा सहारा बन गई. मीना कुमारी और उनके पिता के रिश्ते हमेशा मुश्किलों से भरे रहे.
विनोद मेहता की जीवनी के अनुसार, मीना कुमारी ने फिल्ममेकर कमाल अमरोही संग पिता के डर की वजह से गुपचुप शादी रचाई थी. बचपन में पढ़ाई से ज्यादा काम पर ध्यान देने पड़ा था. तकरीबन 6-7 साल की उम्र में ही वह एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो के चक्कर लगाने लगी थीं.
मीना कुमारी को असली पहचान साल 1952 में आई फिल्म ‘बैजू बावरा’ से मिली थी. इस फिल्म के बाद वह उस दौर की जानी मानी एक्ट्रेसेस में शामिल हो गई थीं. अपने करियर में उन्होंने ‘परिणीता’, ‘आजाद’, ‘शारदा’, ‘मिस मैरी’ और ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ जैसी कई फिल्मों में कई दमदार रोल निभाए.
फिल्ममेकर बिमल रॉय की बेटी रिंकी रॉय भट्टाचार्य ने साल 2014 में रेडिफ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि 31 मार्च 1972 को जब मीना कुमारी का निधन हुआ तो, उनके परिवार के पास अस्पताल से उनका शव छुड़ाने के लिए 3,500 रुपये तक नहीं थे. फिल्मों में इतना काम करने के बाद, इतना नाम कमाने के बाद भी मीना कुमारी को इतना दर्दनाक अंत देखना पड़ा था.