Agency:एजेंसियां
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Saudi VS Yemen News: यमन में सऊदी अरब के समर्थन वाली सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ जवाबी सैन्य अभियान शुरू कर दिया है. इसका लक्ष्य राजधानी सना और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल करना है. सऊदी सेना हवाई हमलों से मदद कर रही है, जबकि अमेरिका खुफिया जानकारी और टारगेटिंग सपोर्ट दे रहा है. हालांकि, अमेरिकी सैन्य कमान CENTCOM यमन में सीधे हमले को लेकर गंभीर आपत्तियां जता रही है.
सऊदी समर्थित यमनी बलों और हूतियों में नई जंग शुरू.
Houthi War News: यमन में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच टकराव एक बार फिर बड़े युद्ध की शक्ल लेता दिख रहा है. रविवार को सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन की सरकारी सेना ने हूतियों के खिलाफ जवाबी सैन्य अभियान शुरू कर दिया. उसका लक्ष्य हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना और यमन की राजधानी सना पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना है. वहीं हूतियों का दावा है कि उन्होंने स्पीकर के घर पर कब्जा कर लिया है. इस लड़ाई में सऊदी सेना हवाई हमलों और एयर कवर के जरिए यमनी सैनिकों की मदद कर रही है, जबकि अमेरिका खुफिया जानकारी और टारगेटिंग सपोर्ट दे रहा है. लेकिन इस पूरे ऑपरेशन में एक दिलचस्प पेच भी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को मदद चाहिए, मगर अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM को यमन में नया मोर्चा खोलना पसंद नहीं आ रहा.
यमन की राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी. (Reuters)
यमन में नया युद्ध शुरू
यमन की राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने रविवार को अपने संबोधन में सैन्य अभियान की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि हूती मिलिशिया के साथ तनाव कम करने के सभी मौके खत्म हो चुके हैं. इसके बाद सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन की सरकारी सेना ने हूतियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू की. इस ऑपरेशन की तैयारी कई हफ्तों से चल रही थी. इसमें यमन की सरकार के प्रति वफादार हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. इस अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य राजधानी सना को हूतियों के कब्जे से वापस लेना है. सना कई साल से हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है. सऊदी सेना इस अभियान में यमनी सैनिकों को हवाई सुरक्षा दे रही है और हूती ठिकानों पर एयरस्ट्राइक भी कर रही है.
पश्चिम एशिया में क्यों शुरू हुई नई जंग?
इस सैन्य अभियान का एक बड़ा मकसद बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना है. यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है. हूतियों ने जब इस जलडमरूमध्य के पास लाल सागर के तटीय इलाकों पर कब्जा किया तो उनकी ताकत काफी बढ़ गई. इससे उन्हें और उनका समर्थन करने वाले ईरान को अमेरिका, उसके खाड़ी सहयोगियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने का एक बड़ा जरिया मिल गया.
बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाला समुद्री व्यापार प्रभावित होने पर जहाजों को अफ्रीका के निचले हिस्से से होकर एक लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है. इसका असर माल ढुलाई, सप्लाई चेन और तेल की आवाजाही पर पड़ेगा. यही वजह है कि इस इलाके में नियंत्रण की लड़ाई सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर असर डालेगा.
अमेरिका सीधे युद्ध में नहीं उतर रहा
सऊदी अरब चाहता है कि अमेरिका भी हूतियों के खिलाफ सीधे हवाई हमले करे. लेकिन फिलहाल अमेरिका ने ऐसा करने से परहेज किया है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका इस अभियान में खुफिया जानकारी और टारगेटिंग सपोर्ट दे रहा है. यानी हूती ठिकानों की पहचान और सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने में मदद की जा रही है, लेकिन अमेरिकी सेना अभी सीधे लड़ाई में शामिल नहीं है. अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि फिलहाल अमेरिका हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले नहीं करेगा. हालांकि, अगर ऑपरेशन मुश्किल में पड़ता है तो यह रुख बदल भी सकता है.
CENTCOM क्या सोच रहा है
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM का रुख है. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबित एक अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि, CENTCOM को यमन में हूतियों के खिलाफ हमले शुरू करने को लेकर गंभीर आपत्तियां थीं. इसकी वजह यह बताई गई कि अमेरिकी सेना का मुख्य ध्यान ईरान पर केंद्रित है. ऐसे में यमन में एक नया सैन्य मोर्चा खोलना अमेरिकी मिलिट्री के संसाधनों और रणनीतिक प्राथमिकताओं को दूसरी दिशा में ले जा सकता है. यानी सऊदी अरब जहां हूतियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई चाहता है, वहीं अमेरिकी सैन्य कमान इस बात को लेकर सतर्क है कि कहीं यमन का संघर्ष ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान से ध्यान न भटका दे.