Business Idea: 4.5 करोड़ निवेश, पुलों की जांच और रोज 50 हजार तक किराया, जानें कमाई का पूरा गणित

Business Idea: 4.5 करोड़ निवेश, पुलों की जांच और रोज 50 हजार तक किराया, जानें कमाई का पूरा गणित


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Mobile Bridge Inspection Unit Business Idea: देश में नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे और पुलों का नेटवर्क बढ़ने के साथ उनकी नियमित जांच और मेंटेनेंस की जरूरत भी बढ़ रही है. इसी बीच मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस सेक्टर में एक अलग बिजनेस मॉडल के रूप में सामने आ रही है. ऑस्ट्रिया से इंपोर्ट होने वाली मशीन की भारत में असेंबलिंग की जाती है और इसे टाटा या प्राइमा जैसे भारी वाहनों के चेसिस पर लगाया जाता है. पूरी यूनिट तैयार करने में करीब 4 से 4.5 करोड़ रुपए तक का निवेश आता है. मशीन को ब्रिज निर्माण कंपनियों, हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर ठेकेदारों को किराए पर दिया जा सकता है. बाजार में इसका किराया करीब 40 से 50 हजार रुपए प्रतिदिन बताया जाता है. 25 दिन काम मिलने पर ग्रॉस रेंटल इनकम करीब 11.25 लाख रुपए महीने तक हो सकती है.

कोटा. देश में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे सड़क का नेटवर्क बढ़ रहा है. इसके साथ ही ब्रिज और पुलों की जांच और मेंटेनेंस की जरूरत भी दिन पे दिन बढ़ती जा रही है. इसी दिशा में मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट को एक बिजनेस मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है. इस मशीन से पुलों के नीचे और उन हिस्सों तक पहुंचने में मदद करती है, जहां आसान तरह से निरीक्षण करना मुश्किल होता है. वहां पर इस मशीन की मदद से इंजीनियर और टेक्निकल एक्सपर्ट पुल के स्ट्रक्चर, बीम, जॉइंट जैसे कई हिस्सों की जांच कर सकते हैं.

यह मशीन ऑस्ट्रिया से इंपोर्ट होती है और भारत में इसकी असेंबलिंग करवाई जाती है. इसे टाटा या प्राइमा जैसे भारी वाहनों के मजबूत चेसिस पर लगाया जाता है. इस पूरी यूनिट तैयार करने में करीब 4 से 4.5 करोड़ रुपए तक का खर्चा आता है. इस मशीन को खुद इस्तेमाल करने के साथ ब्रिज निर्माण, हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ठेकेदारों को किराए पर भी लगाया जा सकता है. बाजार में मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट का किराया करीब 40 से 50 हजार रुपए प्रतिदिन तक लिया जाता है.

समझें कमाई का गणित

अगर मशीन को महीने में 25 दिन भी काम मिलता है और औसतन 45 हजार रुपए प्रतिदिन का किराया मिलता है, तो करीब 11.25 लाख रुपए की मासिक ग्रॉस रेंटल इनकम बन सकती है. वहीं पूरे साल 300 दिन मशीन चलने पर यह आंकड़ा करीब 1.35 करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच सकता है. हालांकि यह ग्रॉस आय है और इसमें ऑपरेटर, डीजल, परिवहन, मेंटेनेंस, बीमा, टैक्स, फाइनेंस और अलग से होता है. ब्रिज इंस्पेक्शन के क्षेत्र में 2015 से काम कर रहे तरुण तिवारी का कहना है कि इस तरह की मशीनों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में हाईवे और पुलों की जांच के लिए किया जा रहा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस सेक्टर में अलग तरह का बिजनेस मॉडल बन सकता है

उन्होंने अभी तक लेह-लद्दाख से केरल और गुजरात से पश्चिम बंगाल तक ब्रिज इंस्पेक्शन का काम किया है. देश में हाईवे, एक्सप्रेसवे और पुलों का नेटवर्क बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा जांच की जरूरत भी लगातार बनी रहेगी. ऐसे में महंगी मशीनरी में निवेश कर उस प्रोजेक्ट को किराए पर देना इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस सेक्टर में एक अलग तरह का बिजनेस मॉडल बन सकता है. हालांकि निवेश से पहले मशीन की वास्तविक मांग, प्रोजेक्ट उपलब्धता और परिचालन लागत का आकलन करना भी बहुत जरूरी माना जाता है.



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