पिता स्कूल टीचर, बेटे की JAM में नंबर-1 रैंक, IIT छोड़ चुना TIFR, कौन हैं नेपाल के सर्वेश गुप्ता?

पिता स्कूल टीचर, बेटे की JAM में नंबर-1 रैंक, IIT छोड़ चुना TIFR, कौन हैं नेपाल के सर्वेश गुप्ता?


IIT JAM 2026 : मास्टर्स के लिए होने वाली JAM परीक्षा में अच्छा स्कोर हो, तो अधिकतर स्टूडेंट्स की पहली पसंद IIT ही होता है. लेकिन JAM 2026 में नंबर-1 रैंक हासिल करने वाले सर्वेश गुप्ता के मामले में ऐसा नहीं हुआ. इस फिजिक्स स्टूडेंट ने न तो IIT में एडमिशन लिया और न ही देश के शीर्ष संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बैंगलोर में. इसकी बजाए उन्होंने चुना मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) को. उन्होंने यहां थ्योरेटिकल फिजिक्स के इंटीग्रेटेड पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन लिया.

दरअसल, सर्वेस गुप्ता का ड्रीम एक थ्योरेटिकल फिजिसिस्ट बनना है. वह आगे चलकर रिसर्चर और प्रोफेसर के तौर पर काम करना चाहते हैं.

नेपाल से फिजिक्स की दुनिया तक सफर

सर्वेश गुप्ता नेपाल में पले-बढ़े हैं. जहां उनके पिता सरकारी स्कूल में टीचर हैं. लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वह नेपाल के लुंबनी प्रांत के बुटवल के रहने वाले हैं. सर्वेश की फिजिक्स में दिलचस्पी 10वीं-12वीं कक्षा में जागी. शुरुआत में उन्हें गणित पसंद था. लेकिन धीरे-धीरे उनका झुकाव फिजिक्स की ओर हुआ और वह उससे जुड़े सवालों में डूबते चले गए.

सर्वेश ने स्कूल के बाद चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में BS यानी बैचलर ऑफ साइंस की और करियर के तौर पर फिजिक्स में ही रिसर्च के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया. धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी क्योरेटिकल फिजिक्स, खासकर ग्रैविटी, कॉस्मोलॉजी और ग्रेविटेशनल वेव्स की ओर बढ़ने लगी. उनके काम और सीखने की प्रक्रिया में गणितीय आधार, टाइम-सीरीज एनालिसिस और ग्रेविटेशनल-वेव डिटेक्शन जैसी चीजें भी शामिल होती गईं.

पहले तय कर लिया था TIFR में एडमिशन

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेश गुप्ता ने TIFR में एडमिशन लेना पहले से ही तय कर लिया था. थ्योरेटिकल फ़िज़िक्स के लिए संस्थानों के बारे में रिसर्च करते समय उन्हें बार-बार TIFR का ज़िक्र मिला. बाद में, एक कॉम्पिटिशन जीतने के बाद, जिसमें TIFR की लैब का दौरा भी शामिल था, उन्होंने इसके मुंबई कैंपस का दौरा किया.

कैसे की IIT JAM की तैयारी?

इंडिया टुडे के अनुसार, सर्वेश गुप्ता ने IIT JAM 2026 की तैयारी के लिए दिन भर पढ़ाई नहीं की. उनकी तैयारी रूटीन आधारित थी, न कि सब कुछ छोड़कर उसी पर फोकस रहा. उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके रूटीन में जिम सेशन, लेक्चर, कॉलेज, प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्रैक्टिस और वीडियो देखना शामिल था. उन्होंने दोस्तों और रूममेट्स के लिए भी समय निकाला.

सबसे ज़रूरी बात यह थी कि पढ़ाई और आराम के लिए दिन का एक तय समय रखा जाए. मुश्किल सवालों के लिए, उन्होंने दोस्तों के साथ प्रैक्टिस की और समस्याओं को हल करने के अलग-अलग तरीकों पर चर्चा की. इसमें टीचरों की भी भूमिका रही. TIFR का लिखित राउंड क्लियर करने के बाद, उन्होंने डिपार्टमेंट के एक टीचर से मदद ली, जिन्होंने उन्हें तैयारी के लिए टॉपिक दिए और उनका मॉक इंटरव्यू लिया.



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