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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगांचल के लिए बीते तीन महीने बेहद भयावह रहे हैं. लगातार बच्चे बीमार पड़ते रहे और उनकी मौतें तक होती रही. सरकारी आंकड़ों में 32 तो क्षेत्रीय विधायक संजय उइके ने 43 मौतों का दावा किया है. अब बीमारियों का सिलसिला थमने लगा है. वहीं, दूसरी तरफ सरकारी महकमा अब वहां पर एक्टिव दिख रहा है.
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगांचल के लिए बीते तीन महीने बेहद भयावह रहे हैं. लगातार बच्चे बीमार पड़ते रहे और उनकी मौतें तक होती रही. सरकारी आंकड़ों में 32 तो क्षेत्रीय विधायक संजय उइके ने 43 मौतों का दावा किया है. अब बीमारियों का सिलसिला थमने लगा है. वहीं, दूसरी तरफ सरकारी महकमा अब वहां पर एक्टिव दिख रहा है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से लेकर पशुपालन विभाग उन गांवों में दिखाई दे रहा है. दरअसल, बैगा समुदाय को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पशुपालन विभाग उन गांवों में सूअर पालन के लिए काम कर रहा है. ऐसे में सवाल ये है कि क्या सूअर पालन से बैगाओं की जिंदगी में बदलाव आएगा. अगर आएगा तो पशुपालन विभाग की क्या योजना है. यहीं सब समझने के लिए लोकल 18 ने पशुपालन विभाग के उप संचालक डॉक्टर घनश्याम परते से बातचीत जानिए उन्होंने क्या बताया…
आजीविका को मजबूत करने शुरु हुआ ये काम
जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र के गांवों में पशुपालन विभाग ने बैगा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बैगा परिवारों के स्वरोजगार से जोड़ने और आजीविका मजबूत करने के लिए पशुपालन विभाग उन गांवों में हितग्राहियों को मुर्गी पालन से लेकर सूकर पालन की स्कीम से बैगाओं को जोड़ रहा है. ऐसे में विभाग का लक्ष्य न सिर्फ विभाग योजनाओं को जमीन तक पहुंचाना है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है. ऐसे में अब तक 40 से ज्यादा बैगा परिवारों को सूकर पालन से जोड़ा जा चुका है.
सूअर पालन की दी जा रही जानकारी
पशुपालन विभाग ग्रामीणों को सूअर पालन की बुनियादी जानकारी दी है. साथ ही सूअरों के रखरखाव की भी जानकारी दी है. साथ ही संतुलित आहार, साफ-सफाई, रोगों से बचाव और समय पर उपचार की भी जानकारी दी जा रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इससे पशु पालन से बैगा समुदाय के लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा.
कम भोजन में ज्यादा ग्रोथ
सूअर एक ऐसा पशु है, जिसकी ग्रोथ बेहद ज्यादा है. यह जितना खाता है लगभग उतना भाग उसके शरीर में लगता है. ऐसे में यह 6 महीने में बिक्री योग्य हो जाता है. वहीं, इसे आप खुला भी छोड़ देते हैं, तो वह अपशिष्ट पदार्थ, कचरा और घर का खराब हो चुका खाना खाकर भी अपनी तेज ग्रोथ कर सकता है. वहीं,
मादा सूअर की प्रजनन क्षमता भी अच्छी होती है, इसलिए एक इकाई से समय के साथ पशुओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है. वहीं, इसे आप आसानी से बाजार में बेच सकते हैं.
बैगाओं का एटीएम बनेगा सुअर
सुअर बैगा समुदाय के आय का प्रमुख जरिया बन सकता है. दरअसल, इसकी इलाके में काफी डिमांड है. यहां से पास ही में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र भी है. ऐसे में सुअर बैगा समुदाय के लिए आय का बढ़िया जरिया बन सकेगा. वहीं, सुअर पालन से पशुपालक को साल भर आय मिल सकेगी. ऐसे में उनके आर्थिक विकास में मदद मिलेगी.