Jitiya Vrat Parana Time 2026: जीतिया व्रत का पारण कब और कैसे करें? नोट कर लें शुभ समय, पूजा विधि और पारण के नियम

Jitiya Vrat Parana Time 2026: जीतिया व्रत का पारण कब और कैसे करें? नोट कर लें शुभ समय, पूजा विधि और पारण के नियम


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जीतिया व्रत का पारण कब और कैसे करें? नोट कर लें शुभ समय, पूजा विधि और नियम

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Jitiya Vrat Parana Time 2026: जीतिया व्रत का पारण कब और कैसे करें? यह सवाल हर उस महिला के मन में है, जिसने अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए यह कठिन व्रत रखा है. व्रत के सफल समापन के बाद, सही समय और विधि से पारण करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. इस न्यूज इंट्रो में हम आपको जीतिया व्रत के पारण का शुभ समय, पूजा विधि और पारण के नियमों के बारे में विस्तार से बताएंगे, ताकि आप बिना किसी त्रुटि के इस पवित्र अनुष्ठान को पूर्ण कर सकें.

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Jitiya Vrat Parana Time 2026: जितिया व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और अगले दिन इस व्रत का पारण किया जाता है. जितिया व्रत का पारण आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि यानी 4 अक्टूबर दिन रविवार को किया जाएगा. जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत, जिउतिया या जीवित पुत्र व्रत भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माताएं इस व्रत के दौरान निर्जला उपवास रखकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और संतान के मंगल की प्रार्थना करती हैं. व्रत का पारण नवमी तिथि में ही विधि-विधान के साथ करना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं जीतिया व्रत के पारण का शुभ समय, विधि और नियम…

जीतिया व्रत पारण का शुभ समय : 4 अक्टूबर दिन रविवार सुबह 7 बजकर 32 मिनट के बाद

जितिया व्रत पारण विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान करने के बाद सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करें.
  • इसके बाद भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं और पूजा-अर्चना करें.
  • व्रत रखने वाली महिलाएं अपने परिवार की परंपरा के अनुसार भगवान को फल, फूल और प्रसाद अर्पित कर सकती हैं.
  • पूजा समाप्त होने के बाद ही सबसे पहले परिवार के सदस्यों को जितिया व्रत का प्रसाद वितरित करें.
  • सबसे पहले जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है, इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है.
  • बहुत से घरों में जितिया व्रत के पारण के लिए नोनी साग और तोरी की सब्जी खाने की परंपरा है.

जितिया व्रत पारण नियम

  • पारण के नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पारण सही तिथि और समय पर किया जाए.
  • व्रत के दौरान रखे गए धार्मिक नियमों को पूरा करने के बाद ही भोजन करना चाहिए.
  • पारण से पहले ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को श्रद्धानुसार भोजन, वस्त्र, अनाज और दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें.
  • पारण के समय अत्यधिक तला-भुना या भारी भोजन करने से बचना उचित माना जाता है.
  • फल, दूध, हल्का भोजन और सात्विक आहार से व्रत खोलने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है.
  • जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद ही किया जाएगा.

पारण के दिन सात्विकता का विशेष ध्यान
जितिया व्रत के पारण के दिन साफ-सफाई और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार पारण से पहले भगवान जीमूतवाहन और अपने इष्टदेव का स्मरण करना चाहिए. इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भोजन करने की परंपरा भी निभाई जाती है. जितिया व्रत बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में किया जाता है.

जितिया व्रत का महत्व
जितिया व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है. जितिया व्रत का पारण आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को किया जाता है और इस दिन पितृपक्ष की मातृ नवमी का श्राद्ध भी किया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माताएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर अपनी संतान की रक्षा और मंगल के लिए प्रार्थना करती हैं. यह व्रत मातृ प्रेम, त्याग और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक जितिया व्रत रखने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.



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